जानिए रुद्राभिषेक पूजा (Rudrabhishek Puja) की विधि और इसके विशेष लाभ

Rudrabhishek Puja

देवाधिदेव महादेव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी तरीका रुद्राभिषेक पूजा (Rudrabhishek puja) है। इस पूजा को वैदिक पद्धति से कराने पर भोले शंकर अपने भक्तों के सारे कष्टों को हर लेते हैं। वेदों में भी रुद्राभिषेक की महिमा का वर्णन किया गया है। यजुर्वेद में उल्लेखित किया गया है कि घर पर भगवान रुद्र यानी शिव का अभिषेक करना अत्यंत लाभकारी होता है। “सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका:” अर्थात सभी देवताओं की आत्मा में रुद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रुद्र से संबंधित है। भगवान शिव का रुद्राभिषेक ( Lord shiva Rudrabhishek) करने से ग्रह-नक्षत्रों के बुरे प्रभाव खत्म हो जाते हैं, सारी बाधाएं दूर हो जाती है। यदि रुद्राभिषेक पूजा का आयोजन महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर करते हैं, तो यह बहुत ही लाभकारी मानी जाती हैं। हालांकि, इसके अलावा भी किसी भी दिन रुद्राभिषेक पूजा करवाने से इसका उतना ही लाभ मिलता है। आइए जानते हैं रुद्राभिषेक पूजा के बारे में…

रुद्राभिषेक पूजा के लाभ (Rudrabhishek puja benefits)

सर्वशक्तिमान देव महादेव का रुद्रभिषेक के लाभ (Rudrabhishek puja benefits) कई हैं। हर की यह पूजा सभी दु:ख हर लेती है। हालांकि, शिव-पुराण के अनुसार अलग-अलग परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए रुद्राभिषेक पूजा में अलग-अलग द्रव्य का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उल्लेख शिवपुराण के एक श्लोक में किया गया है। आइए जानते हैं किस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए किस द्रव्य से रुद्राभिषेक पूजा को समापन करें…

  • शुद्ध और सामान्य जल से रुद्राभिषेक करने से वृष्टि होती है। साथ ही अन्य दु: खों से भी छुटकारा मिलता है।
  • कुशा जल से शिव का रुद्राभिषेक करने पर बीमारी, रोग और अन्य दु:खों से छुटकारा मिलता है।
  • दही से शिव का रुद्राभिषेक करने से पशु, भवन और वाहन की प्राप्ति होती है। 
  • भगवान शिव का रुद्राभिषेक गन्ने के रस से करने पर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
  • शहद युक्त जल से रुद्राभिषेक करने से आपके धन में वृद्धि होती है।
  • तीर्थ जल से शिव का रुद्राभिषेक मोक्ष प्राप्ति के द्वार खोलता है।
  • अगर आप शुद्ध जल में इत्र मिलकार शिव का अभिषेक करते हैं, तो इससे कीर्ति मिलती है।
  • दूघ से अभिषेक करने से शांति  की प्राप्ति होती है। साथ ही रोग से शांति और अन्य मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
  • गंगाजल से रुद्राभिषेक करने पर अभिष्ट पुण्य प्राप्त होते हैं।
  • शर्करा यानी शकर मिश्रित दूध से शिव का अभिषेक करने पर आपको सदबुद्धि मिलती है साथ ही आर्थिक उन्नति का मार्ग भी खुलता है।
  • शुद्ध घी से रुद्राभिषेक करने से आपके वंश का विस्तार होता है।
  • शुद्ध शहद से रुद्राभिषेक करने से आपको सभी पापों से मुक्ति मिलती है। आर्थिक उन्नति भी मिलती है।

भगवान शिव के रूद्र रूप की पूजा और अभिषेक करने से जाने अनजाने में किए गए सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है। इसके बाद देवाधिदेव महादेव के शुभाशीर्वाद से समृद्धि, धन-धान्य, विद्या और संतान की प्राप्ति के साथ-साथ सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाते हैं।

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कब-कब कर सकते हैं रुद्राभिषेक (Rudrabhishek puja kab kare)

वैसे तो रुद्राभिषेक की पूजा (Rudrabhishek puja time) के लिए किसी विशेष दिन की आवश्यकता नहीं होती है, इस पूजा को किसी भी दिन संपन्न किया जा सकता हैै।  कुछ ऐसे भी दिन है, जिस दिन पूजा करने से इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। शिवपुराण के रुद्रसंहिंता में इसके बारे में उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार महाशिवरात्रि, सावन सोमवार और शिवरात्रि, पूर्णिमा, अमावस्या और किसी भी सोमवार को यदि रुद्राभिषेक किया जाए, तो यह अत्यंत लाभकारी होता है। इसके अलावा हर महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया, पंचमी, षष्ठी, नवमी, द्वादशी, त्रयोदशी और कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा, चतुर्थी, पंचमी, अष्टमी, एकादशी और अमावस्या को कर सकते हैं। यह तिथियां भी बहुत मंगलकारी होती है। अपने जन्मदिन या शादी की सालगिरह पर आने वाली जिंदगी की सभी परेशानियों को दूर करने के लिए रुद्राभिषेक पूरी वैदोक्त पद्धति से जरूर करवाना चाहिए।

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रुद्राभिषेक में किन किन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है? (Rudrabhishek Puja samagri)

शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक  सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसलिए आपको पूजा या रुद्राभिषेक संपूर्ण विधि विधान से करना चाहिए। फिर किसी वैदिक आचार्य से पूजा का आयोजन करना चाहिए। कुछ ऐसी चीजें हैं, जिनका रुद्राभिषेक के दौरान होना अनिवार्य है। इससे पहले की रुद्राभिषेक पूजा की शुरुआत हो, आप सुनिश्चित कर लें कि रुद्राभिषेक में इस्तेमाल की जाने वाली सारी जरूरी चीजें (Rudrabhishek Puja samagri) पूजास्थल पर हैं। रुद्राभिषेक के लिए जरूरी चीजों में गाय का घी, पान का पत्ता, चंदन, फूल, धूप, गंध, कपूर, बेलपत्र, मिठाई, फल, शहद, फल, दही, ताजा दूध, गुलाबजल, मेवा, पंचामृत, नारियल पानी, गन्ने का रस, चंदन जल, गंगाजल, शुद्द जल, सुपारी और नारियल शामिल है। इसलिए रुद्राभिषेक से पहले इन चीजों की अनिवार्यता सुनिश्चित कर लें। रुद्राभिषेक में सबसे महत्वपूर्ण होता है श्रृंगी (गाय के मुंह की आकृति का अभिषेक का पात्र)। श्रृंगी पीतल या फिर अन्य धातु के बने हो सकते हैं। यह आपको बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी। रुद्राभिषेक पूजा के दौरान इन चीजों का आप विशेषकर ध्यान रखें।

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Ganeshaspeaks से क्यों करवाएं रुद्राभिषेक पूजा

रुद्राभिषेक पूजा कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है, इसे पूरा करवाने के लिए वैदिक रीति-रिवाजों का ज्ञाता होना आवश्यक है। इस पूजा को किसी वैदिक पंडित से ही संपन्न कराना चाहिए। Ganeshaspeaks पर आपकी सहायता के लिए कई सारे वैदिक आचार्य है, जो आपकी इस पूजा में मदद करते हैं। आपकी पूजा को पूरे वैदिक रिवाजों से संपन्न होने की गणेशास्पीक्स गारंटी देता है। इससे आपको भगवान शिव का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होगा। गणेशास्पीक्स के आचार्य वैदिक पद्धिति और शास्त्रार्थ में निपुण है। उनके द्वारा कराई गई पूजा कभी भी व्यर्थ नहीं जाती है। इससे आपको आपकी रुद्राभिषेक पूजा का पूरा लाभ (rudrabhishek puja advantages) मिलता है।

रुद्राभिषेक के दौरान किन भगवान का आह्वान

रुद्राभिषेक पूजा विधि (Rudrabhishek puja vidhi) एक महत्वपूर्ण पूजा है। इस पूजा के दौरान आपको कई देवी देवताओं का आह्वान कर आमंत्रित करना पड़ता है। सबसे पहले भगवान श्रीगणेश का आह्वान कर उन्हें आमंत्रित करते हैं, इसके बाद माता पार्वती, नौ ग्रह, पृथ्वी माता, ब्रह्मदेव, माता लक्ष्मी, अग्निदेव, सूर्यदेव और गंगा मैया की विशेष पूजा होती है। साथ ही इनके विराजमान होने के लिए आसन भी लगाएं। आमंत्रित किए गए सभी देवताओं की रोली-अक्षत और फूल चढ़ाकर उनकी स्तुति की जाती है, फिर रुद्राभिषेक किया जाता है।

रुद्राभिषेक (Rudrabhishek puja) दूर होती है नवग्रह से संबंधित बाधाएं 

महादेव की रूद्राभिषेक पूजा का महत्व (Rudrabhishek puja importance) नवग्रह पूजा में भी है। इससे आपके जीवन में किसी भी ग्रह का नकारात्मक दोष है, जिसके प्रभाव से आपको परेशानी हो रही है। इस पूजा से वह सारे दोष दूर हो जाएंगे। इसके लिए आपको रुद्राभिषेक पूजा के दौरान ग्रहदोष के हिसाब से कुछ चीजें भगवान शिव को अर्पित करनी पड़ेगी।

  • सूर्य- अगर आपके जीवन में सूर्य ग्रह से संबंधित कोई बाधाएं आ रही है, तो चंद्र के लिए सामान्य जल और सूर्य के लिए चंदन डालकर भगवान शिव का अभिषेक करें।
  • चंद्रमा- चंद्रमा का कोई नकारात्क दोष आपको परेशानी में डाल रहा है, तो शिवलिंग पर गाय का दूध अर्पित करें। इसके साथ सोमवार का व्रत करें।
  • मंगल- मंगल ग्रह से संबंधित किसी भी दोष के निवारण के लिए रुद्राभिषेक पूजा के दौरान किसी भी फल के रस से भगवान का अभिषेक किया जा सकता है।
  • बुध- इस ग्रह से संबंधित किसी भी दोष से मुक्ति पाने के लिए गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए।
  • बृहस्पति- ब्रहस्पति अथवा गुरु ग्रह की शांति के लिए पूजा के दौरान हल्दी मिश्रित दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें। साथ ही हर गुरुवार को हल्दी मिश्रित दूध से शिव का अभिषेक करना चाहिए।
  • शुक्र- शुक्र ग्रह के विपरित प्रभावों को अनुकूल बनाने के लिए पंचामृत या घी से रुद्राभिषेक के दौरान शिव का अभिषेक करें।
  • शनि- शनि को बहुत अनिष्टकारी ग्रह माना गया है। अगर आप शनि से पीड़ित हैं, तो जल में काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए।
  • राहु और केतु- इन दोनों ग्रहों की शांति और इनसे जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं। 

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महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक करने की विधि (Rudrabhishek puja vidhi)

महादेव का सबसे मुख्य त्योहार महाशिवरात्रि होता है। इस मौके पर अगर रुद्राभिषेक किया जाता है, तो इसका सबसे अधिक फल मिलता है। इसके लिए पुराणों में नियमावली वर्णित है, उसी के आधार पर आप पूजा करें।

  • महाशिवरात्रि के दिन अगर आप रुद्राभिषेक पूजा करते हैं, तो पूजा के दौरान शिवलिंग उत्तरदिशा में रखें और उपासक या भक्त का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। सबसे पहले श्रृंगी से शिवलिंग पर गंगाजल डालें और इसके बाद अभिषेक की शुरुआत करें। 
  • रुद्राभिषेक के दौरान सबसे महत्वपूर्ण है, महामृत्युंजय मंत्र, शिव तांडव स्त्रोत्र, ओम नम: शिवाय या फिर रुद्रामंत्र का जाप, तो पूजा के दौरान इसका अवश्य ख्याल रखें।
  • पूजा करते समय शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं और इसके बाद पान का पत्ता, बेलपत्र, सुपारी आदि चीजें शिवजी को अर्पित करना चाहिए।
  • इसके बाद भगवान शिव के लिए बनाए गए व्यंजनों को शिवलिंग पर अर्पित करें। साथ ही भगवान शिव के मंत्र का 108 बार जाप करें। इस विधि के समाप्त होने के बाद पूरे परिवार साथ शिवलिंग की आतरी उतारें।
  • अंत में अभिषेक किए गए जल या अन्य पदार्थ का पूरे घर में छिड़काव करें, और सभी को पीने के लिए दें। ऐसा माना जाता है कि इस जल को पीने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। 
  • आपको एक बात और ध्यान रखना चाहिए, कि जब तक रूद्राभिषेक जारी रहता है, आपको भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना भी जारी रखना है।

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