आज का पंचांग – Bengaluru
08 August 2026 Saturday के लिए Bengaluru, India का आज का पंचांग। इसमें तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, अभिजीत मुहूर्त तथा अन्य शुभ एवं अशुभ समय की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें।
Bengaluru, Karnataka, India 08 August, 2026
कृष्णपक्ष दशमी
Sat, 08 Aug 2026 (Default Time: 5:30 AM)
August2083 रौद्र Samvantsara
06:05 AM
06:45 PM
पंचांग |
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|---|---|---|
| तिथि | : | कृष्ण पक्ष दशमी up to 01:58 PM |
| नक्षत्र | : | रोहिणी up to 04:49 PM |
| योग | : | astrohindi.Dhruva up to 09:01 AM |
| प्रथम करण | : | वाणिज up to 06:29 AM |
| द्वितीय करण | : | विष्टि (भद्रा) up to 01:58 PM |
| वार | : | शनिवार |
अशुभ समय |
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|---|---|---|
| गुलिक काल | : | 12:00 AM |
| यमगण्ड | : | 12:00 AM |
| दुर मुहूर्त | : | 07:41 AM |
| राहु काल | : | 12:00 AM |
अतिरिक्त जानकारी |
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|---|---|---|
| सूर्योदय | : | 06:05 AM |
| सूर्यास्त | : | 06:45 PM |
| शक संवत | : | 1947 क्रोधी |
| सूर्य राशि | : | सिंह |
| चंद्र राशि | : | वृषभ |
| पक्ष | : | कृष्णपक्ष |
शुभ समय |
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|---|---|---|
| अभिजीत | : | 12:00 AM |
लग्न कुंडली
Lagna Chart At Sunrise
Ke
5Ma
3Ve
6Asc, Su , Me , Ju
4Mo , Ha
2Pl
10Sa , Ne
12Ra
11Moon Chart At Sunrise
Ma
3Su , Me , Ju
4Mo , Ha
2Sa , Ne
12Ke
5Ra
11Ve
6Pl
10| ग्रहों | संकेत | डिग्री | नक्षत्र | चरण |
|---|---|---|---|---|
| प्रबल |
|
11° 58′ 29″ | पुष्य | 3 |
| सूर्य |
|
21° 15′ 40″ | अश्लेषा | 2 |
| चंद्र |
|
16° 27′ 40″ | रोहिणी | 2 |
| मंगल |
|
3° 32′ 40″ | मृगशिरा | 4 |
| बुध |
|
3° 13′ 40″ | पुनर्वसु | 4 |
| गुरु |
|
14° 17′ 40″ | पुष्य | 4 |
| शुक्र |
|
6° 58′ 40″ | उत्तराफाल्गुनी | 4 |
| शनि |
|
20° 23′ 40″ | रेवती | 2 |
| राहु |
|
6° 17′ 40″ | धनिष्ठा | 4 |
| केतु |
|
6° 17′ 40″ | माघ | 2 |
| हर्षल |
|
10° 59′ 40″ | रोहिणी | 1 |
| नेप्चून |
|
9° 56′ 40″ | उत्तरभाद्रपद | 2 |
| प्लूटो |
|
9° 47′ 40″ | उत्तरषाढा | 4 |
आज के पंचांग के पाँच अंग
पंचांग – तिथि – नक्षत्र – योग – करण – वार
All timings calculated from local sunrise – Drik (Sayana) Panchang
कृष्णपक्ष दशमी
कृष्णपक्ष
रोहिणी
चंद्र
astrohindi.Dhruva up to 09:01 AM
ध्रुव
वाणिज up to 06:29 AM
वणिज
शनिवार
शुक्र
संवत्सर
2083 रौद्र
विक्रम संवत
2083 रौद्र
शक संवत
1947 क्रोधी
पक्ष
कृष्णपक्ष Paksha
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन
आज का होरा (ग्रहों के होरा काल)
शुक्र
6:05 AMबुध
7:08 AMचंद्र
8:11 AMशनि
9:15 AMगुरु
10:18 AMमंगल
11:22 AMसूर्य
12:25 PMशुक्र
1:28 PMबुध
2:32 PMचंद्र
3:35 PMशनि
4:38 PMगुरु
5:42 PMमंगल
6:45 PMसूर्य
7:42 PMशुक्र
8:38 PMबुध
9:35 PMचंद्र
10:32 PMशनि
11:28 PMगुरु
12:25 AMमंगल
1:22 AMसूर्य
2:18 AMशुक्र
3:15 AMबुध
4:12 AMचंद्र
5:08 AMपंचांग क्या है?
भारतीय परंपरा में समय को केवल बीतते हुए पलों की तरह नहीं देखा गया, बल्कि एक ऐसी शक्ति माना गया है जिसका अपना एक अलग स्वभाव होता है।
पंचांग इसी स्वभाव को समझने का एक तरीका है। यह केवल तारीख बताने वाला कैलेंडर नहीं है, बल्कि एक ऐसा दैनिक संदर्भ है जो यह संकेत देता है कि कौन-सा समय किस काम के लिए अधिक अनुकूल हो सकता है।
यही कारण है कि लोग महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से पहले, पूजा-पाठ के समय या बड़े निर्णय लेते हुए पंचांग देखते हैं। यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि समय और जीवन की लय को समझने का एक संतुलित दृष्टिकोण है।
तिथि (Tithi)
तिथि चंद्र दिवस को दर्शाती है। तिथि सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोणीय अंतर में हर 12 डिग्री के अंतर के आधार पर निर्धारित होती है हर तिथि की अपनी एक अलग प्रकृति होती है। कुछ तिथियाँ नए कार्यों की शुरुआत के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं, जबकि कुछ समय विश्राम या शांत चिंतन के लिए अधिक उचित होते हैं।
धार्मिक अनुष्ठानों में तिथि का उपयोग यह तय करने के लिए किया जाता है कि कौन-से कार्य करने उचित हैं और किन्हें टालना बेहतर होगा। पंचांग के सभी अंगों में तिथि सबसे अधिक देखी जाती है।
तिथियों के प्रकार एवं उनका प्रभाव:
| तिथि का नाम | पक्ष | महत्व / प्रभाव |
|---|---|---|
| प्रतिपदा (1वीं तिथि) | शुक्ल / कृष्ण | नए कार्यों की शुरुआत, नए व्यवसाय एवं शुभ कार्यों के लिए उत्तम। |
| पंचमी (5वीं तिथि) | शुक्ल / कृष्ण | आध्यात्मिक साधना, मंत्र जाप, पूजा-पाठ और ज्ञान प्राप्ति के लिए शुभ। |
| दशमी (10वीं तिथि) | शुक्ल / कृष्ण | धन, समृद्धि, सफलता तथा महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अनुकूल। |
| अमावस्या | कृष्ण पक्ष | आध्यात्मिक साधना, पितृ तर्पण एवं ध्यान के लिए शुभ, लेकिन नए कार्यों की शुरुआत के लिए सामान्यतः उपयुक्त नहीं मानी जाती। |
| पूर्णिमा | शुक्ल पक्ष | मानसिक स्पष्टता, आध्यात्मिक उन्नति, अंतर्ज्ञान और सफलता को बढ़ाने वाली तिथि। |
उदाहरण: अमावस्या के दिन विवाह जैसे मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते, क्योंकि वैदिक ज्योतिष में इसे नए शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है।
नक्षत्र (Nakshatra)
नक्षत्र चंद्रमा की उस सटीक स्थिति को दर्शाता है, जहाँ वह किसी समय राशिचक्र में स्थित होता है।
आमतौर पर 27 नक्षत्रों का उपयोग किया जाता है, जबकि 28वाँ नक्षत्र ‘अभिजीत’ कुछ विशेष मुहूर्तों के लिए शामिल किया जाता है।
चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र से गुजरता है। नक्षत्र के आधार पर दिन के स्वभाव का आकलन किया जाता है और यह समझा जाता है कि यात्रा, विश्राम या रचनात्मक कार्यों के लिए समय कितना उपयुक्त है।
कुछ प्रमुख नक्षत्र एवं उनके प्रभाव:
| नक्षत्र | स्वामी ग्रह | करियर एवं जीवन पर प्रभाव |
|---|---|---|
| रोहिणी | चंद्रमा | धन, समृद्धि, आकर्षण एवं सुख-सुविधाओं में वृद्धि करता है। |
| मघा | केतु | पितरों का आशीर्वाद, नेतृत्व क्षमता और सम्मान प्रदान करता है। |
| विशाखा | बृहस्पति | व्यापार, राजनीति और सफलता प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। |
| मूल | केतु | जीवन में अचानक परिवर्तन लाता है तथा आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। |
उदाहरण: शिशु का नामकरण संस्कार अक्सर शुभ नक्षत्र को ध्यान में रखकर किया जाता है, ताकि उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल प्राप्त हों।
योग (Yoga)
पंचांग में योग सूर्य और चंद्रमा की स्थितियों के एक विशेष संयोजन से बनता है।
इसकी गणना के लिए सूर्य और चंद्रमा की स्थितियों को जोड़कर उसे निश्चित भागों में विभाजित किया जाता है। हर योग दिन की एक विशेष प्रवृत्ति को दर्शाता है। कुछ योग नए कार्यों के लिए अनुकूल होते हैं, जबकि कुछ सावधानी बरतने का संकेत देते हैं।
योग को जानना सही समय चुनने में एक अतिरिक्त और व्यावहारिक स्पष्टता देता है।
शुभ एवं अशुभ योग तथा उनके प्रभाव:
| योग का नाम | प्रकृति | जीवन पर प्रभाव |
|---|---|---|
| सिद्धि योग | शुभ | व्यवसाय, आध्यात्मिक कार्यों एवं महत्वपूर्ण प्रयासों में सफलता प्रदान करता है। |
| व्यतीपात योग | अशुभ | चुनौतियाँ, अस्थिरता और कार्यों में बाधाएँ उत्पन्न कर सकता है। |
| रवि योग | शुभ | नेतृत्व, सरकारी कार्यों एवं नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। |
| विष्कुंभ योग | अशुभ | कार्यों में विलंब, रुकावटें एवं बाधाएँ उत्पन्न कर सकता है। |
उदाहरण: व्यवसाय शुरू करने, नए अनुबंध पर हस्ताक्षर करने या अन्य महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत सामान्यतः अशुभ योग में नहीं की जाती, क्योंकि इसे सफलता में बाधा उत्पन्न करने वाला माना जाता है।
करण (Karana)
करण, तिथि का आधा भाग होता है। एक पूर्ण तिथि में दो करण होते हैं।
कुल 11 करण होते हैं, जिनमें से 4 स्थिर होते हैं और 7 बार-बार दोहराए जाते हैं।
करण यह समझने में मदद करता है कि किसी विशेष समय का उपयोग किस प्रकार के कार्यों के लिए अधिक उपयुक्त है। कुछ करणों में शारीरिक कार्य, यात्रा और पैसों से जुड़े काम अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं, जबकि कुछ करण अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए बेहतर होते हैं, नए कार्य शुरू करने के लिए नहीं।
करण के प्रकार एवं उनके प्रभाव:
| करण | जीवन पर प्रभाव |
|---|---|
| बव करण | धन-संबंधी कार्यों एवं आर्थिक सफलता के लिए शुभ माना जाता है। |
| बालव करण | आध्यात्मिक साधना, पूजा-पाठ एवं शुभ कार्यों के लिए अनुकूल होता है। |
| कौलव करण | रिश्तों, सहयोग, कूटनीति एवं सामाजिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। |
| विष्टि (भद्रा) करण | नए कार्यों की शुरुआत, शुभ कार्यों एवं मांगलिक आयोजनों के लिए सामान्यतः वर्जित माना जाता है। |
उदाहरण: विष्टि (भद्रा) करण के दौरान यात्रा या नए कार्य की शुरुआत से सामान्यतः बचा जाता है, क्योंकि वैदिक मान्यताओं के अनुसार इससे कार्यों में बाधाएँ आने की संभावना रहती है।
वार (Vara)
सप्ताह का प्रत्येक दिन एक विशेष ग्रह से संबंधित माना जाता है:
|
स्वामी ग्रह | किन कार्यों के लिए शुभ | |
|---|---|---|---|
| सोमवार | चंद्रमा | स्वास्थ्य, उपचार, मानसिक शांति एवं भावनात्मक संतुलन | |
| मंगलवार | मंगल | साहस, शक्ति, प्रतियोगिता एवं पराक्रम से जुड़े कार्य (कानूनी मामलों से बचें) | |
| बुधवार | बुध | व्यापार, वार्ता, संचार, शिक्षा एवं नए समझौते | |
| गुरुवार | बृहस्पति | शिक्षा, आध्यात्मिक उन्नति, धार्मिक कार्य एवं गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए शुभ | |
| शुक्रवार | शुक्र | विवाह, कला, सौंदर्य, विलासिता एवं आभूषण खरीदने के लिए उत्तम | |
| शनिवार | शनि | अनुशासन, अचल संपत्ति, निर्माण कार्य एवं दीर्घकालिक योजनाओं के लिए अनुकूल | |
| रविवार | सूर्य | सरकारी कार्य, नेतृत्व, प्रशासन एवं प्रतिष्ठा से जुड़े कार्यों के लिए शुभ |
उदाहरण: वैदिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार को शुक्र ग्रह के प्रभाव के कारण सोना, आभूषण और अन्य विलासिता की वस्तुओं की खरीदारी शुभ मानी जाती है।
पंचांग के पाँच अंग
“पंचांग” नाम पाँच अलग-अलग तत्वों से मिलकर बना है। ये सभी तत्व केवल खगोलीय गतिविधियों को ही नहीं दर्शाते, बल्कि सूर्य और चंद्रमा के संबंध, समय के विभाजन और कालक्रम के विभिन्न पहलुओं को भी समझाते हैं।
इन पाँचों को एक साथ देखने पर किसी भी दिन को अधिक गहराई से समझा जा सकता है – जो केवल एक साधारण तारीख से संभव नहीं है।
पंचांग कैसे पढ़ें?
शुरुआत में पंचांग पढ़ना थोड़ा जटिल लग सकता है, लेकिन इसकी मूल समझ दैनिक उपयोग के लिए पर्याप्त होती है।
- सबसे पहले वर्तमान तिथि देखें – यह चंद्र दिवस को दर्शाती है।
- इसके बाद नक्षत्र देखें – यह चंद्रमा की स्थिति और दिन के स्वभाव को बताता है।
- फिर योग और करण देखें – ये बताते हैं कि समय कार्य के लिए अनुकूल है या संयम रखने की आवश्यकता है।
राहु काल पर भी ध्यान दिया जाता है। परंपरागत रूप से इस समय नए शुभ कार्य शुरू करने से बचा जाता है, जबकि सामान्य कार्य जारी रहते हैं। यदि कोई कार्य वास्तव में महत्वपूर्ण हो, तो यह देखना उचित होता है कि चुने गए समय में कोई शुभ मुहूर्त आता है या नहीं।
नियमित अभ्यास के साथ यह प्रक्रिया सरल हो जाती है और इसमें बहुत कम समय लगता है।
पंचांग कब देखना चाहिए?
पंचांग को आमतौर पर यात्रा, व्यवसाय की शुरुआत, धार्मिक अनुष्ठानों या घर बदलने से पहले देखा जाता है।
कई लोग इसे महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर करने या बड़ी खरीदारी से पहले भी देखते हैं। हर छोटे कार्य के लिए पंचांग देखना आवश्यक नहीं है, लेकिन जब कोई काम भावनात्मक या आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हो, तब इसके पाँचों तत्वों को देखना उपयोगी दिशा देता है।
मुहूर्त में पंचांग की भूमिका
मुहूर्त निकालना पंचांग का एक प्रमुख उपयोग है।
विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण और व्यवसाय की शुरुआत – इन सभी में पंचांग के आधार पर समय चुना जाता है।
एक जानकार व्यक्ति पंचांग के पाँचों तत्वों को साथ में देखकर ऐसा समय निर्धारित करता है, जिसमें पारंपरिक दृष्टि से नकारात्मक प्रभाव कम से कम हों।
कोई भी मुहूर्त भविष्य की सभी कठिनाइयों को समाप्त नहीं कर सकता, लेकिन सही समय पर की गई शुरुआत किसी भी कार्य को एक संतुलित और सोच-समझकर किया गया आरंभ देती है।
पंचांग और हिंदू कैलेंडर में अंतर
हिंदू कैलेंडर तिथियाँ, महीने और त्योहारों की जानकारी देता है। यह बताता है कि कौन-सा दिन किस अवसर के लिए निर्धारित है।
पंचांग इससे आगे जाकर समय की गुणवत्ता को समझाता है।
एक ही तारीख अलग-अलग वर्षों में अलग पंचांग संयोजन के साथ आ सकती है, और इसी कारण उनका अनुभव भी अलग हो सकता है।
पंचांग और ग्रहों की स्थिति
पंचांग मुख्य रूप से सूर्य और चंद्रमा की स्थिति तथा समय-आधारित गणनाओं पर आधारित होता है।
- तिथि – सूर्य और चंद्रमा के संबंध पर निर्भर
- नक्षत्र – चंद्रमा की स्थिति पर आधारित
- योग – दोनों की संयुक्त स्थिति से
- करण – तिथि के विभाजन से
पंचांग के बिना ग्रहों की सामान्य जानकारी तो मिल सकती है, लेकिन उसे दैनिक जीवन में लागू करना कठिन हो जाता है।
आज के समय में पंचांग क्यों महत्वपूर्ण है?
पंचांग देखने में अधिक समय नहीं लगता – सुबह के कुछ मिनट पर्याप्त होते हैं। यह आदत रोज़मर्रा के कामों के प्रति जागरूकता बढ़ाती है। आज की व्यस्त जीवनशैली में पंचांग एक संतुलित ठहराव देता है।
यह आधुनिक साधनों के विरोध में नहीं है, बल्कि उनके साथ सहज रूप से चलता है।
कई लोग अनुभव करते हैं कि नियमित रूप से पंचांग देखने से उनके निर्णय अधिक सोच-समझकर लिए जाते हैं। पंचांग आज भी महत्वपूर्ण है – इसलिए नहीं कि यह हर बार असाधारण परिणाम देगा, बल्कि इसलिए कि यह समय का सम्मान करना सिखाता है।
और समय का सम्मान करने की आदत किसी भी युग में शांत और अधिक आत्मविश्वास से भरे जीवन की ओर ले जाती है।
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FAQs
What is Panchang and how is it used?
Panchang is a traditional Hindu calendar system that combines time, moon position, date cycle, and planetary calendar to guide significant activities. It is used to determine auspicious moments for rituals, personal decisions, and important tasks.
What does Tithi represent in Panchang?
Tithi represents the lunar day and is defined by each 12-degree increment between the Sun and the Moon. It helps determine the suitability of starting new tasks or performing rituals.
How is Nakshatra important in Panchang?
Nakshatra indicates the Moon’s position along the zodiac, affecting the qualitative tone of the day. It helps in planning activities such as travel, rest, or creative work.
What is the role of Yoga in Panchang?
Yoga in Panchang arises from the combination of the Sun and Moon’s positions. It influences the day’s quality and guides whether to proceed with new efforts or exercise caution.
Why is Muhurat selection important in Panchang?
Muhurat selection is crucial for determining auspicious timings for events like marriages, business openings, and ceremonies. It minimizes traditional doshas and provides a considered beginning to important work.
