शनि का धनु में गोचरः कुछ बड़े बदलाव के लिए हो जाए तैयार


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शनि गोचर की तारीखेंः 
इस गोचर के कर्इ अद्वितीय पहलू है। शनि एक बार में ही अपनी यात्रा पूरी नहीं करेगा, ये 6 जून, 2017 आैर 25 अगस्त, 2017 के बीच वक्री गति से यात्रा करेगा। फिर ये मार्गी होकर वृश्चिक राशि में अपनी यात्रा पूरी करेगा। इसके बाद, 26 अक्टूबर, 2017 को आखिरकार वो धनु राशि में प्रवेश करेगा आैर अपनी सामान्य अवधि ढ़ार्इ साल यानि 30 महीनों तक इसमें रहेगा। इसके बाद ये 24 जनवरी, 2020 को मकर राशि में प्रवेश करेगा। 

शनि धनु मेंः वैदिक दृष्टिकोण से विश्लेषण 
शनि आपको अपने व्यक्तित्व की विशेषताआें को बाहर लाने के लिए प्रेरित करेगा। उदाहरण के तौर पर देखें, तो जब शनि धनु में पारगमन करेगा, तब आप ज्ञान, बुद्घि आैर जीवन का गहन दार्शनिक अर्थ जानने के लिए लालायित होंगे। लेकिन एक धीमी गति का ग्रह होने के कारण, शनि चीजों की गति काफी धीमा कर देगा आैर ये तब निराशाजनक होगा जब आप त्वरित परिणाम चाहेंगे। 

शनि अपना खुद का समय लेगा, जो कि एक अच्छी चीज है, ये आपको बेहतर, संतुलित स्थान पर ले जाएगा, बशर्ते आप चीजों को पूर्णतया लिप्त होकर करें।  

शनि का धनु में गोचर आपको नियंत्रणकारी बनाएगा
शनि नियंत्रण करने की इच्छा प्रेरित करेगा आैर आप अंत में लोगों की जिंदगी पर नियंत्रण रखने की कोशिश कर सकते है। चूंकि कोर्इ भी नियंत्रित रहना पसंद नहीं करेगा, एेसे में लोग आपको गलत समझ सकते है आैर उनके साथ आपके संबंध उलझ सकते है। 

हमारी शनि पारगमन रिपोर्ट से जानें शनि आप पर क्या प्रभाव दिखाएगा

शनि के वक्री होने पर आपको लापरवाही की कीमत चुकानी पड़ेगी 
शनि वक्री के दौरान धनु राशि के नकारात्मक गुण, जैसे कि हर चीज की अति,  ढिठार्इ अौर लापरवाही प्रकट होगी। आपको किसी न किसी तरह ये एहसास होगा कि आपको अपने नकारात्मक व्यवहार की बड़ी कीमत चुकानी होगी, वो भी ना सिर्फ पैसों के मामलों में बल्कि समय, ऊर्जा आैर खुशियों के मामलों में भी।  

धनु में शनिः सीमाएं Vs. सीमाएं तोड़ने की चाहत 
शनि एक सख्त दारोगा हो सकता है आैर एेसी हालातों से स्पष्टता, संरचना आैर प्रतिबद्घताआें की मांग कर सकता है, जब आप किसी चीज में फंसे होंगे। हालांकि, शनि का धनु में होना अापको ये सीखा सकता है कि जब आप कुछ नियमों आैर विनियमों का पालन करते है, तो उसका परिणाम काफी बेहतरीन हो सकता है।   

शनि का धनु में गोचर स्पष्ट रूप से विकल्प बनाने, ठोस निर्णय लेने आैर निरर्थक चीजों को त्याग देने का समय है। 

शनि का धनु में गोचर आपको वास्तविक धरातल पर लाएगा 
धनु आपकी समझ आैर जागरूकता के स्तर को बढ़ाने का आहवान करता है, लेकिन शनि के धनु में गोचर के साथ, आपको चीजों को यथार्थवादी ढंग से करने की जरूरत है। धनु आपको उस वक्त अव्यवस्थित कर सकता है, जब आप नया ज्ञान या अनुभव अनुसरण कर रहे होंगे, लेकिन शनि चाहेगा कि अाप अपने कार्य को सुव्यवस्थित करें।
धनु राशि का स्वभाव एेसा है कि वे कोर्इ भी चीज के बारे में बहुत ज्यादा नहीं सोचते आैर उनका दृष्टिकोण काफी व्यापक होता है जबकि शनि चीजों को बारीकी से देखने को अहमियत देते है।  

सकारात्मक सोच रखना अच्छी चीज है, लेकिन हवा में महल ना उड़ाए, अन्यथा ये निराशा आैर कुंठा उत्पन्न कर सकती है, इस तरह शनि आपको जमीन पर बने रहने का पाठ सीखाता है। 

चंद्र राशि वृश्चिक, धनु आैर मकर शनि की साढ़े साती के चरण से गुजरेंगे। आप भी अपनी व्यक्तिगत साढ़े साती रिपोर्ट प्राप्त करें। 

शनि का धनु में गोचर आपको आजादी का सही अर्थ सिखाएगा 
शनि का धनु में गोचर का लक्ष्य आपके व्यक्तिगत दर्शन को व्यवहारिक रूप से लागू करने का होगा। आप अपनी विश्वास प्रणाली को निश्चित रूप दे सकते है, लेकिन अडियल सोच से बचना चाहिए। एेसा कर्इ बार होगा जब आपको ये महसूस होगा कि आपकी आजादी पर कब्जा किया जा रहा है, लेकिन जल्द ही आपको ये महसूस होगा कि आजादी का मतलब जिम्मेदारियों से भागना नहीं है, बल्कि आप वास्तविक आजादी का अनुभव तभी कर पाएंगे, जब आप अपनी जिम्मेदारियों को सही ढंग से निभाएंगे।   

शनि का धनु में गोचर आपके मूल्यों का परीक्षण करेगी। अगर आपकी आदत दूसरों को उपदेश देने की है तो अब शनि आपमें खुद में सुधार लाने के लिए विवश करेगा। 

शनि-केतु की युति से असीम आपदाआें के संकेत 
शनि-केतु की युति दर्शाती है कि दुनियाभर में कर्इ सारी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं होने की संभावना है, जो कि जीवन आैर संपत्ति का बड़ा नुकसान करेगी। साथ ही ये अवरोधों, घातक दुर्घटनाआें, महामारी, बाढ़, भूकंप आैर तूफान के भी संकेत दे रही है। जब शनि केतु से मेल करेगा, तो विश्व के विभिन्न भागों में मनमुटाव, प्राकृतिक आपदाएं आैर बड़ी हिंसक घटनाएं प्रकट होगी।   

इस समय भारी नुकसान हो सकता है। साथ ही, कुछ भारी वित्तीय संकट, घातक महामारी या जैविक युद्घ की मजबूत संभावना है। कोर्इ भी घटना घटित हो सकती है, शनि-केतु की युति शापित योग से भी जानी जाती है, जो कि हानिकारक है आैर ये 2019 के दौरान मानवता पर गहरा तनाव के संकेत देती है।   

गुरू-शनि-केतु की युति से चौतरफा असंतुलन के संकेत
गुरू-शनि-केतु की युति व्यक्तिगत रूप से क्रमशः दो नकारात्मक संयोजन शनि-केतु शापित योग आैर गुरू-केतु चांडाल योग बनाती है। ये पहलू प्राकृतिक संसाधनों, सामान्य आैर राजनैतिक अस्थिरता आैर सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगड़ने के संकेत देता है, लेकिन गुरू का प्रभाव कुछ हद तक इन घटनाआें के हानिकर प्रभाव को कम कर सकता है। 

साथ ही, गुरू 6 फरवरी, 2017 से वक्री हो गया है। गणेशजी की सलाह है कि आपको ये अवश्य जानना चाहिए कि गुरू आपको किस तरह प्रभावित करें। इसके लिए पाए व्यक्तिगत गुरू गोचर रिपोर्ट 

लोकसभा चुनाव 2019 आैर शनि-केतु-गुरू का प्रभाव 
भारत की स्थापना कुंडली में, वृषभ उदित राशि है आैर शनि-केतु-गुरू का संयोजन आठवें भाव को प्रभावित करेगा। आठवां भाव आपदाआें, अशांति, आकस्मिक घटनाआें, रहस्य आैर विपत्तियों को सूचित करता है। इस कारण, कुछ गंभीर मसलें हाे सकते है आैर चुनावी प्रक्रिया अत्यधिक गंभीर मसला हो सकता है। 

अंतरराष्ट्रीय नीतियों के प्रति भारत का दृष्टिकोण 
इस पारगमन के दौरान मौजूदा सरकार के लिए हालात मुश्किल हो सकते है। जिस तरह शनि भारत की स्थापना कुंडली के नौवें आैर दसवें भाव का स्वामी है, एेसे में भारत की अंतरराष्ट्रीय नीतियों में कुछ बड़े बदलाव हो सकते है। इसके अलावा, सरकार आैर विपक्ष दोनों पक्षों के बीच रिश्ते बिगड़ सकते है।  

शनि का पारगमन आैर यूएसए  
गणेशजी के अनुसार जिस तरह यूएसए स्थापना कुंडली में शनि पांचवें भाव से गुजरेगा आैर आैर ग्यारवें भाव में स्थित ग्रहों के समूह पर दृष्टि डालेगा, एेसे में यूएसए में बहुत सारे बदलाव होंगे। इसके अलावा, 2019 के दौरान, राहु इस समूह के ऊपर से गोचर करेगा आैर शनि-केतु-गुरू की युति पांचवें भाव को प्रभावित करेगी। 

धनु में शनि का गोचर संरचनात्मक परिवर्तन का कारण होगा 
इस वर्ष के दौरान प्रबल संरचनात्मक परिवर्तन होते नजर आ रहे है आैर अन्य देशों के साथ महाशक्ति के संबंध प्रभावित हो सकते है। जो निर्णय लिए जा रहे है आैर जो नीतियां इस वर्ष लागू की गर्इ है उनका विभिन्न देशों पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।  

इस अवधि के दौरान अशांति आैर हंगामे के साथ ही नागरिक अशांति की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। ये काफी दिलचस्प चीज है कि यूएसएस आैर ट्रंप दोनों की कुंडली में सिंह उदित राशि है।  इस कारण, अाने वाले दिनों में ट्रंप नए कदम उठा सकते है। 

गणेशजी के आर्शीवाद सहित 
(स्पेशल इनपुटः अादित्य सांर्इं) 



15 Feb 2017


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