कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा की महत्ता

कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा की महत्ता

कुंडली का छठा स्थान शत्रु भाव होकर, रोग की अवधि, शत्रु, दैनिक कार्य, नौकरी, नौकर-चाकर, कर्मचारी वर्ग, पशु, बीमारी, कर्ज, उधार लेन देन, जाति, बैंकिग सेक्टर, शेयर बाजार, ब्याज की आवक, नौकरी में परेशानी, जाॅब वर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंध रखता है। कुंडली के छठे भाव के कारक मंगल और शनि हैं, और इस भाव को पीड़ा का पर्याय भी माना गया है। इस भाव में किसी भी ग्रह की मौजूदगी इस भाव से संबंध रखने वाले क्षेत्रों में लाभ या हानि देने का काम कर सकती है।कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा भावना, उमंग, पेशेवर जीवन, लोगों से संबंध और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों को प्रभावित कर सकते हैं। चंद्रमा वैश्य वर्ण का सत्वगुणी ग्रह है, और सभी ग्रहों को अपना मित्र मानता है। ज्योतिष व खगोलीय दोनों ही दृष्टिकोण से चंद्रमा सूर्य के बाद आकाश में मौजूद सबसे महत्वपूर्ण ग्रह है। चंद्रमा रचनात्मकता, मन, भावनाओं और शांति के भी पर्याय हैं। कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा की मौजूदगी जातक को दूसरों की मदद करने के लिए प्रेरित करती है। चंद्रमा चंचल लेकिन वैश्य वर्णी है, इसलिए किसी अन्य ग्रह को अपना विरोधी या शत्रु नहीं मानता है। हालांकि बुध, शुक्र और शनि चंद्रमा को अपना विरोधी मानते हैं।

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कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा

जिस कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा होता है, उसके लिए भावनात्मक तौर पर अपनी उपयोगिता साबित करना एक बेहद महत्वपूर्ण बात है। वह मेहनतकश और उपयोगी होगा और अपने लिए चीजों का बेहतर प्रबंधन कर रहा होगा। लेकिन यदि उपरोक्त कथन किसी कुंडली पर सटीक नहीं बैठता तो आप भावनात्मक उधेड़बुन से गुज़र रहे होंगे। जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा छठे भाव में बैठे हैं, उन्हें अपने काम में निरंतरता बनाए रखने के लिए विविधता और नयेपन की जरूरत होती है। ऐसे जातक एक जगह पर अधिक समय तक कार्य नहीं कर सकते, और लगातार अपनी नौकरी या करियर बदलते रहते हैं। ऐसे जातकों के लिए छठे भाव में चंद्रमा करियर और दैनिक जीवन को प्रभावित करता है। ऐसे जातक लगातार अपने लिए एक अनुकूल नौकरी की तलाश करते रहते हैं। यदि आप भी करियर या नौकरी संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं तो समाधान हमारे ज्योतिषी विशेषज्ञों के पास है।

ऐसे जातक एक नियमित दिनचर्या का पालन नहीं कर सकते, वे बुद्धिमान और ज्ञानी होते हैं और सामने आने वाली हर समस्या और अनिश्चितता को आत्मविश्वास के साथ आसानी से हल कर लेते हैं। छठे भाव में चंद्रमा के शुभ प्रभावों से जातक शत्रुओं पर विजय पाने में भी सक्षम होता है। ऐसे जातक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर उन्हें पराजित कर सकते हैं। वे स्वभाव से दूसरों की सहायता करने वाले और मदद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

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छठे भाव में चंद्रमा के प्रभाव और सुझाव

कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा, जातक को बहुत संवेदनशील बनाता है, इस भाव में बैठे चंद्रमा भावनात्मक रूप से मजबूत रहने और स्वास्थ्य के मुद्दे पर सजग रहने की मांग करते हैं। इस स्थिति में यदि चंद्रमा किसी विरोधी ग्रह के प्रभाव में है, तो जातक झुंझलाहट, शरीर दर्द या गुर्दे से संबंधित किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर सकता है। यदि उचित समय पर उचित देखरेख ना की जाये तो कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा पीड़ादायक भी हो सकते हैं। कुंडली में चंद्रमा की इस स्थिति से जातक अत्यंत भावुक होकर दुःख और संताप जैसे मनोरोग का शिकार हो सकता है। कुंडली के छठे भाव में बैठे चंद्रमा जातक को रोगों का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से भागने के लिए प्रेरित करते है। यदि आप भी किसी रोग या व्यसन से पीड़ित हैं, तो हमारे ज्योतिषी विशेषज्ञों से इसका समाधान पा सकते हैं।

हालांकि छठे भाव में चंद्रमा से प्रभावित जातक सदैव दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहते हैं, और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए सटीक सुझाव भी देते हैं। ऐसे जातक चीजों को जल्द ही सीख जाते हैं, और बेहद मंथन करने वाले होते हैं। कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा किसी विरोधी ग्रह के प्रभाव में आकर निश्चित रूप से स्वास्थ्य समस्या या कमजोर शारीरिक तंत्र की ओर इशारा करते हैं। कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा करियर को भी प्रभावित करता है, ऐसे जातक कार्यस्थल पर अपने काम के बलबूते ख्याति पाना पसंद करते हैं। कार्य से प्रसिद्धि पाने की लालसा और असुरक्षा का भाव उन्हें कार्य के प्रति समर्पित बना देता है। कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा की मौजूदगी आपको भावनात्मक रूप से तनाव और चिंता में धकेल सकती है। ऐसे जातकों को तनाव से बचने के लिए योग और ध्यान साधना का सहारा लेना चाहिए।

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निष्कर्ष

कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा की मौजूदगी हमारे भावनात्मक पक्ष को प्रदर्शित करने का काम करती है। यह बताती है कि हम भावनात्मक संतुष्टि कब और कैसे प्राप्त करते हैं। यदि भावनाएं एक समस्या के रूप में हमे परेशान कर रही है तो हमे ग्रह स्थिति का अध्ययन कर भावनात्मक अशांति का सुराग़ ढूंढने में सफलता मिल सकती है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है, कि कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा की मौजूदगी जातक के सामने भावनात्मक जटिलताएँ पैदा कर सकती है। हालांकि भावनाओं को धैर्य और अनुशासन के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है, और उनके उचित प्रबंधन से एक खुशहाल और सफल जीवन जिया जा सकता है।

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गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
गणेशास्पीक्स टीम

 

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