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मंगल दोष – नि:शुल्क मंगलदोष पत्रिका, मांगलिक कुंडली, दोष रिपोर्ट

गणेशजी के दिशानिदेशों का पालन करके मंगलदोष के क्रोध को शान्त करें। मंगल,जातक की कुंडली में अलग अलग घरों में रहकर अलग अलग प्रभाव डालता है। आइए जाने कि कुंडली में मंगल दोष कैसे होता है।

जब मंगल कुंडली के 1, 4, 7, 8 या 12 वें स्थान पर हो तो यह एक मंगल दोष है और ऐसे जातक को मांगलिक कहा जाता है। हमारे समाज में मंगल दोष की उपस्थिति एक बहुत बड़ा डर या भ्रम बन गया है। यहां तक की ज्योतिष की लिखी हुई पुरानी किताबों में भी मंगल दोष के बारे में मतभेद हैं, क्या क्या अपवाद उपलब्ध हैं और निवारण के उपाय क्या हैं। जो भी हो मंगल दोष को अनदेखा नहीं किया जा सकता। यह वैवाहिक जीवन में समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए विवाह से पहले मंगल दोष के लिए कुंडली मिलाना अनिवार्य है। यह भी जरुरी है कि कुंडली का विश्लेषण करें और यह पता लगाएं कि कुंडली में मंगल दोष है या नहीं।

  1. यदि मंगल 1ले भाव में रख कर 4, 7 और 8 भाव पर दृष्टि करता है। तो १ हाउस व्यक्ति के चरित्र व को दर्शाता है। इस कारण से व्यक्ति बहुत आवेगी और तुरंत गुस्सा करनेवाला हो सकता है। मंगल से दृष्ट 4 थां भाव ,घर, गाड़ी, अग्नि, रसायन या बिजली से दुर्घटना को दर्शाता है। दृष्ट 7 वें भाव में वैवाहिक जीवन में बाधायें आती हैं। 8 वें भाव में होने से भयंकर दुर्घटना हो सकती है। इस प्रकार लग्न में मंगल का बैठना अशुभ माना जाता है।
  2. यदि मंगल 4 थें भाव में बैठा है तो यह 4 के साथ 7, 10 और 11 को भी प्रभावित करेगा। हमने 4 और 7 के प्रभावित प्रभावों को देखा है। प्रभावित 10वां भाव व्यवसाय में तेजी से बदलाव, अनिद्रा और पिता से तनाव का कारण हो सकता है। 11 वें भाव के प्रभावित होने से चोरी या दुर्घटना में हानि हो सकती है। इसलिए 4 थे भाव में मंगल बहुत अच्छा नहीं है।
  3. यदि मंगल 7 वें भाव में हो तो यह 10, 1 और2 को प्रभावित करता है। 7वां भाव वैवाहिक जीवन और जीवनसाथी का स्थान होता है। इसलिए यहां मंगल का होना वैवाहिक जीवन में कठिनाइयों का सूचक है। 2 रे भाव में मंगल पारिवारिक सदस्यों के बीच विवाद पैदा करता है। मतभेद के कारण परिवार में ख़ुशी की कमी और समस्याएं आ सकती हैं। पैसे खो सकते हैं या खर्च की अधिकता हो सकती है। इसलिए 7 वें भाव में मंगल कठिनाइयों को बढ़ा सकता है।
  4. यदि मंगल 8 वें घर में बैठा है तो यह 11, 2 और 3 को प्रभावित करेगा। व्यक्ति आग, रसायन या बिजली से जानलेवा दुर्घटना का शिकार हो सकता है। यदि 3रां घर मंगल से दृष्ट है तो भाई बहन में तनाव होता है। यह व्यक्ति को बहुत कठोर और हठी बना देता है। इसलिए 8 वें घर में मंगल का होना अच्छा नहीं है।
  5. अगर मंगल 12 वें भाव में हो तो यह 3, 6 और 7 भाव को प्रभावित करता है। 12 वां भाव व्यक्ति की आदतों को दर्शाता है। इससे व्यक्ति खर्च की अधिकता के बोझ तले दब जाता है। व्यक्ति को हाइपर टेंशन के साथ ही पेट से जुड़ी और खून से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए 12 हाउस में मंगल का होना भी अशुभ है।

इस प्रकार मंगल दोष कई तरह की समस्यायों का कारण है। लेकिन ये बहुत मोटे दिशा निर्देश हैं। कई अन्य पहलू और कोण से अध्ययन की जरूरत है। कुडली की समग्र शक्ति, ग्रहों की शक्ति, उपयोगी पहलू और मंगल की शक्ति पर अवश्य विचार किया जाना चाहिए।

मंगल दोष के अपवाद और निवारण :

  1. यदि मंगल दुर्बल है
  2. यदि मंगल आच्छादित है
  3. यदि मंगल मेष या वृश्चिक में है
  4. यदि मंगल उच्च का है
  5. यदि मंगल सिंह के 8वें भाव में है
  6. यदि मंगल धनु के 12 वें भाव में है
  7. यदि मंगल लाभदायक है
  8. यदि उच्च लाभ 9 वें घर में बैठा हो।
  9. यदि मंगल नवांश में अपनी राशि में हो ।
  10. यदि लड़का और लड़की दोनों मांगलिक हों ।

मंगल दोष वैवाहिक जीवन में समस्याएं लाता है और उसे बहुत प्रभावित करता है । लेकिन कुंडली मिलान और मंगल दोष का आकलन एक विशेषज्ञ ज्योतिष का काम है और यह लड़का लड़की दोनों की कुंडली का सावधानीपूर्व विश्लेषक करने के बाद ही किया जा सकता है।

यहां मंगल दोष निवारण के कुछ उपाय दिए गए हैं।
ये मंगल दोष के प्रभाव को काम करेंगे और अच्छा परिणाम देंगे :

  1. प्रतिदिन गणेशजी को गुड़ और लाल फूल चढ़ाएं और पूजा करते हुए 108 बार यह मंत्र पढ़ें ‘ ॐ गं गणपतये नमः’।
  2. यदि स्वस्थ हों तो हर चार महीने में एक बार मंगलवार को रक्तदान करें।
  3. मंगल यन्त्र की स्थापना करें और मंगल प्रार्थना करें।
  4. मंगलवार को सूर्योदय से लेकर अगले सूर्योदय तक का व्रत करें और इस अवधि में सिर्फ फल और दूध ही लें।
  5. मंगल चंडिका मंत्र का नियमित जाप करें।
  6. कुम्भ विवाह, विष्णु विवाह और अश्वत्थ विवाह कराएं।
  7. प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ें।
  8. चिड़ियों को मीठा खिलाएं।

गणेशजी के आशीर्वाद सहित
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम