कुंडली के पांचवे भाव में मंगल का महत्व


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वैदिक ज्योतिष में मंगल को काल पुरूष का पराक्रम माना गया है। मंगल एक पुरूष प्रधान ग्रह है, जिसे उत्साह, साहस, शौर्य एवं शक्ति का कारक माना गया है। मंगल सूर्य की तरह अग्नि तत्व के ग्रह है, जिन्हे राशि चक्र या क्रांति वृत्त में मेष और वृश्चिक राशियों का स्वामी माना गया है। वहीं कुंडली के पांचवें भाव का संबंध विद्या, संतान, बुद्धि, विवेक, उदर, भविष्य, छात्र जीवन, दूरदृष्टि जैसे क्षेत्रों से होता है। जब मंगल अपने गुण, दोष और प्रभाव के साथ कुंडली के पांचवें भाव में मौजूद होते है तो जातक को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह से प्रभावित कर सकते है।
कुंडली के पांचवे भाव में मंगल जातक को उत्साही, गतिशील, रचनात्मक और बुद्धिमान बना सकता है। कुंडली के पांचवे भाव में मंगल की मौजूदगी जातक को अधिक क्रोध, आक्रामक और विघटनकारी भी बना सकती है। किसी कुंडली के पांचवे भाव में मंगल की मौजूदगी जातक को सकारात्मक व नकारात्मक दोनों ही तरह से प्रभावित कर सकती है। पांचवें भाव में मंगल जातक की छुपी हुई प्रतिभाओं को निखार सकता है। वह उन्हे जिम्मेदार और निष्काम भाव से अपने कार्यो के प्रति जिम्मेदार बनाता है। ऐसे जातकों में बच्चों जैसी भावनाएं होती है और वे खेल में बहुत रूचि दिखाते है। पांचवें स्थान पर मंगल वैवाहिक जीवन के लिए लाभकर या दुष्कर हो सकता है। पांचवें घर में अनुकूल परिस्थिति में मंगल जातक के वैवाहिक जीवन में रोमांस, प्रेम, आपसी समझ और सम्मान पैदा कर सकता है। ऐसे जातक अपने दांपत्य जीवन का भरपूर आनंद ले सकते है। 

सकारात्मक

कुंडली के पांचवे भाव में मंगल जातक के जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। परंतु मंगल से संबंधित कुछ क्षेत्रों में इस संयोजन का अधिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। कुंडली के पांचवें भाव में मंगल जातक की रचनात्मकता, वैवाहिक जीवन, भौतिक सुख, बुद्धि, बच्चे और प्रेम संबंधों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। कुंडली में उसके सकारात्मक या सुप्रभावों की बात करें तो पांचवे भाव में अन्य ग्रहों के अनुकूल परिस्थिति में बैठे मंगल जातक के जीवन को उत्साह से भरने का कार्य करते है। वे जातक को ऊर्जावान, गतिशील और जिम्मेदार बनाने का कार्य करते है। ऐसे जातक धार्मिक प्रवृत्ति रखते है और सकारात्मक जीवन जीते है। उनमें अपने से बड़े और वरिष्ठ लोगों के प्रति सम्मान और प्रेम का दृष्टिकोण होता है। वे परिवार, समाज और वरिष्ठ जनों के लिए गहरा प्रेम रखते है। ऐसे जातक अपने परिवार, मित्र और परिचित व्यक्तियों की आर्थिक व नैतिक दोनों ही तरह से सहायता से कभी पीछे नहीं हटते। पांचवें भाव में मंगल के अनुकूल प्रभाव जातक को शारीरिक रूप से हष्ठ-पुष्ठ और तंदरूस्त बनाने का कार्य करते है। ऐसे जातक अतीत में जीने की जगह निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करते है। ऐसे जातक खेल-कूद, शारीरिक रूप से दक्ष, रचनात्मक व बुद्धिशाली होते है। 
पांचवे भाव में मंगल जातक को विपरीत लिंगी के प्रति झुकाव प्रदान करते है। जिसके प्रभाव में जातक प्रेम संबंधों के प्रति उत्सुक हो जाता है। मंगल के सकारात्मक प्रभाव में जातक खुद को रचनात्मक रूप से व्यक्त करने की क्षमता रखते है। वे अपने प्रेम संबंधों को बड़ा महत्व देते है। हालांकि वे अपने निर्धारित लक्ष्यों के प्रति एकदम स्पष्ट और दृढ़ निश्चय रखते है। मंगल उन्हे रचनात्मक कौशल प्रदान करते और उनकी बुद्धि को साकारात्मक रूप से प्रभावित करते है। मंगल उन्हे अप्रत्याशित रूप से आर्थिक लाभ पहुंचा सकते है। पांचवें भाव में मंगल की अनुकूल परिस्थिति जातक को समृद्धि, सौभाग्य, आशा और उम्मीद प्रदान करती है। 

नकारात्मक

कुंडली के पांचवें भाव में अनुकूल परिस्थिति में बैठे मंगल जहां सकारात्मक प्रभावों का विस्तार करते है। वहीं प्रतिकूल परिस्थिति या नीच होने पर जातक पर दुष्प्रभाव भी डाल सकते है। यदि पांचवें भाव में बैठे मंगल का किसी विरोधी ग्रह से कोई संबंध बन रहा हो अथवा राशि के आधार पर नीच का हो तब भी पांचवें भाव से नकारात्मक प्रभाव प्राप्त होने की संभावना अधिक है। उपरोक्त परिस्थिति में मंगल जातक पर नकारात्मक दुष्प्रभाव डाल सकते है, उन्हे लापरवाह, आक्रामक और अपमानजनक बना सकते है। वे अपनी शांत प्रवृत्ति खो देते है और मूर्खतापूर्ण चीजों पर गुस्सा करते है। जिसके परिणाम स्वरूप जातक अपनी रचनात्मकता और बुद्धिमत्ता खोने लगते है। पांचवें भाव में मंगल की नकारात्मक स्थिति में जातक अपने प्रेम संबंधों में गंभीर विवाद करने की संभावना रखते है, जिससे परिणाम स्वरूप उन्हे अपने साथी को खोना भी पड़ सकता है। मंगल के प्रतिकूल प्रभावों में जातक अपने साथी से दूरी बनाने का प्रयास करता है। 
अपने विघटनकारी व्यवहार के कारण ये जातक नैतिक मूल्यों को खो सकते है और अनैतिक बन सकते है, जो उनके प्रेम संबंधों में भी समस्या पैदा कर सकता है। यदि ऐसा कहा जाये कि पांचवें भाव में मंगल के प्रतिकूल होने पर जातक किसी भी प्रकार के रिश्ते को संभालने की क्षमता खो सकते है। पांचवें भाव में मंगल के प्रतिकूल प्रभाव जातक को असंवेदनशील और गैरजिम्मेदार बनाने का कार्य कर सकते है। जब मंगल कुंडली के पांचवे स्थान पर प्रतिकूल परिस्थितियों में मौजूद होते है तब वह उनकी विचार प्रक्रिया व कामुक सुखों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। 

निष्कर्ष

वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली में मंगल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जन्म कुंडली में इसकी अहमियत और भी अधिक हो जाती है। अग्नि तत्व और पुरूष संज्ञक होने के कारण मंगल जातक को नकारात्मक व सकारात्मक दोनों ही तरह से प्रभावित कर सकता है। पांचवे भाव में मंगल जातक को रचनात्मक, बुद्धिमान, रोमांटिक और प्रेमपूर्ण बनाने का कार्य करता है। लेकिन पांचवें भाव में प्रतिकूल परिस्थितियों में बैठे यही मंगल जातक को स्वार्थी, अपमानजनक और आक्रामक बनाने के लिए भी जिम्मेदार होते है। पांचवें भाव में मंगल  के प्रभावों संतुलित करने के लिए जातक को अपने व्यवहार को नियंत्रित करना चाहिए। उन्हे अपने प्रेम संबधों और वैवाहिक जीवन के प्रति भी सावधान रहने का प्रयास करना चाहिए।

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गणेशजी की कृपा से,
गणेशस्पीक्स.कॉम टीम


03 Jun 2020


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