नया घर केवल ईंट और पत्थरों से बनी हुई संरचना नहीं होता, बल्कि यह जीवन की एक नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। हिंदू परंपरा में वास्तु मुहूर्त, वास्तु शांति और कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। शुभ मुहूर्त में वास्तु पूजा करने से घर में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
वास्तु मुहूर्त क्या है?
हर घर की अपनी एक विशेष ऊर्जा होती है। वास्तु मुहूर्त वह समय होता है जब ग्रह और नक्षत्र आपके नए घर की ऊर्जा के साथ संतुलन में माने जाते हैं। इस शुभ समय में गृह प्रवेश या वास्तु पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है।
मान्यता है कि सही मुहूर्त में नए घर में प्रवेश करने से जीवन में दीर्घकालिक सुख, शांति, स्वास्थ्य और आर्थिक समृद्धि की नींव मजबूत होती है। इसी कारण लोग केवल घर नहीं बनाते, बल्कि उसे एक शुभ शुरुआत के रूप में देखने के लिए वास्तु मुहूर्त का पालन करते हैं।
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जनवरी 2027 में गृह प्रवेश एवं वास्तु पूजन शुभ मुहूर्त, तिथि और समय
| तारीख | दिन | मुहूर्त प्रारंभ | मुहूर्त समाप्त | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|---|---|
| 01 जनवरी 2027 | शुक्रवार | दोपहर 01:12 बजे | शाम 05:27 बजे | चित्रा | दशमी |
फरवरी 2027 में गृह प्रवेश एवं वास्तु पूजन शुभ मुहूर्त, तिथि और समय
| तारीख | दिन | मुहूर्त प्रारंभ | मुहूर्त समाप्त | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|---|---|
| 10 फ़रवरी 2027 | बुधवार | प्रातः 03:07 बजे | प्रातः 07:11 बजे (11 फ़रवरी 2027) | उत्तर भाद्रपद, रेवती | पंचमी |
| 11 फ़रवरी 2027 | गुरुवार | प्रातः 07:18 बजे | प्रातः 03:18 बजे (12 फ़रवरी 2027) | रेवती | पंचमी |
| 15 फ़रवरी 2027 | सोमवार | रात 10:46 बजे | प्रातः 07:10 बजे (16 फ़रवरी 2027) | रोहिणी, मृगशिरा | दशमी |
| 22 फ़रवरी 2027 | सोमवार | प्रातः 11:57 बजे | प्रातः 07:06 बजे (23 फ़रवरी 2027) | उत्तरा फाल्गुनी | द्वितीया, तृतीया |
| 24 फ़रवरी 2027 | बुधवार | रात 08:42 बजे | प्रातः 07:02 बजे (25 फ़रवरी 2027) | चित्रा | पंचमी |
| 25 फ़रवरी 2027 | गुरुवार | प्रातः 07:08 बजे | प्रातः 09:32 बजे | चित्रा | पंचमी |
| 27 फ़रवरी 2027 | शनिवार | प्रातः 11:42 बजे | रात 09:51 बजे | अनुराधा | सप्तमी |
मार्च 2027 में गृह प्रवेश एवं वास्तु पूजन शुभ मुहूर्त, तिथि और समय
| तारीख | दिन | मुहूर्त प्रारंभ | मुहूर्त समाप्त | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|---|---|
| 03 मार्च 2027 | बुधवार | रात 10:37 बजे | प्रातः 06:55 बजे (04 मार्च 2027) | उत्तराषाढ़ा | एकादशी |
| 04 मार्च 2027 | गुरुवार | प्रातः 07:01 बजे | प्रातः 07:22 बजे | उत्तराषाढ़ा | द्वादशी, एकादशी |
| 10 मार्च 2027 | बुधवार | प्रातः 06:56 बजे | प्रातः 06:53 बजे (11 मार्च 2027) | उत्तर भाद्रपद, रेवती | द्वितीया, तृतीया |
| 11 मार्च 2027 | गुरुवार | प्रातः 06:55 बजे | प्रातः 11:12 बजे | रेवती | तृतीया |
| 15 मार्च 2027 | सोमवार | प्रातः 06:51 बजे | प्रातः 10:50 बजे | रोहिणी, मृगशिरा | सप्तमी |
| 22 मार्च 2027 | सोमवार | शाम 04:15 बजे | रात 08:45 बजे | उत्तरा फाल्गुनी | प्रतिपदा |
| 24 मार्च 2027 | बुधवार | प्रातः 06:42 बजे | शाम 07:22 बजे | चित्रा | द्वितीया, तृतीया |
| 26 मार्च 2027 | शुक्रवार | रात 08:37 बजे | प्रातः 06:35 बजे (27 मार्च 2027) | अनुराधा | पंचमी |
| 27 मार्च 2027 | शनिवार | प्रातः 06:39 बजे | दोपहर 01:33 बजे | अनुराधा | पंचमी |
| 31 मार्च 2027 | बुधवार | रात 10:18 बजे | प्रातः 06:30 बजे (01 अप्रैल 2027) | उत्तराषाढ़ा | दशमी |
अप्रेल 2027 में गृह प्रवेश एवं वास्तु पूजन शुभ मुहूर्त, तिथि और समय
| तारीख | दिन | मुहूर्त प्रारंभ | मुहूर्त समाप्त | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|---|---|
| 01 अप्रैल 2027 | गुरुवार | प्रातः 06:33 बजे | प्रातः 09:25 बजे | उत्तराषाढ़ा | दशमी |
मई 2027 में गृह प्रवेश एवं वास्तु पूजन शुभ मुहूर्त, तिथि और समय
| तारीख | दिन | मुहूर्त प्रारंभ | मुहूर्त समाप्त | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|---|---|
| 07 मई 2027 | शुक्रवार | रात 11:42 बजे | प्रातः 06:03 बजे (08 मई 2027) | रोहिणी | द्वितीया |
| 08 मई 2027 | शनिवार | प्रातः 06:03 बजे | प्रातः 06:02 बजे (09 मई 2027) | रोहिणी, मृगशिरा | द्वितीया, तृतीया |
| 15 मई 2027 | शनिवार | दोपहर 12:00 बजे | प्रातः 05:58 बजे (16 मई 2027) | उत्तरा फाल्गुनी | दशमी, एकादशी |
| 17 मई 2027 | सोमवार | शाम 04:28 बजे | प्रातः 05:54 बजे (18 मई 2027) | चित्रा | त्रयोदशी |
| 20 मई 2027 | गुरुवार | शाम 04:28 बजे | प्रातः 05:57 बजे (21 मई 2027) | अनुराधा | प्रतिपदा |
| 21 मई 2027 | शुक्रवार | प्रातः 05:57 बजे | दोपहर 02:51 बजे | अनुराधा | प्रतिपदा |
| 24 मई 2027 | सोमवार | रात 10:58 बजे | प्रातः 05:50 बजे (25 मई 2027) | उत्तराषाढ़ा | पंचमी |
| 31 मई 2027 | सोमवार | प्रातः 05:54 बजे | प्रातः 05:54 बजे (01 जून 2027) | उत्तर भाद्रपद, रेवती | दशमी, एकादशी |
जून 2027 में गृह प्रवेश एवं वास्तु पूजन शुभ मुहूर्त, तिथि और समय
| तारीख | दिन | मुहूर्त प्रारंभ | मुहूर्त समाप्त | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|---|---|
| 05 जून 2027 | शनिवार | रात 09:58 बजे | प्रातः 04:36 बजे (06 जून 2027) | मृगशिरा | द्वितीया |
| 14 जून 2027 | सोमवार | प्रातः 05:54 बजे | शाम 05:28 बजे | चित्रा | एकादशी |
| 16 जून 2027 | बुधवार | शाम 07:44 बजे | प्रातः 03:20 बजे (17 जून 2027) | अनुराधा | त्रयोदशी |
| 21 जून 2027 | सोमवार | प्रातः 05:55 बजे | प्रातः 05:55 बजे (22 जून 2027) | उत्तराषाढ़ा | द्वितीया, तृतीया |
| 26 जून 2027 | शनिवार | शाम 07:22 बजे | रात 09:51 बजे | उत्तर भाद्रपद | सप्तमी |
जुलाई 2027 में गृह प्रवेश एवं वास्तु पूजन शुभ मुहूर्त, तिथि और समय
जुलाई में गृह प्रवेश के लिए कोई शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।
अगस्त 2027 में गृह प्रवेश एवं वास्तु पूजन शुभ मुहूर्त, तिथि और समय
अगस्त में गृह प्रवेश के लिए कोई शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।
सितंबर 2027 में गृह प्रवेश एवं वास्तु पूजन शुभ मुहूर्त, तिथि और समय
सितंबर में गृह प्रवेश के लिए कोई शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।
अक्टूबर 2027 में गृह प्रवेश एवं वास्तु पूजन शुभ मुहूर्त, तिथि और समय
अक्टूबर में गृह प्रवेश के लिए कोई शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।
नवंबर 2027 में गृह प्रवेश एवं वास्तु पूजन शुभ मुहूर्त, तिथि और समय
| तारीख | दिन | मुहूर्त प्रारंभ | मुहूर्त समाप्त | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|---|---|
| 01 नवंबर 2027 | सोमवार | प्रातः 06:47 बजे | प्रातः 09:57 बजे | अनुराधा | तृतीया |
| 04 नवंबर 2027 | गुरुवार | रात 09:40 बजे | प्रातः 06:47 बजे (05 नवंबर 2027) | उत्तराषाढ़ा | सप्तमी |
| 05 नवंबर 2027 | शुक्रवार | प्रातः 06:50 बजे | शाम 06:15 बजे | उत्तराषाढ़ा | सप्तमी |
| 10 नवंबर 2027 | बुधवार | प्रातः 06:53 बजे | प्रातः 09:10 बजे | उत्तर भाद्रपद | एकादशी |
| 11 नवंबर 2027 | गुरुवार | प्रातः 10:10 बजे | प्रातः 06:45 बजे (12 नवंबर 2027) | रेवती | त्रयोदशी |
| 12 नवंबर 2027 | शुक्रवार | प्रातः 06:54 बजे | प्रातः 07:50 बजे | रेवती | त्रयोदशी |
| 15 नवंबर 2027 | सोमवार | प्रातः 07:08 बजे | प्रातः 05:41 बजे (16 नवंबर 2027) | रोहिणी | द्वितीया |
| 22 नवंबर 2027 | सोमवार | रात 08:46 बजे | प्रातः 06:55 बजे (23 नवंबर 2027) | उत्तरा फाल्गुनी | दशमी |
दिसंबर 2027 में गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त, तिथि और समय
| तारीख | दिन | मुहूर्त प्रारंभ | मुहूर्त समाप्त | नक्षत्र | तिथि |
|---|---|---|---|---|---|
| 02 दिसंबर 2027 | गुरुवार | दोपहर 01:44 बजे | प्रातः 02:29 बजे (03 दिसंबर 2027) | उत्तराषाढ़ा | पंचमी |
| 08 दिसंबर 2027 | बुधवार | प्रातः 07:09 बजे | प्रातः 07:09 बजे (09 दिसंबर 2027) | उत्तर भाद्रपद, रेवती | दशमी, एकादशी |
| 09 दिसंबर 2027 | गुरुवार | प्रातः 07:10 बजे | शाम 05:27 बजे | रेवती | एकादशी |
| 13 दिसंबर 2027 | सोमवार | रात 09:39 बजे | प्रातः 07:12 बजे (14 दिसंबर 2027) | मृगशिरा | प्रतिपदा |
| 22 दिसंबर 2027 | बुधवार | प्रातः 07:17 बजे | रात्रि 12:09 बजे (23 दिसंबर 2027) | चित्रा | दशमी |
महत्वपूर्ण सूचना:
श्रावण के बाद चातुर्मास और ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति के कारण वास्तु पूजन और गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त सामान्य रूप से उपयुक्त नहीं माने जाते।
वास्तु मुहूर्त 2027: मुहूर्त क्यों महत्वपूर्ण है?
शुभ समय पर पूजा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और सुख, समृद्धि तथा शांति का प्रवाह बढ़ता है।
ज्योतिष के अनुसार हर कार्य के लिए एक उपयुक्त समय होता है। घर से जुड़े कार्यों में वास्तु मुहूर्त को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा स्थापित करने में मदद करता है।
मुहूर्त तय करते समय किन बातों का ध्यान रखा जाता है?
- गृहस्वामी की कुंडली से अनुकूलता
- गुरु और शुक्र ग्रह का प्रभाव
- चंद्रमा की स्थिति
- राहु काल से बचाव
- शुभ नक्षत्र और तिथि
वास्तु और गृह प्रवेश के लिए शुभ नक्षत्र
- उत्तर भाद्रपद
- पुष्य
- अनुराधा
- उत्तर फाल्गुनी
- रोहिणी
- मृगशिरा
- पुनर्वसु
ये नक्षत्र वृद्धि, स्थिरता, समृद्धि और सामंजस्य के प्रतीक माने जाते हैं।
वास्तु पूजा और कलश स्थापना विधि (चरणबद्ध प्रक्रिया)
- सबसे पहले घर की अच्छी तरह सफाई की जाती है।
- मुख्य द्वार पर रंगोली और स्वस्तिक बनाया जाता है।
- कलश में जल भरकर उसके ऊपर नारियल रखा जाता है।
- भगवान गणेश की पूजा से शुभारंभ किया जाता है।
- घर के वास्तु देवता की पूजा मंत्रों के साथ की जाती है।
- हवन करके घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जाता है।
- अंत में दीपक जलाकर गृह प्रवेश किया जाता है।
वर्ष 2027 में शुभ और अशुभ महीने
शुभ महीने:
- माघ
- फाल्गुन
- वैशाख
- ज्येष्ठ
सामान्य रूप से वर्जित महीने:
- श्रावण
- भाद्रपद
- आश्विन
- खरमास
निष्कर्ष
वास्तु मुहूर्त और वास्तु शांति पूजा हिंदू परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह पूजा सही समय पर करने से घर में समृद्धि, सुख और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। यदि आप नए घर में प्रवेश की योजना बना रहे हैं, तो उचित मुहूर्त का चयन करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
अपने लिए व्यक्तिगत गृह प्रवेश मुहूर्त जानने हेतु ज्योतिष विशेषज्ञों से सलाह लेना उचित होता है।
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FAQs
वास्तु मुहूर्त क्या है?
वास्तु मुहूर्त वह समय होता है जब ग्रह और नक्षत्र आपके नए घर की ऊर्जा के साथ संतुलन में माने जाते हैं। इस शुभ समय में गृह प्रवेश या वास्तु पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है।
वास्तु शांति पूजा का महत्व क्या है?
वास्तु शांति पूजा हिंदू परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह पूजा सही समय पर करने से घर में समृद्धि, सुख और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।
कौन से महीने गृह प्रवेश के लिए शुभ नहीं माने जाते?
श्रावण के बाद चातुर्मास और ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति के कारण वास्तु पूजन और गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त सामान्य रूप से उपयुक्त नहीं माने जाते।
शुभ मुहूर्त में पूजा करने का क्या लाभ होता है?
शुभ समय पर पूजा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और सुख, समृद्धि तथा शांति का प्रवाह बढ़ता है।
व्यक्तिगत गृह प्रवेश मुहूर्त कैसे जानें?
अपने लिए व्यक्तिगत गृह प्रवेश मुहूर्त जानने हेतु ज्योतिष विशेषज्ञों से सलाह लेना उचित होता है।
