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जानिए! कर्क राशि में गुरू पारगमन का महत्व

जानिए! कर्क राशि में गुरू पारगमन का महत्व

अंतरिक्ष विज्ञान के हिसाब से गुरू सौर मंडल में सबसे बड़ा ग्रह है, एवं उसकी सूर्य से अनुमानित दूरी 500 मिलियन मील है। उसका अनुमानित व्यास 88,000मील है, जो पृथ्वी की तुलना में लगभग दस गुण अधिक है। यह ग्रह अपनी धूरी पर बहुत तेजी के साथ घूमता है। जानकारी के अनुसार 9 घंटे 50 मिनट में एक राउंड पूरा कर लेता है। पृथ्वी का एक एवं मंगल के दो उपग्रह हैं, वैसे ही गुरू के 11 उपग्रह हैं।

ज्योतिष क्षेत्र में भी गुरू का विशेष महत्व है, क्यूंकि इसको देवों के गुरू के रूप में स्वीकार किया जाता है। गुरू जिस राशि या भाव में होता है, उसके अनुसार शुभ फल मिलते हैं एवं गुरू की उपस्थिति से अशुभ फल मिलने के आसारकम होते हैं। इस साल गुरू महाराज 19/06/2014 की सुबह 08.47.40 बजे अपनी उच्च राशि यानि कि कर्क राशि में प्रवेश करेगा। कर्क राशि में भ्रमण कर रहे गुरू के संदर्भ में जानकारी देते हुए गणेशजी बताना चाहते हैं कि इस भ्रमण के कारण अन्य राशियों पर किस तरह का प्रभाव देखने को मिलेगा।

पौराणिक कथा
शास्त्रों के अनुसार गुरू ग्रह देवताओं के गुरू माने जाते हैं। गुरू के पिता महर्षि अंगीरा हैं। सनतकुमार ने महर्षि अंगीरा की पत्नि को पुत्र प्राप्ति के लिए व्रत रखने को कहा था एवं उसकी पूरी विधि भी बताई थी। महर्षि अंगीरा की पत्नि ने पूरे भक्तिभाव व आस्था के साथ व्रत संपन्न किया, जिसे देखकर ईश्वर प्रसन्न हुए और उनके घर पुत्र का जन्म हुआ।ज्ञान के देवता के रूप में प्रसिद्घ इस पुत्र का नाम गुरू रखा गया।

ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार गुरू आगे वर्णित की चीजों पर अपना विशेष प्रभाव छोड़ सकता है । ब्राह्मण, शिक्षक, कुबेर भंडार, विशाल एवं मोटी काया, ख्याति, अंतरिक्ष विज्ञान एवं ज्योतिषशास्त्र, संतति, कीमती रत्न, धर्म, पीले रंग, तीर्थधाम, बुद्घिमत्ता, पुखराज, ट्रस्ट, न्यायधीश आदि गुरू के प्रभाव अंतर्गत आते हैं।

ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से अधिक जानकारी
गुरू ग्रह धनु एवं मीन राशि का स्वामि है। गुरू कर्क राशि में पांच अंश उच्च का एवं मकर राशि में पांच अंश नीच का होता है। उसकी मूल त्रिकोण राशि धनु है। गुरू ज्ञान एवं खुशी प्रदान करता है। ग्रहमंडल में गुरू मंत्री की भूमिका निभाता है। गुरू का रंग पीला है। उनके मुख्य देव इंद्र हैं एवं पुरुष ग्रह है। उसका तत्व आकाश है। ब्राह्मण जाति का यह ग्रह सात्विक गुण संपन्न है।

गुरू का शरीर मोटा एवं आंखें पीले रंग की होती हैं जबकि उनके बाल बहुत शुष्क होते हैं। गुरू बुद्घिशाली एवं तमाम शास्त्रों के ज्ञाता माने जाते हैं। शारीरिक दृष्टि से देखें तो शारीरिक चर्बी पर उसका असर है। तिजौरी एवं खजाने में गुरू का वास है। गुरू एक महीने की समयअवधि का प्रतिनिधित्व करता है। मीठे रस पर उसका असर है एवं पूर्व दिशा में गुरू बहुत बल होता है। ज्योतिष शास्त्रों में गुरू के मुकाबले दूसरा कोई ग्रह अधिक लाभकारी नहीं माना गया।गुरू की केवल लग्न के केंद्र में उपस्थिति हो तो कुंडली में बहुत अशुभ असर देखने को मिलता है।

कर्क राशि अर्थात गुरू की उच्च राशि
राशि चक्र में चौथी राशि कर्क को स्वयं का जन्म स्थल घर बहुत प्रिय होता है। काल पुरुष की कुंडली का चौथा भाव माता का वाचक है एवं कर्क जातक ऐसी ही भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, कर्क राशि का अधि पति चंद्र है, जो मन एवं माता का कारक है। इसलिए यह दोनों बातों के संदर्भ में उनकी माता तरीके की भूमिका को अधिक बल प्रदान करता है। राशि चक्र की तमाम राशियों में सबसे मधुर हृदय एवं सहानुभूति वाली कर्क राशि के जातक अत्यंत संवेदनशील एवं लगाव वाले होते हैं। जातकों को स्वयं के घर में परिवार के साथ रहना बहुत अच्छा लगता है।

जानिए कैसा होगा आपकी राशि के लिए यह गुरु का राशि परिवर्तन इस लेख द्वारा….
यहाँ पढ़े – कर्क में प्रवेश करेंगे गुरु – चन्द्र राशि आधारित फलकथन

मित्रों, गुरु के राशि परिवर्तन के आधार पर आपको फलकथन चंद्र राशि के आधार पर सामान्य दृष्टि से दिया गया है। हर एक व्यक्ति के जन्म के ग्रहों के आधार पर गुरु के राशि भ्रमण का फल अलग तरह का हो सकता है। गुरु का राशि परिवर्तन आपको जरूर प्रभावित करेगा; व्यक्तिगत मार्गदर्शन के लिए हमारे विशेषज्ञ ज्योतिषी से सीधी बात करें या गुरु/ बृहस्पति पारगमन रिपोर्ट प्राप्त करें।

अगर इस गुरू पारगमन के दौरान आप अपनी कुंडली को अति बलवान बनाना चाहते हैं, ताकि आपको इस पारगमन का अत्यंत लाभ मिल सके तो आप अपने घर या अन्य स्थल पर बहुत ही शक्तिशाली गोल्ड प्लेटेड गुरू यंत्र की स्थापना करें।

इसके अलावा शुभ ग्रह गुरू की अपार कृपा प्राप्त करने के लिए आप ज्योतिषीय रत्न धारण विधि का अनुकरण करते हुए प्रामाणिक व प्रामाणित पुखराज रत्न पहन सकते हैं।

गणेशजी के आशीर्वाद के साथ,
श्री धर्मेश जोशी
गणेशास्पीक्स दल

★ WRITTEN & ASTROLOGICALLY VERIFIED BY

Acharya Dharmadhikari

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A Chemist and Jyotish Parasharam from London, he is a global grandmaster. Author of 19 stock market books, with a massive legacy of analyzing 275,000+ horoscopes and 2,500+ media shows, he is the ultimate, most trusted solver for Vastu, Tarot, Numerology, Pranic Healing, Tantra-Mantra, and Yantra-Gem-Rudraksha therapies.

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