संकष्टी चतुर्थी अथवा संकटहार चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की आराधना में मनाया जाता है। इस दिन उनके भक्त जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने और कठिन परिस्थितियों में सफलता प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।
यह पर्व प्रत्येक माह हिंदू कैलेंडर के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (चौथ) के दिन मनाया जाता है। तमिलनाडु में इसे “संकट हर चतुर्थी” के नाम से जाना जाता है। सबसे महत्वपूर्ण संकष्टी चतुर्थी को “अंगारकी चतुर्थी” कहते हैं, जो मंगलवार के दिन पड़ती है।
संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाती है?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, प्रत्येक माह में चतुर्थी तिथि दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी कहलाती है, जबकि अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी के नाम से जानी जाती है। यह पर्व देश के उत्तर और दक्षिण दोनों भागों में मनाया जाता है। ‘संकष्टी’ शब्द का अर्थ है “कष्टों से मुक्ति दिलाने वाली”।
एक वर्ष में कुल 13 संकष्टी चतुर्थी व्रत किए जाते हैं। यहाँ 2026 में मनाए जाने वाले संकष्टी चतुर्थी पर्वों की सूची दी गई है:
| तिथि | वार | आरंभ समय | समाप्ति समय | चंद्रोदय का समय | संकष्टी चतुर्थी का नाम | हिंदू माह |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 06 जनवरी 2026 | मंगलवार | 08:03 AM, 06 जनवरी | 06:53 AM, 07 जनवरी | 09.21 PM | लंबोदर संकष्टी | पौष |
| 05 फरवरी 2026 | गुरुवार | 12:10 AM, 05 फरवरी | 12:23 AM, 06 फरवरी | 09:48 PM | द्विजप्रिय संकष्टी | माघ |
| 06 मार्च 2026 | शुक्रवार | 05:54 PM, 06 मार्च | 07:18 PM, 07 मार्च | 09:19 PM | भालचंद्र संकष्टी | फाल्गुन |
| 05 अप्रैल 2026 | रविवार | 11:59 AM, 05 अप्रैल | 02:11 PM, 06 अप्रैल | 09:47 PM | विकट संकष्टी | चैत्र |
| 05 मई 2026 | मंगलवार | 05:25 AM, 05 मई | 07:52 AM, 06 मई | 09:19 PM | एकदंत संकष्टी | वैशाख |
| 03 जून 2026 | बुधवार | 09:22 PM, 03 जून | 11:30 PM, 04 जून | 09:51 PM | विभूवन संकष्टी | अधिक ज्येष्ठ |
| 03 जुलाई 2026 | शुक्रवार | 11:21 AM, 03 जुलाई | 12:40 PM, 04 जुलाई | 09:51 PM | कृष्णपिंगल संकष्टी | निज ज्येष्ठ |
| 02 अगस्त 2026 | रविवार | 11:08 PM, 01 अगस्त | 11:16 PM, 02 अगस्त | 09:37 PM | गजानन संकष्टी | आषाढ़ |
| 31 अगस्त 2026 | सोमवार | 08:50 AM, 31 अगस्त | 07:42 AM, 01 सितंबर | 08:50 PM | हेरंब संकष्टी | श्रावण |
| 29 सितंबर 2026 | मंगलवार | 05:10 PM, 29 सितंबर | 02:56 PM, 30 सितंबर | 08:13 PM | विघ्नराज संकष्टी | भाद्रपद |
| 29 अक्तूबर 2026 | गुरुवार | 01:07 AM, 29 अक्तूबर | 10:10 PM, 29 अक्तूबर | 08:53 PM | वक्रतुंड संकष्टी | आश्विन |
| 27 नवंबर 2026 | शुक्रवार | 09:49 AM, 27 नवंबर | 06:40 AM, 28 नवंबर | 08:51 PM | गणाधिप संकष्टी | कार्तिक |
| 26 दिसंबर 2026 | शनिवार | 08:05 PM, 26 दिसंबर | 05:13 PM, 27 दिसंबर | 08:45 PM | अखुरथ संकष्टी | मार्गशीर्ष |
संकष्टी चतुर्थी का महत्व
संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश की भक्ति और आराधना के लिए किया जाता है। माना जाता है कि यह व्रत जीवन की परेशानियों, बाधाओं और संकटों को दूर करने में सहायक होता है। “संकष्टी” शब्द का अर्थ है — संकटों से मुक्ति दिलाने वाली। इस दिन भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना और व्रत रखकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से:
- भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है
- नकारात्मक विचार और मानसिक तनाव कम होते हैं
- घर में सुख, शांति और सौहार्द बना रहता है
- जीवन की बाधाएँ और कठिनाइयाँ दूर होती हैं
- करियर और व्यापार में उन्नति के मार्ग खुलते हैं
चंद्रोदय का महत्व क्यों है?
संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा के दर्शन के बाद ही पूर्ण माना जाता है। पूरे दिन उपवास रखने के पश्चात भक्त रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करते हैं और फिर व्रत का पारण करते हैं।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा मन की शांति, संयम और मानसिक स्थिरता का प्रतीक है। इसलिए चंद्रोदय के समय पूजा और अर्घ्य देने से व्रत सफल और पूर्ण माना जाता है।
संकष्टी चतुर्थी कैसे मनाएं?
- सुबह: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजन सामग्री: भगवान गणेश को तिल, गुड़, मोदक या लड्डू, दूर्वा घास और चंदन आदि अर्पित कर पूजा तैयार करें।
- कथा एवं मंत्र: भगवान गणेश की पवित्र कथा का श्रवण या पाठ करें। उनकी स्तुति में विशिष्ट मंत्रों का जाप कर पूजा संपन्न करें।
- संध्या क्रिया: शाम को गणेश जी की पूजा के पश्चात चंद्र दर्शन कर ‘अर्घ्य’ (जल या गंगाजल अर्पित करना) देकर अपनी विधि पूर्ण करें।
संकष्टी चतुर्थी के लिए समर्पित गणेश मंत्र:
गणपति जी की पूजा आप इन मंत्रो से कर सकते हैं।
- ॐ गं गणपतये नम:
- वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
- ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
संकष्टी चतुर्थी में क्या खाना चाहिए?
संकष्टी चतुर्थी के व्रत के दौरान हल्का और सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है।
फलाहार में सेवन किए जाने वाले खाद्य पदार्थ
- फल
- मखाना
- साबूदाना खिचड़ी
- सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन
- दूध और सूखे मेवे
- आलू से बने व्रत वाले स्नैक्स
व्रत के दौरान प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
संकष्टी चतुर्थी व्रत के लाभ
श्रद्धा और भक्ति के साथ संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से व्यक्ति को मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। इस व्रत के माध्यम से:
- एकाग्रता में सुधार हो सकता है
- मानसिक और भावनात्मक संतुलन बना रहता है
- धैर्य और अनुशासन का विकास होता है
- आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव होता है
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी क्या है?
जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ती है, तब उसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। यह संकष्टी चतुर्थी अत्यंत शुभ और प्रभावशाली मानी जाती है।
मान्यता है कि अंगारकी संकष्टी का व्रत करने से अनेक सामान्य संकष्टी व्रतों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश के मंदिरों में दर्शन और पूजा के लिए जाते हैं।
वर्ष 2026 में अंगारकी संकष्टी चतुर्थी
29 सितंबर 2026 (मंगलवार) — भाद्रपद माह की विघ्नराज संकष्टी
6 जनवरी 2026 (मंगलवार) — पौष माह की लंबोदर संकष्टी
भगवान गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी का व्रत भक्तों के जीवन से बाधाओं और संकटों को दूर करने वाला माना जाता है। यह व्रत श्रद्धा, अनुशासन और सकारात्मकता का प्रतीक है।
जो श्रद्धालु पूरे विश्वास और भक्ति के साथ इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सफलता प्राप्त होने की मान्यता है। यदि आप भी अपने जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा चाहते हैं, तो इस वर्ष संकष्टी चतुर्थी व्रत अवश्य करें।
FAQs
संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाती है?
संकष्टी चतुर्थी प्रत्येक माह हिंदू कैलेंडर के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (चौथ) के दिन मनाई जाती है।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व क्या है?
संकष्टी चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की आराधना में मनाया जाता है, जिसमें भक्त जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने और कठिन परिस्थितियों में सफलता प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।
संकष्टी चतुर्थी व्रत के नियम क्या हैं?
संकष्टी चतुर्थी व्रत के दौरान उपवास रखा जाता है और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस दिन भक्त भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करते हैं।
संकष्टी चतुर्थी को 'अंगारकी चतुर्थी' कब कहा जाता है?
संकष्टी चतुर्थी को ‘अंगारकी चतुर्थी’ तब कहा जाता है जब यह मंगलवार के दिन पड़ती है।
2026 में संकष्टी चतुर्थी की तारीखें क्या हैं?
2026 में संकष्टी चतुर्थी की तारीखें हिंदू कैलेंडर के अनुसार निर्धारित की जाएंगी और पूरे वर्ष 13 बार मनाई जाती हैं।
