होम » भविष्यवाणियों » त्योहार » सावन मास के सोलह सोमवार व्रत का महत्व और पूजा विधि

सावन मास के सोलह सोमवार व्रत का महत्व और पूजा विधि

सावन मास के सोलह सोमवार व्रत का महत्व और पूजा विधि

सावन को सबसे पवित्र महीना माना जाता है, क्योंकि श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की पूजा-आराधना का विशेष महत्व है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सावन का महीना जुलाई-अगस्त में आता है। इस साल 2025 में 11 जुलाई 2025, शुक्रवार से भगवान शिव के सबसे प्रिय मास श्रावण की शुरुआत हो रही है।

श्रावण मास के व्रत – सावन के सोमवार

सावन के इस पवित्र महीने में भक्तों के द्वारा दो प्रकार के व्रत रखे जाते हैं:
– सावन सोमवार व्रत : श्रावण मास में सोमवार को रखा जाने वाला व्रत सावन सोमवार व्रत कहलाता है। सोमवार का दिन भी भगवान शिव को समर्पित है।
– सोलह सोमवार व्रत : सावन को पवित्र महीना माना जाता है। इसलिए सोलह सोमवार का व्रत शुरू करने के लिए यह बहुत ही अच्छा समय माना जाता है।

सावन मास के सोलह सोमवार

प्रथम सोमवार से प्रारंभ करते हुए लगातार सोलह (16) सोमवारों को यह व्रत जारी रखते हैं। इस प्रक्रिया को सोलह सोमवार उपवास के नाम से जाना जाता है।

इसलिए सावन सोमवार का व्रत सर्वाधिक महत्व के रूप में जाना जाता है। भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है। इस महीने में सोमवार का व्रत और सावन स्नान करने की परंपरा है। श्रावण के महीने में बेल पत्र से भगवान भोलेनाथ की पूजा करना और उन्हें जल अर्पित करना बहुत फलदायी माना जाता है।
जब भक्त सोमवार को उपवास करते हैं, तो भगवान शिव उनकी सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं। सावन के महीने के दौरान, ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, देवघर, उज्जैन, नासिक सहित भारत के कई धार्मिक स्थलों पर जाते हैं।

सावन के महीने में बारिश के मौसम के साथ, पूरी पृथ्वी हरियाली से ढंक जाती है। महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात में श्रावण महीने के अंतिम दिन उत्सव को नारेली पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

श्रावण मास व्रत और पूजा विधि

– सुबह सूर्योदय से पहले नहाएं।
– पूजा स्थल पर वेदी रखें।
– शिवलिंग पर दूध चढ़ाने के लिए शिव मंदिर जाएं।
– फिर पूरी श्रद्धा के साथ महादेव के व्रत का संकल्प लें।
– सुबह और शाम भगवान शिव से प्रार्थना करें।
– पूजा के लिए तिल के तेल का दीपक जलाएं और भगवान शिव को पुष्प अर्पित करें।
– भगवान शिव को सुपारी, पंच अमृत, नारियल और बेल के पत्ते सहित अर्पित करें।
– व्रत के दौरान सावन व्रत की कथा अवश्य पढ़ें।
– पूजा समाप्त होते ही प्रसाद वितरित करें।
– शाम को पूजा पूरी होने के बाद व्रत खोलें और सात्विक भोजन करें।

अपने व्यक्तिगत समाधान प्राप्त करने के लिए यहां क्लिक करें और गणेशस्पीक्स पर पहली निःशुल्क ऑनलाइन ज्योतिषी चैट प्राप्त करें!

सावन मास के व्रत से होने वाले लाभ

सावन मास शिवजी को समर्पित है। इसलिए, कोई भक्त सच्चे मन और पूर्ण भक्ति के साथ महादेव का उपवास रखता है, वह निश्चित रूप से शिव का आशीर्वाद प्राप्त करता है।

विवाहित महिलाएँ अपने वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाने और अविवाहित महिलाएं अच्छे वर के लिए सावन में शिव का व्रत भी रखती हैं।

काँवड यात्रा

इस पवित्र महीने में शिव भक्त के द्वारा काँवड़ यात्रा करते हैं। देवभूमि उत्तराखंड में स्थित शिवनगरी हरिद्वार और गंगोत्री धाम में सैकड़ों शिव भक्त आते हैं। वे इन तीर्थ स्थानों से गंगा जल से भरी काँवड़ को अपने कंधों पर लाते हैं और बाद में वह गंगा जल भोलेनाथ को चढ़ाते है। इस यात्रा में भाग लेने वाले भक्तो को काँवरिया अथवा काँवड़िया कहा जाता है।

काँवड पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह कहा जाता है कि जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन से 14 रत्न निकले। उन चौदह रत्नों में से एक विष भी था, जिससे ब्रह्मांड नष्ट होने का भय था। तब ब्रह्मांड की रक्षा के लिए, भगवान भोलेनाथ ने उस विष को पी लिया और उसे अपने गले से नीचे नहीं उतरने दिया। विष के प्रभाव से भोलेनाथ का कंठ नीला पड़ गया और इसलिए उनका नाम नीलकंठ पड़ा।। ऐसा कहा जाता है कि रावण ने काँवर में गंगाजल लेकर आया और उसने उसी गंगा जल से शिवलिंग का अभिषेक किया और फिर भगवान शिव को इस विष से मुक्ति मिली।

सावन में मंत्र

सावन के दौरान ओम् नमः शिवाय का जाप करें।

सावन व्रत की कथा

प्राचीन समय में एक अमीर आदमी था, लेकिन दुर्भाग्य से, उस व्यक्ति की कोई संतान न थी। इस बात का दुःख उन्हें हमेशा सताता था, लेकिन दोनों पति-पत्नी शिव भक्त थे। दोनों ही भगवान शिव की आराधना में सोमवार को व्रत रखने लगे। दोनों की सच्ची भक्ति को देखकर, माता पार्वती ने शिव भगवान से दोनों नि:संतान दंपति की सूनी गोद को भरने का आग्रह किया।

भोलेनाथ ने इसे स्वीकार कर लिया और भोलेनाथ के आशीर्वाद से उनके घर में पुत्र का जन्म हुआ, लेकिन यह बालक अल्पायु होने की एक आकाशवाणी हुई। यह बच्चा 12 साल की उम्र में मर जाएगा। इस आकाशवाणी के साथ उस व्यक्ति ने अल्पायु बालक का नाम अमर रखा। उस धनी व्यक्ति ने अपने पुत्र अमर को शिक्षा के लिए काशी भेजना चाहा इसलिए, उन्होंने अपने बेटे अमर के साथ अपने साले को काशी भेजने का निश्चय किया। काशी की ओर जाने वाले रास्ते में जहाँ भी वे विश्राम करते, ब्राह्मणों को दान और दक्षिणा देते थे। रास्ते में वे एक शहर में पहुँचे। जहां एक राजकुमारी की शादी हो रही थी। उस राजकुमारी का दूल्हा एक आँख से काना था, यह बात दूल्हे के परिवार वालों ने राजा के परिवार से छिपाकर रखी थी। उन्हें डर था कि अगर यह बात राजा को पता चल गई तो यह शादी नहीं होगी। इससे बचने के लिए दूल्हे के घर वालों ने अमर से झूठमूठ का दूल्हा बनने का आग्रह किया और वह उनके आग्रह को मना न कर सका। इस तरह, अमर ने उस राजकुमारी से शादी की थी,लेकिन अमर उस राजकुमारी को धोखे में नहीं रखना चाहता था। इसलिए उसने राजकुमारी की चुनरी में सारी बाते पूरी सच्चाई से लिख दी। जब राजकुमारी ने अमर का संदेश पढ़ा, तो उसने अमर को अपना पति माना और काशी से लौटने तक प्रतीक्षा की। अमर और उसके मामा वहाँ से काशी की ओर चल दिए। दूसरी ओर, अमर हमेशा धार्मिक कार्यों में लगा रहता था। जब अमर ठीक 12 साल का हुआ, तब वह शिव मंदिर में भोले नाथ को बेल के पत्ते चढ़ा रहा था।

उसी समय वहाँ यमराज उसके प्राण लेने पधार गए, लेकिन इससे पहले, भगवान शिव ने अमर की भक्ति से प्रसन्न होकर दीर्घायु होने का वरदान दिया था। परिणामस्वरूप, यमराज को खाली हाथ लौटना पड़ा। बाद में अमर काशी से शिक्षा प्राप्त करके अपनी पत्नी (राजकुमारी) के साथ घर लौटा।

ये 5 वस्तु घर लाने से खुश होंगें भोलेनाथ और बढ़ेगा सुख,सौभाग्य और समृद्धि

1- रुद्राक्ष – सावन के पहले दिन सुख, सौभाग्य और समृद्धि बढ़ाने के लिए असली रुद्राक्ष चांदी में गढ़वाकर पहनें तो अत्यंत शुभ होगा और सौभाग्य बढ़ाने वाला होगा।
2- जल पात्र – सावन के पहले दिन, अगर आप चांदी, तांबा या पीतल का जलपात्र खरीदकर लाएं तो अत्यंत शुभ होगा। इस पात्र में जलभर कर रखें और भगवान शिव को अर्पित करें तो इससे भगवान प्रसन्न होंगे।
3- चांदी का चंद्र या मोती- भगवान शिव अपने पैरों में चांदी का कड़ा धारण करते हैं। ऐसे में सावन के पहले दिन चांदी का कड़ा खरीदता है तो उसके लिए तीर्थयात्रा या विदेश यात्रा के शुभयोग बनते हैं।
4- चांदी का विल्बपत्र- सावन में हर कोई शिवलिंग पर विल्बपत्र अर्पित करते हैं लेकिन कई बार शुद्ध और अंखडित विल्बपत्र मिलना मुश्किल हो जाता है ऐसे में आप चांदी का विल्बपत्र के साथ भगवान शिव को जल चढ़ा सकते हैं। ऐसा करने से लाखों पाप नष्ट हो जाते हैं और हर कार्य के लिए शुभ संयोग बनते हैं।
5- चांदी का चांद- भगवान शिव के सिर पर चंद्रमा सुशोभित है। इस तरह, आप सावन के पहले दिन चांदी का चांद ला सकते हैं। इससे चंद्रमा शांत होता है और मन मजबूत होता है।

गणेशास्पीक्स पर पहली कॉल या पहली चैट बिल्कुल मुफ़्त पाएं! अभी परामर्श लें!

गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
आचार्य कृष्णमूर्ति के इनपुट के साथ
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

ये भी पढ़ें-
नक्षत्र ध्यान करके अपने मन को मजबूत बनाएं, जानिए विधि
राहु की महादशा और उपाय

★ WRITTEN & ASTROLOGICALLY VERIFIED BY

Acharya Aditya

Ganesha Verified
Vedic Astrologer & Prediction Expert

4.9 rating

30 Years

52k+ consultations

Acharya Aditya is a renowned Vedic astrologer with over 30 years of consultation experience. He specializes in providing accurate date-wise predictions and offers in-depth guidance on career, marriage, relationships, and foreign settlement. In addition to personal consultations, he has strong expertise in planetary transits and current affairs, delivering practical, insightful predictions grounded in detailed horoscope analysis and Vedic astrological principles. His precise predictions and practical approach have earned the trust of clients seeking clarity and guidance in important life decisions.

  • Career Guidance
  • Relationships
  • Foreign Settlement
  • Vedic Astrology
More About Acharya Aditya
Exit mobile version