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संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि, विधि एवं महत्व

Sankashti Chaturthi 2026

संकष्टी चतुर्थी अथवा संकटहार चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की आराधना में मनाया जाता है। इस दिन उनके भक्त जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने और कठिन परिस्थितियों में सफलता प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।

यह पर्व प्रत्येक माह हिंदू कैलेंडर के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (चौथ) के दिन मनाया जाता है। तमिलनाडु में इसे “संकट हर चतुर्थी” के नाम से जाना जाता है। सबसे महत्वपूर्ण संकष्टी चतुर्थी को “अंगारकी चतुर्थी” कहते हैं, जो मंगलवार के दिन पड़ती है।

संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाती है?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, प्रत्येक माह में चतुर्थी तिथि दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी कहलाती है, जबकि अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी के नाम से जानी जाती है। यह पर्व देश के उत्तर और दक्षिण दोनों भागों में मनाया जाता है। ‘संकष्टी’ शब्द का अर्थ है “कष्टों से मुक्ति दिलाने वाली”।

एक वर्ष में कुल 13 संकष्टी चतुर्थी व्रत किए जाते हैं। यहाँ 2026 में मनाए जाने वाले संकष्टी चतुर्थी पर्वों की सूची दी गई है:

तिथिवारआरंभ समयसमाप्ति समयसंकष्टी चतुर्थी का नामहिंदू माह
06 जनवरी 2026मंगलवार08:03 AM, 06 जनवरी06:53 AM, 07 जनवरीलंबोदर संकष्टीपौष
05 फरवरी 2026गुरुवार12:10 AM, 05 फरवरी12:23 AM, 06 फरवरीद्विजप्रिय संकष्टीमाघ
06 मार्च 2026शुक्रवार05:54 PM, 06 मार्च07:18 PM, 07 मार्चभालचंद्र संकष्टीफाल्गुन
05 अप्रैल 2026रविवार11:59 AM, 05 अप्रैल02:11 PM, 06 अप्रैलविकट संकष्टीचैत्र
05 मई 2026मंगलवार05:25 AM, 05 मई07:52 AM, 06 मईएकदंत संकष्टीवैशाख
03 जून 2026बुधवार09:22 PM, 03 जून11:30 PM, 04 जूनविभूवन संकष्टीअधिक ज्येष्ठ
03 जुलाई 2026शुक्रवार11:21 AM, 03 जुलाई12:40 PM, 04 जुलाईकृष्णपिंगल संकष्टीनिज ज्येष्ठ
02 अगस्त 2026रविवार11:08 PM, 01 अगस्त11:16 PM, 02 अगस्तगजानन संकष्टीआषाढ़
31 अगस्त 2026सोमवार08:50 AM, 31 अगस्त07:42 AM, 01 सितंबरहेरंब संकष्टीश्रावण
29 सितंबर 2026मंगलवार05:10 PM, 29 सितंबर02:56 PM, 30 सितंबरविघ्नराज संकष्टीभाद्रपद
29 अक्तूबर 2026गुरुवार01:07 AM, 29 अक्तूबर10:10 PM, 29 अक्तूबरवक्रतुंड संकष्टीआश्विन
27 नवंबर 2026शुक्रवार09:49 AM, 27 नवंबर06:40 AM, 28 नवंबरगणाधिप संकष्टीकार्तिक
26 दिसंबर 2026शनिवार08:05 PM, 26 दिसंबर05:13 PM, 27 दिसंबरअखुरथ संकष्टीमार्गशीर्ष

संकष्टी चतुर्थी कैसे मनाएं?

  • सुबह: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजन सामग्री: भगवान गणेश को तिल, गुड़, मोदक या लड्डू, दूर्वा घास और चंदन आदि अर्पित कर पूजा तैयार करें।
  • कथा एवं मंत्र: भगवान गणेश की पवित्र कथा का श्रवण या पाठ करें। उनकी स्तुति में विशिष्ट मंत्रों का जाप कर पूजा संपन्न करें।
  • संध्या क्रिया: शाम को गणेश जी की पूजा के पश्चात चंद्र दर्शन कर ‘अर्घ्य’ (जल या गंगाजल अर्पित करना) देकर अपनी विधि पूर्ण करें।

संकष्टी चतुर्थी के लिए समर्पित गणेश मंत्र:

गणपति जी की पूजा आप इन मंत्रो से कर सकते हैं।

  • ॐ गं गणपतये नम:
  • वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
  • ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥

संकष्टी चतुर्थी व्रत के नियम क्या हैं?

  • संकष्टी चतुर्थी का व्रत कठिन अनुशासन के साथ किया जाता है।
  • व्रत के दौरान किसी भी प्रकार के अनाज का सेवन वर्जित होता है।
  • फल और कंद-मूल (जैसे आलू आदि) का सेवन किया जा सकता है।

FAQs

संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाती है?

संकष्टी चतुर्थी प्रत्येक माह हिंदू कैलेंडर के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (चौथ) के दिन मनाई जाती है।

संकष्टी चतुर्थी का महत्व क्या है?

संकष्टी चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की आराधना में मनाया जाता है, जिसमें भक्त जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने और कठिन परिस्थितियों में सफलता प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।

संकष्टी चतुर्थी व्रत के नियम क्या हैं?

संकष्टी चतुर्थी व्रत के दौरान उपवास रखा जाता है और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस दिन भक्त भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करते हैं।

संकष्टी चतुर्थी को 'अंगारकी चतुर्थी' कब कहा जाता है?

संकष्टी चतुर्थी को ‘अंगारकी चतुर्थी’ तब कहा जाता है जब यह मंगलवार के दिन पड़ती है।

2026 में संकष्टी चतुर्थी की तारीखें क्या हैं?

2026 में संकष्टी चतुर्थी की तारीखें हिंदू कैलेंडर के अनुसार निर्धारित की जाएंगी और पूरे वर्ष 13 बार मनाई जाती हैं।

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