हिन्दू कैलेंडर के अनुसार मास में दो चतुर्थी होते हैं। शुक्ल पक्ष में आने वाले चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। जबकि कृष्ण पक्ष में आने वाले चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2026 में आने वाले विनायक चतुर्थी की सूची इस प्रकार से है।
साल 2026 में कब-कब है विनायक चतुर्थी
| माह | चतुर्थी का नाम | तिथि व दिन | पूजा मुहूर्त | अवधि | हिंदू मास व तिथि | चतुर्थी तिथि (आरंभ – समाप्ति) |
|---|
| जनवरी | गणेश जयंती / गौरीगणेश चतुर्थी | 22 जनवरी 2026 (गुरुवार) | 11:29 AM – 01:37 PM | 2 घं 08 मि | माघ, शुक्ल चतुर्थी | आरंभ: 22 जनवरी, 02:47 AM समाप्त: 23 जनवरी, 02:28 AM |
| फरवरी | ढुंढिराज चतुर्थी | 21 फरवरी 2026 (शनिवार) | 11:27 AM – 01:00 PM | 1 घं 34 मि | फाल्गुन, शुक्ल चतुर्थी | आरंभ: 20 फरवरी, 02:38 PM समाप्त: 21 फरवरी, 01:00 PM |
| मार्च | वासुदेव चतुर्थी | 22 मार्च 2026 (रविवार) | 11:15 AM – 01:41 PM | 2 घं 26 मि | चैत्र, शुक्ल चतुर्थी | आरंभ: 21 मार्च, 11:56 PM समाप्त: 22 मार्च, 09:16 PM |
| अप्रैल | संकर्षण चतुर्थी | 20 अप्रैल 2026 (सोमवार) | 11:02 AM – 01:38 PM | 2 घं 36 मि | वैशाख, शुक्ल चतुर्थी | आरंभ: 20 अप्रैल, 07:27 AM समाप्त: 21 अप्रैल, 04:14 AM |
| मई | वरदा चतुर्थी | 20 मई 2026 (बुधवार) | 10:56 AM – 11:06 AM | 10 मि | ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्थी | आरंभ: 19 मई, 02:18 PM समाप्त: 20 मई, 11:06 AM |
| जून | प्रद्युम्न चतुर्थी | 18 जून 2026 (गुरुवार) | 10:58 AM – 01:46 PM | 2 घं 48 मि | ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्थी | आरंभ: 17 जून, 09:38 PM समाप्त: 18 जून, 06:58 PM |
| जुलाई | अनिरुद्ध चतुर्थी | 17 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | 11:05 AM – 01:50 PM | 2 घं 45 मि | आषाढ़, शुक्ल चतुर्थी | आरंभ: 17 जुलाई, 06:27 AM समाप्त: 18 जुलाई, 04:42 AM |
| अगस्त | दूर्वा गणपति चतुर्थी | 16 अगस्त 2026 (रविवार) | 11:06 AM – 01:44 PM | 2 घं 38 मि | श्रावण, शुक्ल चतुर्थी | आरंभ: 15 अगस्त, 05:28 PM समाप्त: 16 अगस्त, 04:52 PM |
| सितंबर | गणेश चतुर्थी / सिद्धिविनायक चतुर्थी | 14 सितंबर 2026 (सोमवार) | 11:02 AM – 01:31 PM | 2 घं 28 मि | भाद्रपद, शुक्ल चतुर्थी | आरंभ: 14 सितंबर, 07:06 AM समाप्त: 15 सितंबर, 07:44 AM |
| अक्टूबर | कपर्दीश चतुर्थी | 14 अक्टूबर 2026 (बुधवार) | 10:58 AM – 01:16 PM | 2 घं 18 मि | आश्विन, शुक्ल चतुर्थी | आरंभ: 13 अक्टूबर, 11:27 PM समाप्त: 15 अक्टूबर, 01:13 AM |
| नवंबर | लाभ चतुर्थी | 13 नवंबर 2026 (शुक्रवार) | 11:01 AM – 01:10 PM | 2 घं 09 मि | कार्तिक, शुक्ल चतुर्थी | आरंभ: 12 नवंबर, 06:09 PM समाप्त: 13 नवंबर, 08:42 PM |
| दिसंबर | कृच्छ्र चतुर्थी | 13 दिसंबर 2026 (रविवार) | 11:13 AM – 01:17 PM | 2 घं 04 मि | मार्गशीर्ष, शुक्ल चतुर्थी | आरंभ: 12 दिसंबर, 02:06 PM समाप्त: 13 दिसंबर, 04:47 PM |
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विनायक चतुर्थी का महत्व
विनायक चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। ये व्रत करके भक्त भगवान गणेश से अपनी इच्छाओं की कामना करते हैं। हिन्दू पंचाग के अनुसार ये व्रत हर माह की अमावस्या के चौथे दिन (शुक्ल पक्ष की चतुर्थी) को किया जाता है। गणपति जी को हिन्दू धर्म में प्रथम पूज्य माना गया है। वे सारे संकट हर लेते हैं। विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चौथ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग गणेश जी की पूजा कर धैर्य और बुद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं।
विनायक चतुर्थी की पूजा कैसे करें
– सुबह शुद्ध पानी से नहाकर साफ कपड़े पहनें।
– हिन्दू कैलेंडर के अनुसार विनायक चतुर्थी की पूजा दोपहर के समय करनी चहिए।
– भगवान गणेश की पूजा तिल, गुड़, लड्डू, दुर्वा, चंदन चढ़ाकर करें। उसके बाद गणेश की कथा का पाठ करें।
– भगवान गणेश का वंदन और मंत्रों का जाप करें।
– संध्याकाल गणेश जी की पूजा के बाद, चांद को अर्घ्य देकर पूजा संपन्न करें।
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विनायक चतुर्थी व्रत में क्या खाएं?
विनायक चतुर्थी का व्रत काफी कठिन होता है। इसमें किसी प्रकार के अनाज का सेवन ना करें। विनायक चतुर्थी के दिन फल, कंद-मूल खाया जा सकता है। शाम को चन्द्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद आप उपवास तोड़ सकते हैं। इस व्रत को तोड़ने के बाद शाम को आप साबूदाने की खिचड़ी, आलू और मूंगफली खा सकते हैं।
विनायक चतुर्थी के लिए गणेश मंत्र
गणपति जी की पूजा आप इन मंत्रों से कर सकते हैं।- ॐ गं गणपतये नम:-
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ,
निर्विघ्नं कुरू मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
– ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
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