क्या कहती हैं बाबूलाल मरांडी की कुंडली, झारखण्ड विधानसभा चुनाव 2019 में कैसे होंगे उनके सितारे


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व्यक्तिगत जानकारी
नाम – बाबूलाल मरांडी
जन्म दिन – 11 जनवरी 1958
जन्म समय – अनुपलब्ध
जन्म स्थान – गाँव कोडिंगबांक, जिला गिरिडीह, झारखंड

मुख्यमंत्री कार्यकाल – झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री
15 नवंबर 2000-14 मार्च 2003
(2 वर्ष, 4 महीने और 3 दिन)

बाबूलाल मरांडी की कुंडली में मातृकारक मंगल के साथ आत्मकारक शनि मजबूत स्थिति में है जो एक शक्तिशाली जैमिनी राजयोग का प्रतीक है। यह उन्हें मजबूत जन अपील के साथ एक करिश्माई नेता के साथ-साथ अच्छा रणनीति कार और प्रशासक भी बनाता है।
बुध के साथ अमात्यकारक सूर्य अग्नि तत्व राशि धनु में स्थित है। यह स्थिति उन्हें एक मजबूत नेता बनाती है जो हमेशा अपने कार्यों के प्रति उत्साहित और प्रेरित रहते हैं। इसके साथ ही शुक्र ग्रह चंद्रमा से 5 वें घर में स्थित है। जो उन्हें सार्वजनिक जीवन में सफलता, प्रसिद्धि और उच्च स्थान प्रदान करता है। लेकिन, शुक्र प्रतिगामी है। इसलिए, उनकी राजनीतिक यात्रा उतार-चढ़ावों के अनुभव से भरी हुई है।

नवंबर 2000 में, शनि और बृहस्पति के पारगमन के संयोजन ने उनके राजनीतिक जीवन को नई ऊँचाइयों पर पहुंचाया। मंगल और आत्मकारक शनि पर बृहस्पति की उदार दृष्टि से उन्हें झारखंड राज्य का पहला मुख्यमंत्री बनने में मदद मिली है। बृहस्पति के पारगमन से उनके राजनीतिक करियर को 2003 तक काफी हद तक मदद मिली। लेकिन, वर्ष 2003 के दौरान शनि और राहु के पारगमन के संयोजन ने कई समस्याओं को जन्म दिया है। परिणामतः उन्हें सी एम के पद से हटना पड़ा है। हालांकि उन्होंने 2004 में लोकसभा चुनाव जीता लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा शनि और राहु के प्रतिकूल परिवर्तन के कारण कठिन हो गई। फिर भी, उसका कुंडली मजबूत स्थिति में है। बाबूलाल मरांडी अपने राजनीतिक जीवन में एक बार फिर उछालने मारने की क्षमता रखते हैं।

वर्तमान ग्रह गोचर और झारखण्ड विधानसभा चुनाव 2019 में बाबूलाल मरांडी की संभावनाएं
जैसा कि उनकी कुंडली में बृहस्पति का पारगमन जन्म ग्रह सूर्य की ओर हो रहा है। वे अच्छी तरह से तैयार होंगे और अधिक आत्मविश्वास के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे। मतदाताओं के बीच एक अलग राग छेड़ने में सक्षम होंगे और झारखण्ड की राजनीति में उनके महत्व और प्रमुखता को भलीभांति महसूस किया जा सकेगा।

लेकिन, शनि और केतु का गोचर, सूर्य के ऊपर चलायमान हैं। इसलिए उन्हें कड़े विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है। साथ ही, सहयोगियों के साथ उनका तालमेल कमजोर होगा और कई मुद्दों पर सहयोगियों के साथ मतभेद हो सकता है। पार्टी के अंदर की राजनीति उन्हें परेशान कर सकती है। उनकी मजबूत कुंडली पार्टी को पिछले चुनावों की तुलना में अधिक वोट और समर्थन हासिल करने में मदद कर सकती है, लेकिन फिर भी असंतोष की भावना है। क्योंकि चुनावी परिणाम सिर्फ उनके इकलौते की कुंडली कर निर्भर नहीं हो सकते हैं। अन्य कारकों का भी उतना ही हाथ रहेगा।

22 Nov 2019


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