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चातुर्मास, समय है प्रकृति से जुड़कर ईश्वर भक्ति में लीन हो जाने का

चातुर्मास, समय है प्रकृति से जुड़कर ईश्वर भक्ति में लीन हो जाने का

क्या है चौमासा या चातुर्मास

हिन्दू और जैन धर्म में चातुर्मास का बड़ा ही सुंदर ढंग से बखान किया गया है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरु होकर चातुर्मास कार्तिक शुक्ल की शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन पूर्ण होता है। पुराणों के अनुसार इस वक्त भगवान विष्णु क्षीर सागर की अनन्त शैय्या पर योगनिद्रा के लिए चल जाते हैं। इसलिए चातुर्मास के प्रारंभ की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। इस चौमासे के अंत में जो एकादशी आती है उसे देव उठनी एकादशी कहते हैं क्योंकि यह समय भगवान के उठने का समय होता है। चूंकि इन चार महीनों में श्री विष्णु शयन करते हैं इसलिए इन महीनों में कोई भी धार्मिक व मांगलिक कार्य नहीं किया जाता।

चातुर्मास व्रत का समय

चातुर्मास में कर्मयोगी अपने कौशल का विकास, धार्मिक लोग व्रत व पूजापाठ और योगीजन साधना करके अपने जीवन को उन्नति व कल्याण के मार्ग पर लगाते हैं। साल 2017 में चातुर्मास 4 जुलाई 2017 से प्रारंभ होकर 31 अक्टूबर 2017 को समाप्त हो जाएगा।

प्रकृति के सुरम्य वातावरण में मन को ईश्वर भक्ति में लगाएं

अगर प्रकृति के साथ चातुर्मास को जोड़ा जाए तो यह मौसम बरसात का होने की वजह से प्रकृति अपने एक अलग ही विलक्षण रुप में अठखेलती, इठलाती और लहराती-सी मालूम देती है। इन चार महीनों के दौरान मनोरम माहौल और प्रफुल्लित चित्त के साथ प्रकृति के शांत वातावरण में ईश्वर की आराधना पर खासतौर से बल दिया गया है। व्यक्ति के किसी मांगलिक कार्यक्रमों में लिप्त नहीं होने से वह बाहरी जवाबदारियों से मुक्त होकर ईश्वर की भक्ति में ध्यान लगा सकता है। चातुर्मास के चार महीनों यानी सावन, भादौ, आश्विन और कार्तिक माह में खाने-पाने और व्रत व उपवास की सलाह दी गई है। चातुर्मास में व्यक्ति की पाचनशक्ति कमजोर पड़ जाती है, इसलिए इस संपूर्ण महीने में व्यक्ति को व्रत व उपवास करने की सलाह दी गई है। खासकर कि इस समय के दौरान पड़ने वाली तमाम एकादशियों में निर्जला उपवास किया जाता है। यदि सभी एकदशियों में निर्जल उपवास नहीं हो पाए तो कम से कम तीन एकादशी (देवशयनी, जलजिलनी और देव उठनी एकादशी) के दिन निर्जल उपवास जरुर करना चाहिए एेसा संतजनों का कहना है। आपने सही करियर का चुनाव किया है कि नहीं और पेशे संभावनाओं को जानने के लिए हमारी सेवा करियर संभावनाएं रिपोर्ट आपको सही राह दिखा सकती है। आज ही इसका लाभ उठाएं। चातुर्मास का महत्वसामान्य रुप से भी योगीजन धर्म के प्रचार और प्रकार के विषय में विचारमग्न रहते हैं। परंतु यही समय तरह-तरह के कीड़े-मकोड़े, बैक्टीरिया और जीव-जंतु इत्यादि के भी पनपने का होने से इस समय खाने-पीने में सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा, जमीन के अंदर रह रहे जीव-जंतु धरती के ऊपर आ जाते हैं। एेसी स्थिति में साधु-संतों के पैरों से जाने-अनजाने किसी जंतु की मृत्यु नहीं हो जाए, इसलिए वे कहीं गमन नहीं करते हैं। साधु-संतों के लिए यह समय संसारी लोगों को सत्संग, प्रवचन और धर्म-कर्म का महत्व समझाने का होता है। प्राचीन समय में जब मानव का खेती पर आधारित जीवन था तब इन चारों महीनों में सभी मांगलिक कार्यों को वर्जित रखने के भी कारण थे। बीज की बोवाई को छोड़कर इस समय दौरान ये धर्म और पूजा पाठ में अधिक ध्यान देते हुए आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग में आगे बढ़ सकते हैं। यदि आप अपने व्यापार में वृद्धि करना चाहते हैं तो हमारी सेवा 2017 बिजनेस रिपोर्टहासिल करकें अपना भविष्य जानकर पक्की सफलता प्राप्त करें।

आयुर्वेद की दृष्टि से चातुर्मास

आयुर्वेद की दृष्टि से भी उपवास के लिए यह समय उत्तम माना गया है। वजह यह है कि श्रावण के महीने में हरी सब्जियों में सूक्ष्म जंतुओं के होने की संभावनाए बहुत होने से अंकुरित चीजों को खाने की सलाह दी जाती है। भादों की बरसात के बाद जलवायु परिवर्तन की वजह से एकाएक गर्मी बढ़ जाती है। एेसे में यदि इंसान दही का सेवन करता है तो पित्त या अम्ल की समस्या का शिकार हो सकता है। इससे बचने के लिए दही को खाने के लिए वर्जित कहा गया है। इसके अलावा, इन आषाढ़ माह में दूध पीने से पानी से पैदा होने वाले रोग और कार्तिक माह में दाल को सेवन करने से अपच की समस्या हो सकती है, इसलिए इस दौरान इन आहार का सेवन करने की मनाही की गई है। चातुर्मास के दौरान श्रावण महीने में विविध त्यौहारों में उपवास के अलावा भादो में पितृ तर्पण और आषाढ़ में नवरात्रि की पूर्जा-अर्चना-अनुष्ठान और उपवास द्वारा धार्मिक और आध्यात्मिक संतुलन बनाने के साथ-साथ शारीरिक आरोग्यता की दिशा में भी हमारे शास्त्रों में विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है।

गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
धर्मेश जोशी
गणेशास्पीक्स डाॅटकाॅम टीम

अपनी परेशानियों के त्वरित समाधान हेतु हमारे ज्योतिषी से बात कीजिए।

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Acharya Aditya

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