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मंगल, गुरू और केतु का धनु में महासंयोजन, मिथुन राशि जातकों के लिए इन क्षेत्रों में बढ़ेंगी मुश्किलें

मंगल, गुरू और केतु का धनु में महासंयोजन, मिथुन राशि जातकों के लिए इन क्षेत्रों में बढ़ेंगी मुश्किलें

मंगल, गुरू और केतु का धनु में महासंयोजन राशि चक्र की तमाम राशियों पर अपने शुभ अशुभ प्रभाव डालने वाला है। इस दौरान कुछ राशियों को इसके दुष्प्रभावों का सामना करना होगा तो वहीं कुछ को इसके सकारात्मक प्रभावों से अभिभूत होने का मौका मिलेगा। राशि चक्र की नौंवी राशि धनु अग्नि तत्व और द्विस्वभाव की राशि है। धनु क्षत्रियवर्ण की पुरूष संज्ञक, द्विपाद, रात्रि बलि, सम, पृष्ठोदय, अल्प प्रसव और विषम राशि है। 8 फरवरी 2020 से धनु राशि में अग्नि तत्व के मंगल, आकाश तत्व के गुरू और वायु तत्व के केतु का समायोजन होने वाला है।

धनु राशि में इन तीन विपरीत तत्व ग्रहों का एक साथ उपस्थित होना राशिचक्र के लिहाज से बेहद अहम हो जाता है। गणेशास्पीक्स के अनुभवी ज्योतिषीयों की टीम ने गुरू, मंगल, और केतु के धनु में समायोजन का राशिचक्र की सभी राशियों पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्यन किया है। फिलहाल हम मिथुन राशि जातकों पर इसके प्रभावों का आंकलन करेंगे, मिथुन वायु तत्व की द्विस्वभाव राशि है।

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करियर

मंगल, गुरू और केतु का धनु में महासंयोजन चंद्र राशि मिथुन कुंडली के सातवें घर में हो रहा है। कुंडली का सातवां घर या भाव पति, पत्नी और साझेदारी से संबंध रखता है। मिथुन राशि जातकों के करियर पर इसके प्रभावों की विवेचना करें तो यह अवधि पूर्ण शांति और इच्छित सहयोग प्राप्त करने के लिए अनुकूल नहीं है। इस दौरान अपनी नौकरी या पेशेवर जीवन मे बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लेने से बचें। इस दौरान तनाव आपके प्रदर्शन को प्रभावित करने वाला है, इस समयावधि में अपने काम करने की आंतरिक शैली में बदलाव लाने का प्रयत्न करें और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं।

व्यापार-व्यवसाय

व्यापार, व्यवसाय के लिहाज से ग्रह संयोजन की घटना मिथुन कुंडली के सातवें भाव में घटित होना, इसे मिथुन जातकों के लिए जटिल और मुश्किल भरा बना सकता है। हालांकि इस दौरान आपको व्यापार, व्यवसाय के लिए वैकल्पिक और संभवतः बेहतर दृष्टिकोण तैयार करना चाहिए। इस दौरान अपनी वित्तीय योजनाओं को अधिक बेहतर बनाने का प्रयास करें, लेकिन इस दौरान जल्दबाजी में किसी भी प्रकार का कोई निर्णय लेने की भूल ना करें। व्यापार-व्यवसाय का प्रबंधन संयम और धैर्य का काम है, सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ते रहें।

प्रेम संबंध

साझेदारी से संबंध रखने वाले कुंडली के सातवें भाव में मंगल, गुरू और केतु का समायोजन प्रेम संबंध के मोर्चे पर आपके लिए अनुकूल परिस्थिति का निर्माण करने वाला है। इस दौरान आपके रिश्ते में अधिक स्पष्टता आएगी और आपके बीच की झिझक धीरे-धीरे मजबूत भावनात्मक संबंध में बदल जाएगी। अपने व्यक्तिगत दायरे से बाहर निकलना आपको दबाव की स्थितियों का अधिक कुशलता से सामना करने का अनुभव देगा।

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निजी और वैवाहिक जीवन

मिथुन कुंडली के सातवां भाव में केतु, मंगल और गुरू का समायोजन मिथुन जातकों के वैवाहिक जीवन में कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आने वाला है। क्योंकि कुंडली के सातवें भाव का संबंध पति, पत्नी, साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होता है। हालांकि इस दौरान मिथुन राशि जातकों के वैवाहिक संबंधों में कुछ सकारात्मक होते दिखाई नहीं देता। इस दौरान आपको अपनी भावनाओं पर नियंत्रण कर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने की भरसक कोशिश करनी चाहिए। इस दौरान आप पर आपकी भावनाओं का नियंत्रण हो सकता है, इस बीच आप स्वतंत्र रूप से या भावनाओं में बह कर कोई बड़ा फैसला कर सकते है, जिससे आपके परिवार या जीवन साथी की सहमति नहीं होगी। इस तरह के आचरण से आपके घरेलू जीवन में वाद विवाद की स्थिति बनते दिखाई देती है। इस दौरान आपको धैर्य से अपने परिवार और जीवन साथी से विचार विमर्श के बाद ही कोई फैसला लेना चाहिए। यह समयावधि आपके जीवन में कुछ भावनात्मक मुद्दे लेकर आ सकती है।

स्वास्थ्य

स्वास्थ्य के लिहाज से गुरू, मंगल और केतु का धनु में समायोजन मिथुन राशि जातकों पर औसत प्रभाव डालने वाला है। इस दौरान आप अपनी ऊर्जा का बड़ा हिस्सा अपने वर्तमान कार्य पर केंद्रित करने वाले है। इस दौरान आपको अधिक ऊर्जावान रहने की जरूरत है इसलिए स्वास्थ्य की वैकल्पिक जांच के साथ ही नियमित कसरत या व्यायम से आप ऊर्जावान बने रहे सकते है। इस समयावधि में मजबूत संकल्प शक्ति और धैर्य आपका सबसे अधिक साथ देने वाली है।
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गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

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A Chemist and Jyotish Parasharam from London, he is a global grandmaster. Author of 19 stock market books, with a massive legacy of analyzing 275,000+ horoscopes and 2,500+ media shows, he is the ultimate, most trusted solver for Vastu, Tarot, Numerology, Pranic Healing, Tantra-Mantra, and Yantra-Gem-Rudraksha therapies.

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