Sawan Month 2021 Date: कब से शुरू होगा सावन का महीना, पड़ेंगे कितने सोमवार, नोट करें तिथियां


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सावन के महीने को बहुत ही पवित्र महीना माना गया है। यह हिंदू कैलेंडर का पांचवां महीना है, जो शिव भक्तों द्वारा मनाया जाता है। भगवान शिव को प्रिय इस पवित्र महीने में उपवास और पूजा-अर्चना करना बहुत ही शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में दो कैलेंडर प्रचलित हैं, एक जिसे उत्तर भारत में लोग पूर्णिमा कैलेंडर के रूप जाने जाते हैं और दूसरा जो दक्षिण में प्रचलित है, इसे अमावसांत कैलेंडर के नाम से जाना जाता है। यहीं कारण है कि भारत के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग उत्सव मनाए जाते हैं। सावन महीने का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव सोमवार का व्रत है। सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव को समर्पित है। अब आपके मन में इस व्रत के बारे में जानने की भावना जागृत हुई होगी। तो चलिए 2021 के इस पावन महीने में सावन सोमवार की महिमा, सावन सोमवार व्रत विधि, सावन सोमवार पूजा विधि और सोलह सोमवार से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को करीब से जानते हैं।

सावन सोमवार 2021 कब है (sawan somvar kab hai)

साल 2021 में सावन का महीना 25 जुलाई 2021 से शुरू होगा। सावन के माहीने में पड़ने वाले सोमवार को ही सावन सोमवार के नाम से जाना जाता है। सामान्य तौर पर सावन महीने में चार ही सोमवार आते हैं, पांचवा सोमवार भाद्रपद में आता है। यह भगवान शिव की उपासना का आखिरी सोमवार होता है। इस साल भी सावन महीने में चार ही सोमवार है। इस साल सबसे अच्छी बात यह है कि इस साल सावन महीने की शुरुआत रविवार यानी 25 जुलाई से होगी, और रविवार यानि 22 अगस्त को इसका समापन होगा। आइए साल 2021 के सावन सोमवार की तारीख और तिथि के बारे में जानते हैं।

पहला सावन सोमवार – 26 जुलाई 2021, तिथि – तृतीया

दूसरा सावन सोमवार – 2 अगस्त 2021, तिथि – नवमी

तीसरा सावन सोमवार – 9 अगस्त 2021, तिथि – प्रतिपदा

चैथा सावन सोमवार – 16 अगस्त 2021, तिथि – अष्टमी

सावन 2021 का अंतिम दिन – 22 अगस्त, रविवार


सावन सोमवार व्रत विधि और महत्व (sawan somvar vrat aur mahatv)

भगवान शिव को प्रिय सावन मास वैसे तो पूरा महीना पवित्र होता है, लेकिन सोमवार का विशेष महत्व होता है। इस दिन जब आप कोई अनुष्ठान करते हैं, तो आपको भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए विधिवत अनुष्ठान करना चाहिए। आपको सावन सोमवार का व्रत विधिवत रूप से समपन्न करना चाहिए।

हालांकि, सावन सोमवार का उपवास लोग अपने स्वास्थ के आधार पर भी रखते हैं। कई लोग इस दिन बिना अन्य का सेवन किए दिनभर उपवास रखते हैं, वह इस दौरान केवल फल और दूध पीते हैं। वहीं कुछ लोग दिन में एक बार बिना नमक का बना हुआ खाना पसंद करते हैं। उपवास रखना हमारे स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद है। यह धार्मिक मान्यताओं के अलावा उपवास शरीर को डिटॉक्सीफाई करने में भी मदद करता है। सावन के महीने में बारिश के दौरान जब जलजनित और वायुजनित रोगों में वृद्धि होती है, तो वातावरण में सूक्ष्मजीवों के प्रजनन में वृद्धि के कारण हमें कई स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हमें उपवास शरीर में सही संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए, ऐसा माना जाता है कि इस दौरान उपवास करने से आपके शरीर और आत्मा को डिटॉक्सीफाई और शुद्ध किया जा सकता है।

सावन सोमवार की महिमा (sawan somvar ki mahima)

हिंदू धर्म में मान्यता है कि यदि कोई अविवाहित लड़की इस व्रत को पूरे विधिवत रूप से संपन्न करती है, तो यह उसके आने वाले वैवाहिक जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। इस व्रत का पालने करने से भगवान शिव उन्हें उपयुक्त वर देने का वरदान देते हैं। वहीं पुरुषों के लिए भी यह महत्वपूर्ण व्रत है, इस व्रत को रखने से भगवान शिव आपकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ती करते हैं। यह व्रत आपके सपनों को सच करने में आपकी काफी सहायता करता है। सावन सोमवार का व्रत और भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

सावन सोमवार का महत्व (sawan somvar ka mahatva)

पुराणों के अनुसार सावन के महीने में ही देवताओं और राक्षसों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। जिससे चौदह दिव्य वस्तुएं निकलीं थी। इसमें एक बेहद ही घातक जहर भी शामिल था, जिसे हलाहल के नाम से जाना गया। दुनिया को विनाश से बचाने के लिए भगवान शिव ने जहर पी लिया। लेकिन, इसे उन्होंने कंठ में धारण कर दिया। भगवान शिव ने हलाहल को अपने कंठ में स्थान दिया, जिससे इनका कंठ नीला पड़ गया। यही कारण है कि भगवान शिव को नीलकंठ भी कहा जाता है। यही सावन सोमवार की पौराणिक कथा आगे चलकर भगवान शिव के सम्मान में सावन सोमवार व्रत का पालन करने और आभार व्यक्त करने का कारण बना। देश सहित हिंदू धर्म के मानने वाले दुनिया में कई लोग है, जो इस व्रत का पालन करते हैं। इसके अलावा सावन के महीने में पड़ने वाले पहले सोमवार से एक बेहद ही महत्वपूर्ण और जटिल उपवासों की सीरीज की शुरूआत होती है। इन्हें सोलह सोमवार के नाम से जाना जाता है। आइए अब सोलह सोमवार व्रत के बारे में नजदीक से जानते हैं।

सोलह सोमवार व्रत (solah somvar vrat)

आपने हमेशा सावन सोमवार के बारे में सुना होगा। भगवान शिव की अगर सावन के महीने में पांच सोमवार को उपवास रखकर पूजा की जाती है, तो यह आपके लिए अत्यंत लाभदायक होता है। इसके अलावा सोलह सोमवार भी काफी महत्वपूर्ण है। यदि आप 16 सोमवार तक इस व्रत का पालन करते हैं, तो यह माना जाता है कि भगवान शंकर आपके मन की सारी इच्छाओं को पूरा होने का आशीर्वाद देंगे। सावन महीने से 16 सोमवार तक इस व्रत को किया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस उपवास को काफी फलदायी माना गया है।

सावन में सोलह सोमवार का व्रत (sawan me solah somvar ka vrat)

भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर भौतिक सुखों का लाभ लेने के लिए आप सावन सोमवार के अलावा सोलह सोमवार व्रत भी कर सकते हैं। इस व्रत को करने से भी भगवान शिव आप पर कृपा बरसाते हैं। इसे कोई भी कर सकता है, जो भगवान शिव की पूजा करना चाहता है। हालांकि, इस व्रत को अधिकर अविवाहित युवतियां करती है, जिन्हें अपने वांछित जीवनसाथी से शादी करने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। श्रावण मास के पहले सोमवार से शुरू होने वाला यह सोलह सोमवार व्रत 16 सप्ताह तक चलता है। अन्य उपवासों की तरह इसमें भी आपको विधिवत रूप से पूजा करनी होती है, और भगवान शिव से प्रार्थना करनी होती है। अगर आप पूरे श्रद्धाभाव से इस उपवास को करते हैं, तो भगवान शंकर आपसे बहुत प्रसन्न होते हैं।


16 सोमवार व्रत का उपवास कैसे करें (16 somvar vrat ka upwas kaise karen)

16 सोमवार का उपवास करना ज्यादा जटिल नहीं है। आपको बस शुद्ध मन से भगवान शिव की आराधना कर 16 सोमवार तक व्रत का पालन करने का संकल्प लेना चाहिए। इस व्रत की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर स्नान करने से होती है। फिर पूजा के लिए आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करें। इसके बाद आप भगवान शिव के मंदिर में जाकर या फिर अपने घर में बने मंदिर में प्रभु के दर्शन और पूजा कर सकते हैं। इस उपवास के दौरान आप भगवान शिव का रूद्राभिषेक या सामान्य पानी से जलाभिषेक कर सकते हैं। साथ ही भगवान की मूर्ति पर फूल सहित अन्य सामग्रियां अर्पित करें और दीपक जलाएं। सोलह सोमवार व्रत पूजा विधि से भगवान की पूजा करने के बाद भगवान शिव की आरती करें और सोलह सोमवार व्रत कथा पढ़ें या किसी से सुनें।

शिव की पूजा विधि और मंत्र

भगवान शिव की पूजा करने से आपको मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। भगवान शिव अपने नाम के अनुरुप भोले होते हैं, उनकी पूजा में ज्यादा तामझाम की आवश्यकता नहीं होती है। भगवान शिव महज जल अभिषेक से भी प्रसन्न हो जाते हैं। हालांकि, आपको सावन में भगवान शिव का प्रतिदिन दूध, दही, शहद, घी और शकर मिलाकर अभिषेक करना चाहिए, यह आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। जलाभिषेक करते समय ‘ओम नम: शिवाय’ का जाप करते रहें। भगवान शिव को कर्पूर आरती विशेष पसंद आती है। इस उपवास के दौरान आप भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ‘ओम नम: शिवाय’ का जाप करते रहिए, यह आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।

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01 Jul 2021


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