ऋषि पंचमी व्रत 2017: गणेशजी से जानें पूजा-विधान आैर महत्व के बारे में


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ऋषि पंचमी का पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनार्इ जाती है। कहते है ये व्रत सभी के लिए फलदायक होता है लेकिन महिलाएं इस व्रत को खासतौर से करती है। यह व्रत ऋषियों के पति श्रद्घा, कृतज्ञता, समर्पण आैर सम्मान की भावना व्यक्त करता है। इस व्रत को करने से अनजाने में हुए पापों का नाश होता है। इस बार यानि वर्ष 2017 में ऋषि पंचमी का व्रत 26 अगस्त को किया जाएगा। तो आइए जानते है गणेशजी से, ऋषि पंचमी के व्रत, कथा आैर पूजा विधि के बारे मेंः 

क्यूं किया जाता है ऋषि पंचमी का व्रतः

हिन्दू धर्म में किसी स्त्री के रजस्वला यानि पीरियड में हो जाने पर धार्मिक कार्यों आैर रसोर्इ सहित घरेलू कामों में शामिल होना और इससे जुड़ी वस्तुओं को छूना वर्जित माना जाता है। यदि भूलवश या किसी कारणवश इस अवस्था में उपरोक्त चीजों का उल्लंघन होता है तो इससे रजस्वला दोष उत्पन्न हो जाता है । आैर इस रजस्वला दोष को दूर करने के लिए ऋषि पंचमी का व्रत किया जाता है। 

ऋषि पंचमी को भाई पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। माहेश्वरी समाज में इसी दिन राखी बांधी जाती है। जिसमें बहन भाई की दीर्घायु के लिए व्रत रखते हुए पूजा करती है उसके बाद ही खाना खाती है। क्या आप ये जानने के लिए उत्सुक है कि इस वर्ष आपके कैरियर में किस तरह के उतार-चढ़ाव आएंगे। तो खरीदें 2017 कैरियर रिपोर्ट आैर अपने भविष्य को जानकर आने वाली चुनौतियों के लिए तैयारी रखें। 

ऋषिपंचमी व्रत कथाः

ऋषिपंचमी से जुड़ी कथा कुछ इस प्रकार है कि विदर्भ देश में एक ब्राह्मण अपनी पतिव्रता पत्नी के साथ निवास करता था। उसके परिवार में एक पुत्र व एक पुत्री थी। ब्राह्मण अपनी पुत्री का विवाह अच्छे ब्राह्मण कुल में करता है लेकिन कन्या का पति अकाल मृत्यु को प्राप्त होता है, और ब्राह्मण की कन्या विधवा हो जाती है। जिसके बाद वो अपने पिता के घर लौट आती है आैर वहीं अपना जीवन बसर करने लगती है। कुछ दिन गुजरने के बाद अचानक ब्राह्मण पुत्री के शरीर में कीड़े उत्पन्न होने लगते है़। अपनी कन्या के शरीर पर कीड़े देखकर माता पिता दुखी हो जाते हैं और पुत्री को ॠषि के पास ले जाते हैं। जहां ऋषि अपने ज्ञान से उस कन्या के पूर्व जन्म का पूर्ण विवरण जानकर ब्राह्मण दंपत्ति को बताते हैं आपकी कन्या पूर्व जन्म में ब्राह्मणी थी और इसने एक बार रजस्वला होने पर भी घर बर्तन इत्यादि छू लिये थे और काम करने लगी बस इसी पाप के कारण इसके शरीर पर कीड़े पड़ गये हैं। जबकि शास्त्र में लिखा है कि रजस्वला स्त्री को कार्य करना निषेध है। अपने पापों से मुक्त होने के लिए आपकी पुत्री ने इस जन्म में भी ऋषि पंचमी का व्रत नहीं किया है इसीलिए उसे ये कष्ट भुगतना पड़ रहा है। ऋषि ने  ब्राह्मण से कहा कि यदि आपकी पुत्री पूर्ण श्रद्घा भक्ति के साथ ऋषि पंचमी का व्रत करते हुए पूजा करें और क्षमा प्रार्थना करें तो उसे अपने पापों से मुक्ति प्राप्त हो जाएगी। ऋषि के वचन सुनकर कन्या ऋषि पंचमी व्रत करती है आैर उसे अपने पाप से मुक्ति प्राप्त होती है। क्या अाप ये जानना चाहते है कि इस  वर्ष आपके वित्तीय स्थिति कैसी रहेगी, तो हमारी फ्री 2017 वित्त रिपोर्ट का लाभ उठाकर सही मार्गदर्शन पाए। 


ऋषिपंचमी की पूजाविधिः 

स्नानादि करके शुद्ध वस्त्र धारण करें। अपने घर के स्वच्छ स्थान पर हल्दी, कुंकुम, रोली आदि से चौकोर मंडल बनाए। उस पर सप्तऋषि की स्थापना करें। साफ पानी और पंचामृत से स्नान कराएं। चन्दन का टीका करें। फूल माला व फूल अर्पित करें। यग्योपवीत पहनाए। सफ़ेद वस्त्र अर्पित करें। फल, मिठाई आदि का भोग लगाएं। अगरबत्ती धूप दीप आदि जलाएं। कर्इ स्थानों पर ये प्रक्रिया तालाब या नदी के तीर पर भी की जाती है। पूजा करने के बाद कर्इ जगहों पर महिलाएं या अनाज नहीं खाती। बल्कि पसर्इ धान के चावल खाती है। 

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25 Aug 2017


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