पश्चिमोत्तानासन योग – पीछे की ओर खिंचाव (स्ट्रेच)

पश्चिमोत्तानासन योग या बैठकर आगे की तरफ झुकने की मुद्रा, पश्चिम या पीठ के खिंचाव (स्ट्रेच) का एक गहन योग है। पश्चिमोत्तानासन नाम तीन संस्कृत शब्दों, पश्चिम, उत्तान व आसन का एक संयोजन है, जिसका शाब्दिक अर्थ हुआ पीछे के हिस्से यानी पीठ को तानना और उसे मोड़ना। यह कहा जाता है कि पश्चिमोत्तानासन मुद्रा सबसे अच्छे योग आसनों में से एक है और इस मुद्रा का अभ्यास जादुई शक्तियों को उजागर करता है।

हठ योग के पारंपरिक आसनों में से एक पश्चिमोत्तानासन के लाभ शरीर की सभी प्रणालियों के लिए हैं, यह मानसिक ऊर्जा चैनलों को सक्रिय करता है और प्राणधार वायु को नियंत्रित करना है। यह बहुत साधारण, लेकिन चुनौतीपूर्ण है। आप ऐसा अनुभव करते हैं, जब आप इसे पहली बार करते हैं और इस आसन के लक्ष्य तक पहुंचते हैं यानी अपने सिर को नीचे की तरफ खींचते हुए पैरों को छूते हैं। हालांकि, इसके अलावा भी बहुत कुछ है। यह आसन, इसके लाभ और इसके अभ्यास करने के विभिन्न चरणों के बारे में अधिक जानने के लिए पढ़ना जारी रखें।

पश्चिमोत्तानासन मुद्रा क्या है - त्वरित तथ्य

पश्चिमोत्तानासन मुद्रा एक सरल और पारंपरिक हठयोग आसन है, जिसमें शरीर के पिछले हिस्से में खिंचाव दिया जाता है। यह बैठने वाली मुद्रा की श्रेणी से संबंधित है और पूरे शरीर की चिकित्सा के लिए सबसे अच्छे योग आसनों में से एक है। पश्चिमोत्तानासन में शरीर को अंदर की ओर मोड़ा जाता है, जो आपकी पिंडली व घुटनों की पिछली नसों से लेकर आपकी रीढ़ तक की सभी जगहों पर खिंचाव पैदा करता है।

बता दें कि यहां पश्चिम के मायने शरीर के पीछे वाले भाग यानी पीठ से है, वहीं उत्तानासन का अर्थ है आगे की ओर मुड़ना। पश्चिम दर्शन के अनुसार हमारे शरीर के अग्र भाग को पूर्व और पीछे को पश्चिम कहा जाता है। इस आसन के नाम का शाब्दिक अर्थ है पीछे की ओर तीव्र खिंचाव व आगे की तरफ पूरा झुकना। चूंकि पीठ में ज्यादा खिंचाव होता है इसलिए इस मुद्रा को इसी नाम से जाना जाता है।

पश्चिमोत्तानासन के जबरदस्त स्वास्थ्य लाभ हैं और यह पूरे शरीर की प्रणाली को प्रभावित करता है। इसका ज्यादा ध्यान रीढ़ पर है, लेकिन यह शरीर के ऊर्जा स्तर को भी बढ़ाता है, इसके अलावा आपको धैर्य और सांस पर नियंत्रण रखना भी सिखाता है।

पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास कैसे करें - उत्तरोत्तर निर्देश

पश्चिमोत्तानासन योग के निम्नलिखित छह स्टेप करके शांति की आंतरिक स्थिति को प्राप्त करें।

-योग चटाई पर सीधे बैठें, अपने पैर सीधे सामने की तरफ फैलाएं।
-अपनी रीढ़ की हड्डी और पैर की उंगलियों को अपनी ओर करें।
-अपनी सांस को सामान्य रखते हुए धीरे-धीरे सांस लें।
-सांस लेते हुए दोनों बाजुओं को सीधे अपने सिर के ऊपर उठाएं और अपने शरीर को ऊपर की ओर खींचें।
-धीरे-धीरे सांस छोड़ें और अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को नितंब के जोड़ से आगे की ओर झुकाएं, आपकी ठुड्डी घुटनों की ओर बढ़ाएं। ऐसा करते हुए अपनी रीढ़ को सीधा रखें।
-अब अपने हाथों को अपने पैरों पर रखें, जहां तक वे पहुंच सकते हैं, जबरदस्ती आगे न बढ़ाएं।
-जरूरत पड़ने पर आप अपने पैरों की उंगलियों को पकड़ सकते हैं और उन्हें खींच भी सकते हैं, इससे झुकने में मदद मिलती है। आप पैर के तलवों पर भी अपनी पकड़ बनाकर झुक सकते हैं।
-पेट का निचला हिस्सा पहले जांघ को स्पर्श करें, फिर पेट का ऊपरी हिस्सा, फिर पसलियां और अंत में सिर। अब जब तक आप रह सकते हैं, तब तक इस स्थिति में बने रहिए।
-हरेक सांस के साथ धड़ को तानें यानी स्ट्रेच करें और हरेक सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें।
-जब ऐसा लगने लगे कि आप अब झुकी हुई स्थिति में नहीं रह सकते, तो धीरे-धीरे श्वास लें और अपने शरीर को ऊपर उठाएं, अपने हाथों को सीधा रखकर खींचते हुए अपने सिर से ऊपर से लाएं।
-अब धीरे-धीरे सांस छोड़ें, अपनी बाजुओं को नीचे लाएं और हथेलियों को जमीन पर सपाट रखें।
-थोड़ी देर के लिए आराम करें और अपने शरीर को उन परिवर्तनों को महसूस करने दें जो भीतर हुए थे।

पश्चिमोत्तानासन के लाभ

पश्चिमोत्तानासन योग मुद्रा की भले ही एक स्थिर छवि आपको दिखाई देती है, लेकिन यह आपके शरीर के कई अलग-अलग हिस्सों को लाभ पहुंचाता है। इस आसन का मुख्य लाभ यह है कि यह आपके शरीर के पूरे पिछले हिस्से को, एड़ी से लेकर सिर तक खिंचाव पैदा करता है। यह शरीर और मन के कई रोगों को शांत करने और आंतरिक शांति की भावना पैदा करता है। इसके अलावा पश्चिमोत्तानासन योग मुद्रा से ये लाभ भी होते हैं-

शारीरिक लाभ:

-आपके शरीर को खोलने में मदद करता है, उनके लचीलेपन में सुधार लाता है

-रक्त परिसंचरण में सुधार करता है

-पेट की चर्बी को जलाता है और हाथों व कंधों की मांसपेशियों को टोन करता है

-जिगर, गुर्दे, गर्भाशय और अंडाशय को उद्दीप्त (स्टिम्युलेट्स) करता है

-क्वॉड्स को मजबूत करता है और रीढ़ को सही आकार देता है।

उपचारात्मक लाभ:

-शरीर में कुंडलिनी ऊर्जा को सक्रिय करने में मदद करता है
-तनाव और चिंता से लड़ने में मदद करता है
-मन को शांत करने और अच्छी नींद में मदद करता है
-मन की एकाग्रता को बढ़ाता है
-रजोनिवृत्ति के दौरान होने वाली दिक्कतों को दूर करने में मदद करता है
-उच्च रक्तचाप, साइनसाइटिस और बांझपन को ठीक करने में मदद करता है

यह तीव्र पृष्ठीय खिंचाव आपको धैर्य के साथ ही सांसों पर नियंत्रण रखना सिखाता है। हरेक स्ट्रेच के साथ आप ज्यादा खुलापन महसूस करते हैं।

इस बैठकर आगे की ओर झुकने वाली मुद्रा का दैनिक अभ्यास करने से पाचन संबंधी दिक्कतें दूर होने के साथ ही महिलाओं में मासिक चक्र को सामान्य करने में भी मदद मिलती है। यह कम या ज्यादा, दोनों तरह के वजन वाले लोगों के लिए वरदान है, क्योंकि यह वसा को जलाता है और भूख भी बढ़ाता है। निराश या कम ऊर्जावान लोग अपनी दिनचर्या में इस अभ्यास को शामिल करके अपनी ऊर्जा बढ़ा सकते हैं।

चुनौतियां और आशोधन (मॉडिफिकेशन)

क्या पश्चिमोत्तानासन मुश्किल है? वैसे, पश्चिमोत्तानासन मुद्रा सरल लगती है, लेकिन वास्तव में यह सबसे कठिन योग है, लेकिन इसके लाभों को देखते हुए इसे करने की कोशिश करनी चाहिए।
इस आसन का अभ्यास न करें, अगर-
-पीठ की चोट या पीठ संबंधी समस्या हो
-अस्थमा या सांस लेने की समस्या हो
-दस्त जैसे पाचन संबंधी समस्या हो
-गर्भवती होने पर

एक प्रशिक्षित योग शिक्षक के मार्गदर्शन में इसका अभ्यास करना चाहिए। शुरू में आपको यह काफी मुश्किल लग सकता है, लेकिन दैनिक अभ्यास से आपकी रीढ़ को इस खिंचाव (स्ट्रेच) की आदत हो जाएगी।

पश्चिमोत्तानासन को ठीक तरह करने के लिए यहां तीन तरीके दिए जा रहे हैं-

1. अगर आप घुटनों के पीछे की नस (हैमस्ट्रिंग) के सख्त होने के कारण सांस नहीं ले पा रहे, तो-

अपने घुटनों को मोड़ें और उन्हें एक साथ दबाएं, अपने पंजों को तब तक लचीला करें, जब तक कि आप उन्हें पकड़ न सकें। यदि आपको अभी भी यह मुश्किल लगता है, तो आप अपनी टखनों या पिंडलियों को पकड़ सकते हैं। अब अपने सिर को घुटनों की तरफ झुकाएं और नाक के ठीक नीचे आ रही सांसों की आवाज और पसलियों की गति पर ध्यान दें।

2. यदि आप पेट दबने के कारण अच्छी और गहरी सांस नहीं ले पा रहे हैं, तो-

अपने पैरों को थोड़ा फैलाएं, लेकिन ज्यादा दूरी से अधिक नहीं और फिर अपने घुटनों को मोड़ें। इससे आपके पेट पर दबाव कम होगा। अब अपने पैरों को जरा ढीला छोड़ें, उन्हें बाहर की तरफ से पकड़ें और धीरे-धीरे सांस लेते हुए पीठ के ऊपरी हिस्से को आराम दें।

3. यदि आपको पुराना पीठ दर्द या स्लिप डिस्क की समस्या है तो-

अपनी रीढ़ को सामान्य स्थिति में रखते हुए श्रोणि (पेल्विक) की तरफ थोड़ा सा झुकाएं। पेट और जांघों के बीच वाले हिस्से (ग्रॉइन) को आराम दें और अपने नितंबों को थोड़ा फैलाएं। अब श्रोणि (पेल्विक) और निचले पेट को धीरे-धीरे ऊपर की ओर खींचें, इससे पीठ पर दबाव थोड़ा कम होगा। यदि अभी आप सहज नहीं है, तो आप अपने घुटनों को थोड़ा मोड़ सकते हैं। अपने पैरों या टखनों तक बहुत धीरे-धीरे पहुंचें, बिना अपनी पीठ पर दबाव बनाए हुए, लेकिन रीढ़ को मोड़े बिना।

ऊर्ध्व मुख पश्चिमोत्तानासन, यह पश्चिमोत्तानासन का ही व्यापक रूप है। इसे शरीर के पिछले हिस्से के अत्यधिक खिंचाव (स्ट्रेच) भी कह सकते हैं। इसे दिए गए सरल निर्देशों के साथ किया जा सकता है:

-अपनी पीठ के बल सीधे लेट जाएं। अपने घुटनों को अपने धड़ की तरफ झुकाते हुए सांस छोड़ें।
-अब सांस लें और अपनी एड़ी को छत की ओर बढ़ाएं।
– सांस छोड़ें और अपने घुटनों को सिर तक लाएं, ताकि वे वहां आराम कर सकें।
-याद रखें कि अपने श्रोणि (पेल्विक) के पिछले हिस्से को फर्श से न उठाएं।

आप कमर के नीचे मुड़ा हुआ कंबल या किसी और चीज का इस्तेमाल भी कर सकते हैं और एक अच्छा और आरामदायक खिंचाव का अनुभव कर सकते हैं।

शुरुआती लोगों के लिए पश्चिमोत्तानासन

पैरों के पिछले हिस्से में जकड़न के कारण आप शुरुआत में बहुत आगे तक नहीं बढ़ सकते। ऐसे में यदि आपने अभी-अभी अभ्यास शुरू किया है, तो खुद को आगे झुकने के लिए मजबूर न करें। और भोजन के तुरंत बाद इस अभ्यास को कभी भी शुरू न करें।

यदि आप इस मुद्रा के लिए शुरुआती या नए हैं, तो…

1. प्रक्रिया के दौरान बहुत धैर्य रखें। अपनी पीठ को गोल न करें, न ही अपने सिर को ढीला छोड़ें, क्योंकि ऐसा करने से आपके वर्टिब्रा पर दबाव पड़ सकता है और डिस्क को नुकसान पहुंचा सकता है।

2. अपनी पीठ को मजबूत बनाने के लिए शलभासन का अभ्यास करें। ऊपर दिए गए सुझावों को अपनाएं ताकि आप अपने नितंबों को लचीला बना सकें और अपनी रीढ़ में ज्यादा कठिनाई महसूस किए बिना खिंचाव पैदा कर सकें।
3. आप कुछ अन्य प्रारंभिक मुद्राएं भी आजमा सकते हैं, जैसे-

– अधो मुख श्वानासन (डाउनवर्ड डॉग पोज)
– बालासन (द चाइल्ड्स पोज)
-दंडासन (स्टाफ पोज)
-उत्तानासन (फॉरवर्ड फोल्ड पोज)

जब आप इस बैठकर आगे की ओर झुकने वाले आसन का अभ्यास शुरू करते हैं, तो आपको अपने शरीर और सांस दोनों को सुनने की जरूरत होती है। यदि आप तीन लंबी सांसों के जरिए आसन को पकड़ नहीं सकते, तो इसका मतलब है कि आपने बहुत जल्दबाजी कर दी है। इसे करने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप इस मुद्रा को गहराई से समझने के लिए थोड़ा वक्त लें।

निष्कर्ष

पश्चिमोत्तानासन या आगे की ओर झुकना कई लाभों के साथ एक बहुत ही दिलचस्प आसन है, पीठ और रीढ़ के खिंचाव के साथ ही उसे सीध में लाना महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर यह आसन सिर से पैर तक के लिए है, जो कि एक ही मुद्रा में एक दुर्लभ घटना है। इस आसन में लक्ष्य पेट पर है, जो श्वसन प्रणाली से भी जुड़ा हुआ है, ऐसे में पेट और श्वसन दोनों मुद्दों को हल किया जाता है। इस योग मुद्रा के बारे में कहा जाता है कि इसके जरिए कुछ उन मनोदैहिक व्याधियों का इलाज भी किया जाता है, जिनका चिकित्सा जगत में कोई इलाज नहीं है। यदि आपने अभी तक शुरुआत नहीं की है, तो इसे तुरंत बेहतर करें और नियमित अभ्यास के साथ आप जल्द से जल्द इस महान आसन में महारत हासिल करें।

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