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मोती (Pearl)

मोती  (Pearl)

पर्ल का भारतीय नाम – मोती

मोती का इंग्लिश नाम पर्ल फ्रेंच के पर्ले से आया है, जो लैटिन शब्द परणा से अस्तित्व में आया, जो कौड़ी की एक जाति या किस्म है। गोल एवं कोमलता वाले मोती को आदर्श मोती रत्न माना जाता है। हालांकि, मोती के अन्य आकार भी पाए जाते हैं। जानकारी के अनुसार अच्छी गुणवत्ता वाले प्राकृतिक मोती प्राचीन काल से ही बहुत मूल्यवान रहे हैं। इनका रत्न के रूप में या सौन्दर्य प्रसाधन के रूप में इस्तेमाल होता रहा है।

गुण
एसजी – 2.60-2.78 । आरआई – 1.53-1.68 । कठोरता – 3.5 ।

मोती रत्न दूसरे रत्नों के मुकाबले कम समय तक चलता है, क्योंकि मोती एसिड, सूखेपन और नमी से बहुत जल्द प्रभावित होता है। अति प्राचीन काल के बाद से मोती रत्न को सुंदरता एवं शुद्घता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। शुद्घ मोदी कोमल एवं चमकदार गोल रत्न है, जो सीप के खोल के अंदर पाया जाता है एवं बिवालवे मोलस्क की प्रजाति है। दुर्लभ मोती बहुत कीमती रत्नों के रूप में मूल्यवान है। मोती सफेद, काला, लाल, नीला, भूरा, हलका पीला या गुलाबी रंग का हो सकता है।

प्राकृति मोती लगभग शत प्रतिशत कैल्शियम कार्बोनेट और कन्चिओलिन है। जानकारी के अनुसार प्राकृतिक मोती आकस्मिक परिस्थितियों में बनता है। जब सूक्ष्म घुसपैठिया या परजीवी किसी घोंघा के बीच प्रवेश करता है एवं खोल के भीतर रहता है। इस प्रक्रिया से घोंघा के भीतर का वातावरण प्रभावित होता है एवं इस समय होने वाले संघर्ष के दौरान मोती अस्तित्व में आता है। हालांकि, इसके लिए काफी समय तक बारंबार प्रक्रिया होती है। प्राकृतिक मोती अलग अलग आकार में मिलता है एवं गोल आकार वाले मोती का मिलन दुर्लभ है।

मोती का मुख्य एवं विशाल स्रोत फारस की खाड़ी है। इसके अलावा श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, जापान, इंडोनेशिया, थाइलैंड, मलेशिया, चीन, प्रशांत द्वीप समूह, वेनेजुएला, लाल समुद्र, पनामा एवं दक्षिण भारत के तटों पर भी मोती पाया जाता है। इंडोनेशिया और फिलीपींस के बाद मोती उत्पादन में ऑस्ट्रेलिया सबसे बड़ा उत्पादक देश है। लाल समुद्र, कैलिफोर्निया की खाड़ी एवं फलोरिडा सीप मोती के लिए बेहद प्रख्यात है। प्राकृतिक मोती का भाव खेती कर तैयार किए मोती रत्नों से दस गुणा अधिक होता है, क्योंकि दुर्लभता से मिलने वाले प्राकृतिक मोती की चमक बहुत दिलकश होती है।

मोती धारण करने से निम्नलिखित फायदे होते हैं।

  • मस्तिष्क को सशक्त बनाता है।
  • स्मरणशक्ति बढ़ती है।
  • गुस्से पर काबू रखने में मदद करता है।
  • आत्मविश्वास में वृद्घि होती है।
  • धन संपदा में वृद्घि होती है।
  • तपेदिक, बुखार, मिर्गी, मधुमेह, अनिद्रा, आंख और गर्भाशय की समस्याओं से बचाने में मदद करता है।

क्या आप इस सुंदर एवं आकर्षित मोती से मोहित हैं? आप इसको विविध रूपों में धारण कर सकते हैं। मोती हमेशा फैशन का हिस्सा रहा है। इसके अलावा मोती को लगभग सभी जातक धारण कर सकते हैं। लेकिन अधिक लाभ मोती उन जातकों को प्रदान करता है, जिनका जन्म रत्न मोती है। अधिक जानकारी के लिए आप ज्योतिषी से बात कीजिए

ज्योतिषीय महत्व
राशि – कर्क । ग्रह – चंद्रमा । दिन – सोमवार या गुरुवार शाम।

जून महीने के लिए सीप मोती जन्म रत्न है। इसके अलावा इसको मिथुन एवं कर्क सूर्य राशि के लिए भी जन्म रत्न माना गया है। माना जाता है कि मोती को धारण करने वाले जातकों को प्रेम, धन, सुरक्षा एवं किस्मत का साथ मिलता है। चंद्रमा मोती का स्वामी है। वैदिक ज्योतिषी के अनुसार उनको मोती रत्न धारण करना चाहिए, जिनकी कुंडली में चंद्रमा शुभ घर का स्वामी है। सीप मोती पर विभिन्न देवी-देवताओं की अध्यक्षता है, जैसे कि गहरे मोती पर विष्णु, चंद्रमा पर इंद्र, काले पर यमराज, लाल पर वायुदेव, पीले पर वरुण एवं अधिक प्रतिभाशाली रत्नों पर अग्निदेव की अध्यक्षता है।

रोचक तथ्य – हिंदु समाज में दुल्हन अक्सर अपने नाक में मोती पहनती है, ताकि सुखद वैवाहिक जीवन का आनंद मिल सके एवं सदा सुहागण का जीवन व्यतीत करे।
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गणेशजी के आशीर्वाद सहित
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

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