ज्योतिष एवम् वास्तु से जानें पढ़ाई और परीक्षा में सफलता के सूत्र

ज्योतिष एवम् वास्तु से जानें पढ़ाई और परीक्षा में सफलता के सूत्र

शिक्षा में सफलता और खुशी के लिए श्योर शॉट तरीका

जीवन में तीन सबसे बुनियादी जरूरतें हैं भोजन, आश्रय और कपड़े। लेकिन, वर्तमान समय में शिक्षा प्राप्त करना इन तीन आवश्यकताओं और अन्य जरूरतों को पूरा करने का एक सुनिश्चित तरीका है। आधुनिक दुनिया में, शिक्षा और अच्छी पढ़ाई मूल सोच और रचनात्मकता के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकती है। शिक्षा वास्तव में एक व्यक्ति के जीवन को ऊंचा उठा सकती है। धन और समृद्धि भी दिला सकती है। रीति व परंपरा के अनुसार, शिक्षा और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती शिक्षा प्राप्त करने वालों को अच्छे परिणाम देती है। इसके अलावा, शिक्षा आपके जीवन में तरक्की के अनगिनत क्षेत्रों को खोलती है। जो व्यक्ति शिक्षा प्राप्त करता है वह इसे निष्ठापूर्वक ग्रहण करके किसी विशेष प्रतिभा को विकसित कर सकता है। माता-पिता इन दिनों अपने बच्चों को बहु-प्रतिभाशाली बनाना चाहते हैं। देवी सरस्वती इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनकी प्रसन्नता के बाद ही देवी लक्ष्मी आप पर अपने धन और समृद्धि की वर्षा करती हैं।

शैक्षिक भाग्य को चमकाता है ज्योतिष विज्ञान

सभी माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाई में श्रेष्ठ बनाना चाहते हैं। उचित तरीके से शिक्षा प्राप्त करना आधुनिक सभ्यता की पहचान बन गया है। अन्य हितेषियों की तरह ही ज्योतिष का प्राचीन विज्ञान भी आपका मार्गदर्शन कर सकता है। एक ज्योतिषी आपको सही विषय चुनने में मदद कर सकता है, संबंधित विषयों के अध्ययन में उत्कृष्टता प्राप्त करा सकता है और जीवन को ऊंचा उठाने में अहम रोल अदा कर सकता है।

क्या आप बच्चे के जन्म से संबंधित समस्याओं का सामना कर रहे हैं? तो हमारी सेवा संतान प्राप्ति से जुडी समस्यारिपोर्ट खरीदें और अपनी समस्याओं को मिटाएं।

सही विकल्प चुनने में मदद कर सकता है ज्योतिष विज्ञान

आज पढ़ाई में इतने सारे विकल्प हैं कि किसी को पढ़ाई का कौन सा विषय चुनना चाहिए इसे लेकर हर पल दुविधा रहती है। इस स्थिति में, आपका जन्म-कुंडली का ज्योतिषीय विश्लेषण आपको सही प्रकार से मार्गदर्शन कर सकता है। ज़ाहिर है, बच्चे अपने कैरियर और जीवन को उज्जवल करने में जरा भी देरी नहीं करना चाहेंगे। यद्यपि ज्योतिष आपके बच्चे के भविष्य को पूरे सही तरीके से बता नहीं सकता। यह आपको इस दिशा में केवल मार्गदर्शन संकेत कर सकता है। यह निश्चित रूप से आपकी कुंडली के ग्रहों के विभिन्न पहलुओं के आधार वो मार्गदर्शन दे सकता है जिसके जरिए आपको आसानी से सफलता मिले। आपके बच्चे के कैरियर के लिहाज से आगे चलकर कौन सा विषय सबसे सहायक व प्रोत्साहक रहेगा इसकी दृष्टि ज्योतिष देता है। इस तरह, अभिभावकों को अनावश्यक रूप से उन पाठ्यक्रमों पर पैसा खर्च करने से बचाया जा सकता है जिनका चुनाव करने पर आगे चलकर उनके बच्चों को किसी तरह का लाभ नहीं मिलने वाला।

हवन, पूजा और अनुष्ठान

इसके अलावा, ज्योतिष आपको बहुत सारे ज्योतिषीय उपाय प्रदान करता है, जो छात्रों को पढ़ाई में उत्कृष्टता दिला सकते हैं। इन उपायों में हवन, अग्नि अनुष्ठान और पूजा आदि शामिल हो सकता है। लेकिन आपके जन्म के ग्रहों के अध्ययन और उसके अनुसार सही उपाय करने से निश्चित रूप से इन उपर्युक्त अनुष्ठानों की तुलना में आपको ज्यादा मदद मिल सकती है।

शैक्षिक क्षेत्र और आपकी बुद्धिमत्ता में चार चाँद लगाते हैं ये ग्रह

यदि चंद्रमा, बुध, बृहस्पति जैसे ग्रहों कुंडली में एक नकारात्मक स्थान पर बैठा हुए हैं, तो आपकी संतान को शिक्षा में कठिनाई होने की संभावना है। ये ग्रह पढ़ाई और संबंधित क्षेत्रों जैसे एकाग्रता, ग्रहण, ज्ञान और तर्क शक्ति इत्यादि से वास्ता रखते हैं। तो, ये ग्रह आपके जन्म कुंडली में शक्तिशाली होना ही चाहिए। इस प्रकार पढ़ाई में अवरोध डालने वाले ग्रहों की समस्या को हल करने के लिए आपको एक अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेनी चाहिए। उसके सुझावों का पालन करके बुद्धि को ठिकाने रखिए। कुंडली में 5 वां भाव विद्यालय का प्रतिनिधित्व करता है, चौथा भाव कॉलेज के अध्ययन के बारे में है और 9वां घर उच्च शिक्षा जैसे परास्नातक डिग्री के विषय में बतलाता है। यदि बुध और बृहस्पति का यहां शुभ प्रभाव पड़ता तो यह आपके बच्चे की शैक्षणिक संभावनाओं को उज्ज्वल कर सकता है।

क्या आप अपने बच्चे की शिक्षा समस्याओं का समाधान करना चाहते हैं? शिक्षा का लाभ उठाने के लिए हमारी सेवा
शिक्षण
एक प्रश्न पूछें
रिपोर्ट के जरिए ज्योतिष की मदद से शिक्षा संबंधी समस्याओं के संदर्भ में मार्गदर्शन पाएं।

अध्ययन में मददकारक ज्योतिषीय योग – बुधादित्य योग

बुधादित्य योग सीखने में मदद करता है। जब लग्न पर बृहस्पति का प्रभाव होता है, तो व्यक्तिगत अध्ययन द्वारा ज्ञान प्राप्त करता है। इस स्थिति में, व्यक्ति के कानून या चिकित्सा क्षेत्र का अध्ययन करने की अधिक संभावना है। हालांकि, अगर इसमें के रूप में बाधा रास्ते में आती है, तो यह एकाग्रता में समस्याएं पैदा कर सकता है।

विद्याध्ययन में श्रेष्ठता हासिल करने हेतु वैदिक ज्योतिष और वास्तु के उपाय:

दीवार की ओर मुख करके न पढ़ें

जब कोई दीवार की ओर मुख करके बैठता है और अध्ययन करता है, तो वह सकारात्मक ऊर्जा के पथ को अवरुद्ध कर रहा है। दीवार की ओर पीठ करके और खिड़की की ओर मुख करके अध्ययन करना चाहिए।

सही दिशा में बैठें

पढ़ाई के लिए बैठते समय उत्तर या पूर्व या उत्तर पूर्व की ओर मुख करके बैठना चाहिए। अध्ययन कक्ष में कूड़ा-करकट वाली चीजों को नहीं रखना चाहिए। यह धूल से रहित होना चाहिए। स्वच्छता सकारात्मक ऊर्जा देती है। इसका मन पर सुखदायक प्रभाव पड़ता है

उचित व्यवस्था

अध्ययन कक्ष में चीजें बिखरी हुई नहीं रहें। इन्हें ढीक ढंग से व्यवस्थित किया जाना चाहिए। आप अपनी स्टडी टेबल पर क्रिस्टल पिरामिड भी रख सकते हैं।

मनी प्लांट का पौधा लगाएं

कमरे के दक्षिण पूर्व के कोने में मनी प्लांट का पौधा रखने से आपको अपनी पढ़ाई में काफी मदद करेगा। इसके अलावा, कमरे के उत्तर-पूर्व के कोने में एक मछलीघर रखने से भी सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होती है। घर की बीम के नीचे यदि व्यक्ति अध्ययन करता है तो समस्याओं का शिकार हो सकता है।

सरस्वती कवच पहनें

विषयों में समझने की शक्ति को बढ़ाने के लिए, आपको अपनी संतान को सरस्वती कवच या गणेश रूद्राक्ष पहनाना चाहिए, जो 4 या 5 मुखी होता है। देवी सरस्वती और भगवान गणेश की हर दिन उपासना करना भी सौभाग्य को आमंत्रित करती है।

हर बुधवार को अापके बच्चे को ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए। श्री सरस्वती चालीसा का पाठ भी फायदेमंद रहेगा।

सरस्वती मंत्र- ॐ ऎं सरस्वत्यै ऎं नमः ll का 108 बार दैनिक रूप से जप कर सकते हैं। एक क्रिस्टल माला के उपयोग से ‘ॐ ऎं नमः’ मंत्र का जाप करना भी श्रेयस्कर रहेगा। आप पढ़ाई की जगह पर सिद्ध किए हुआ सरस्वती यंत्र भी रख सकते हैं।

की भक्ति और रत्न धारण करें

हर गुरुवार को सुबह में आपको स्तुति करना चाहिए। दैनिक रूप से गायत्री महामंत्र का जाप करें। यह छात्रों के लिए सबसे अच्छा मंत्र है। आप किसी बुद्धिमान ज्योतिषी से परामर्श करके करने मोती, पीला पुखराज या बुध के रत्न आदि धारण कर सकते हैं।

अन्य लाभकारी मंत्र

परीक्षा के दौरान पढ़े जाने वाले सबसे असरकारक यंत्रों में से एक है: ‘ॐ सरस्वती मया दृष्ट्वा, वीणा पुस्तक धारणीम् । हंस वाहिनी समायुक्ता मां विद्या दान करोतु में ॐ ।।’। ग्रहों के दोषपूर्ण प्रभाव को दूर करने और एकाग्रता प्राप्त करने के लिए ‘गणपति अथर्वशीर्ष’ के साथ ‘संकट नाशन गणेश स्तोत्र‘ के मंत्र का विधिवत् उच्चारण करें।

गणेश जी की कृपा से,

उज्जवल रावल

गणेशास्पीक्स डॉट कॉम टीम

कुंडली में छिपे हैं आपके सवालों के सभी जवाब ! तो क्यों न किसी ज्योतिषी से बात करें और अपनी राह आसान बनाएं।

16 Apr 2018

View All blogs

Follow Us