शीतलाष्टमी का ज्योतिषीय महत्व: जिस दिन हम बासी खाना खाकर भी अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं!


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शीतलाष्टमी हिन्दू धर्म संस्कृति का एक मात्र ऐसा त्यौहार जिस दिन हम सब बासी खाना खा कर भी अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं, और आश्चर्य की बात तो ये है कि लोगों की ये कामना पूर्ण भी होती है। फाल्गुन माह की कृष्णा पक्ष अष्टमी को यह त्यौहार मनाया जाता है। शीतलाष्टमी से एक दिन पहले यानि सप्तमी को शीतला सप्तमी कहते हैं। इस दिन संध्या काल में विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाये जाते हैं। जिन्हें अगले दिन यानि अष्टमी को बास्योड़ा के रूप में माता शीतला का भोग लगा कर खाया जाता है। शीतलाष्टमी, माता शीतला को प्रसन्न करने के लिए मनायी जाती है, जिन्हें छोटी माता, बड़ी माता, चेचक और खसरा जैसी बीमारियों को दूर करने की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। होलीका दहन से आठवें दिन यह त्यौहार मनाया जाता है। इस वर्ष शीतलाष्टमी 16 मार्च 2020 को मनाई जाएगी। इसी उपलक्ष्य में आइये जानते हैं, शीतलाष्टमी का ज्योतिषीय महत्व।

अलग-अलग राज्यों में शीतलाष्टमी कैसे मनाई जाती है?

शीतलाष्टमी के त्यौहार का दूसरा नाम बास्योड़ा है। क्योंकि इस दिन माता शीतला को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। इस दिन यानि शीतलाष्टमी को घरों में आग या चूल्हा नहीं जलाया जाता है। अष्ट्मी के दिन एक दिन पहले पकाया हुआ भोजन ही ग्रहण किया जाता है। सामान्य तौर पर तो यह संपूर्ण भारत वर्ष में मनाया जाता है, लेकिन इस त्यौहार को देश के उत्तरी और पश्चिमी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात आदि में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। वही दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में माता शीतला को ‘देवी पोलरम्मा’ और कुछ राज्यों में ‘देवी मरियम’ के रूप में पूजा जाता है।

शीतलाष्टमी अनुष्ठान और परंपरा

शीतलाष्टमी के दिन माता शीतला देवी की पूजा की जाती है। लोग सुबह जल्दी उठ कर ठंडे पानी से स्नान करते हैं। इसके बाद वे माता शीतला के दर्शनों हेतु मंदिर जाते हैं, और माता शीतला से अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं। इस दिन शांतिपूर्ण सुखी जीवन और निरोगी काया के लिए माता शीतला का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कई अनुष्ठान भी किए जाते हैं। इस दिन लोग शीतलाष्टमी का उपवास करते हैं, तथा उनकी व्रत कथा भी सुनते और सुनाते हैं। वहीं कुछ लोग माता शीतला के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करने के लिए मुंडन भी करवाते हैं। चूँकि इस दिन गर्म और ताज़ा भोजन नहीं किया जाता, इसलिए लोग एक दिन पहले बनाया हुआ भोजन ही ग्रहण करते हैं। शीतला सप्तमी के इस शुभ अवसर पर, आप अपने सौभाग्य में वृद्धि कर सकते हैं, हमारे गोल्डन प्लेटेड अनन्य श्री यंत्र के साथ।


शीतलाष्टमी का महत्व

शीतलाष्टमी का वर्णन ‘स्कंद पुराण’ में किया गया है। शीतलाष्टमी का त्योहार माता शीतला को समर्पित है। हिंदू पौराणिक कथाओं में, माता शीतला को माता पार्वती और दुर्गा माता का अवतार माना गया है। शीतला माता को चिकनपॉक्स या चेचक या छोटी माता और बड़ी माता जैसी भयानक बिमारियों से पीड़ित लोगों को ठीक करने के लिए जाना जाता है। इसलिए हिंदू धर्म में लोग अपने बच्चों को इन बीमारियों और अन्य त्वचा जनित रोगों से बचाने के लिए शीतला माता की पूजा करते हैं। शीतला शब्द का अर्थ होता है ‘ठंडा’ और ऐसा माना जाता है, कि माता शीतला अपनी शीतलता से रोगों का इलाज करती हैं। भारत के कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में, देवी को प्रसन्न करने के लिए कुछ लोग पशु बलि भी देते हैं।

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गणेशजी की कृपा से,
गणेशस्पीक्स.कॉम टीम

14 Mar 2020


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