धनु राशि में एक साथ इकठ्ठे हो रहे गुरू, मंगल और केतु, जानिए अपनी राशि पर महासंयोग के प्रभाव


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खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से साल 2020 बेहद खास रहने वाला है। इस वर्ष सौरमंडल के लगभग सभी 9 ग्रह अपनी राशि परिवर्तित करने वाले हैं। दिसंबर 2019 से जनवरी 2020 तक प्रभावी रही पांच ग्रहों की महायुति के विघटन के बाद 8 फरवरी 2020 को साल की बेहद ही महत्वपूर्ण और प्रभावी महायुति बनने वाली है। मौजूदा परिस्थिति में केतु और गुरू, धनु राशि में एक साथ बैठे हैं, लेकिन 8 फरवरी को मंगल के धनु गोचर 2020 के साथ ही यह स्थिति और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है।

धनु राशि में ग्रहों की स्थिति

केतु – जातक को परिश्रम और मेहनत के दम पर उन्नति और वृद्धि प्रदान करने वाला केतु एक मंद छाया ग्रह है। केतु लगभग 18 महीने एक ही राशि में भ्रमण करने के बाद राशि परिवर्तन करते हैं। मौजूदा परिस्थिति में केतु, धनु राशि में भ्रमण कर रहे हैं। केतु ने 23 मार्च 2019 को वृश्चिक से धनु में प्रवेश किया था, और आगामी समय में 23 सितंबर तक वे धनु में ही भ्रमण करेंगे।

गुरू – कुंडली में गुरू को अमृत के समान माना गया है, ज्ञान और सौभाग्य प्रदान करने वाले गुरू ने 3 नवंबर 2019 को राशि परिवर्तन कर धनु राशि में प्रवेश किया था। एक राशि के भ्रमण में लगभग एक साल से तेरह महीनों का समय लेने वाले गुरू, 30 मार्च 2020 को मकर में प्रवेश करेंगे और वक्री होते हुए 30 जून को पुनः धनु में प्रवेश करेंगे।

मंगल – शौर्य और पराक्रम के स्वामी मंगल का 8 फरवरी 2020 को धनु में गोचर हो रहा है। मंगल फिलहाल अपनी स्वराशि वृश्चिक में भ्रमण कर रहे हैं। लेकिन 8 फरवरी को धनु में गोचर के साथ ही मंगल का गुरू और केतु के साथ संयोजन होने वाला है। केतु, गुरू और मंगल की महायुति के कारण राशिचक्र की तमाम राशियों में उठा-पटक का दौर शुरू हो जायेगा।

महायुति की समयावधि

अग्नि तत्व की राशि धनु में 8 फरवरी 2020 को मंगल के प्रवेश के साथ ही केतु, गुरू और मंगल की महायुति की शुरूआत होने वाली है। मंगल, गुरू और केतु की महायुति 2020, 8 फरवरी से शुरू होकर 21 मार्च तक धनु में प्रभावी रहने वाली है। इस दौरान राशिचक्र की तमाम राशियों पर इस महायुति के शुभ-अशुभ प्रभाव देखने को मिलेंगे। महायुति की इस अवधि में कुछ राशियों को सकारात्मक वहीं कुछ को इसके दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ेगा।

मेष राशि पर महायुति का प्रभाव

चंद्र राशि मेष की कुंडली के नौवें भाव में बन रही मंगल, गुरू और केतु की महायुति मेष राशि जातकों को मिले-जुले परिणाम देने वाली है। इस दौरान करियर में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे। इस दौरान आप नौकरी के सिलसिले में लंबी-लंबी यात्राएं कर सकते हैं। इस अवधि के दौरान नौकरी में आपका स्थानांतरण या परिवर्तन भी हो सकता है। अपने पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। प्रेम और वैवाहिक संबंधों में कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। व्यापार व्यवसाय के लिए यह अवधि प्रतिकूल दिखाई देती है।

वृषभ राशि पर महायुति का प्रभाव

चंद्र राशि वृषभ की कुंडली के आठवें भाव में बन रहा मंगल, गुरू और केतु का महा संयोजन वृषभ राशि जातकों के जीवन में कई शुभ-अशुभ बदलाव लेकर आने वाला है। कुंडली का आठवां भाव आयुष्य या मृत्यु भाव होने के कारण आयुष्य, मृत्यु, विरासत, दुर्घटना, भयंकर नुकसान, वैराग्य, आत्महत्या, अप्रत्याशित मौत, हार, भूमि गत धन, और लंबी बीमारी से संबंध रखता है। गुरू, मंगल और केतु की महायुति वृभष राशि जातकों पर करियर के दृष्टिकोण से औसत प्रभाव डालने वाला है, वहीं व्यापार-व्यवसाय की बात करें तो यह संयोजन स्वमेहनत के बल पर ही लार्भाजन की ओर इशारा करता है। प्रेम एवं वैवाहिक जीवन में भी कुछ प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलेंगे, इस दौरान आपको अपने साथी की भावनाओं का ख्याल रखते हुए उनके दृष्टिकोण को भी समझने की कोशिश करनी चाहिए। स्वास्थ्य के लिहाज़ से दौर औसत रहने वाला है, आपको खाने-पीने की आदतों में सुधार करने की जरूरत है।

मिथुन राशि पर महायुति का प्रभाव

चंद्र राशि मिथुन की कुंडली के सातवें भाव में बन रहा केतु, गुरू और मंगल का संयोजन मिथुन राशि जातकों के जीवन में कई बदलाव लेकर आने वाला है। कुंडली का सातवां भाव कलत्र स्थान होकर पति, पत्नी, हिस्सेदार, दांपत्य सुख, कोर्ट-कचहरी, ग्राहक, जनता और साझेदारी व्यापार से संबंध रखता है। इस दौरान करियर में आपको किसी भी तरह के वाद-विवाद से बचने की कोशिश करनी चाहिए। व्यापार-व्यवसाय के लिहाज से भी यह दौर काफी जटिल साबित होने वाला है, इस दौरान आपको अपने कर्मचारियों या साझेदारों से संबंध मधुर करने की कोशिश करनी चाहिए। मंगल, गुरू और केतु के संयोजन से मिथुन राशि जातकों के प्रेम संबंधों में सकारात्मक बदलाव नजर आते है। इस चरण के दौरान आपके प्रेम संबंधों में अधिक स्पष्टता आएगी और सारे संदेह धीरे-धीरे खत्म हो जाएगें। इससे आपको अपने प्रेम संबंधों को अगले स्तर पर लेकर जाने में सहायता मिलेगी। निजी जीवन या वैवाहिक जीवन में इस महायुति के मिले-जुले परिणाम देखने को मिलेंगे, इस दौरान किसी तरह के घरेलू विवाद की भी संभावना है।

कर्क राशि पर महायुति का प्रभाव

चंद्र राशि कर्क की कुंडली के छठे भाव में तैयार हो रही गुरू, मंगल और केतु की महायुति कर्क राशि जातकों को जीवन के कुछ क्षेत्रों में परेशान करने वाली है। कुंडली का छठा भाव शत्रु भाव होकर पीड़ा, भय, रोग की अवधि, शत्रु, दैनिक कार्य, नौकरी, बीमारी, कर्ज और नौकरी में परेशानी जैसे क्षेत्रों से संबंध रखता है। मंगल, गुरू और केतु की इसी भाव में महायुति बनने से करियर के क्षेत्र में मुश्किलें बढ़ती नजर आती हैं। कुंडली के छठे भाव में ग्रहों की यह स्थित आपको भ्रमित करने का काम कर सकती है। आप भावनात्मक रूप से परेशान और तनाव में रह सकते हैं। प्रेम संबंधों की बात करें तो इस दौरान आप अपने प्रेमी या साथी के प्रति प्रतिबद्धता का एहसास करेंगे। ग्रहों की महायुति के दौरान अपने शब्दों का चुनाव बेहद सावधानी से करें, इस दौरान आप अपनी कटाक्ष भरी बातों से अपने रिश्तों को खराब कर सकते है।

सिंह राशि पर महायुति का प्रभाव

चंद्र राशि सिंह की कुंडली के पांचवें भाव में तैयार हो रहा तीन ग्रहों का महासंयोग, सिंह राशि जातकों के जीवन के प्रमुख क्षेत्रों को प्रभावित करने वाला है। कुंडली का पांचवां भाव संतान या विद्या स्थान होकर संतान का व्यवहार, संतान जन्म, संतान सुख, तंत्र-मंत्र, विद्या, ज्ञान, गूढ़ ज्ञान, उपासना, सट्टा, जुआ, लाॅटरी, कौशल, प्रेम संबंध, और वैभव जैसे क्षेत्रों से संबंध रखता है।

सिंह कुंडली के पांचवें भाव में तैयार हो रही मंगल, गुरू और केतु की महायुति सिंह राशि जातकों के जीवन में आमूलचूल बदलाव लेकर आने वाली है। इस दौरान प्रेम संबंधों के मोर्चे पर आप अपने रिश्तों को अगले स्तर की ओर बढ़ता पाएंगे। इस दौरान आप प्रेफेशलन और व्यक्तिगत जीवन में अधिक बेहतर ढंग से सामंजस्य बैठा पाएंगे। इस अवधि के दौरान व्यापार-व्यवसाय से जुड़े जातकों को धैर्य और सावधानी बरतने की आवश्यकता है। इस दौरान व्यापार-व्यवसाय से अधिक लाभ होते नजर नहीं आता जिससे मुनाफ़े के घटने की भी संभावना है। करियर या नौकरीपेशा लोगों को इस महायुति से मिलेजुले प्रभाव ही मिलने की संभावना है, इस दौरान आपको अपने कार्यस्थल पर अधिक मान्यता मिलने वाली है। मंगल, गुरू और केतु की महायुति के प्रभाव में आप अपनी छुपी हुई क्षमताओं का पूरा उपयोग करने वाले हैं।

कन्या राशि पर महायुति का प्रभाव

अग्नि तत्व की राशि धनु में बनने जा रही मंगल, गुरू और केतु की महायुति, चंद्र राशि कन्या की कुंडली के चौथे भाव में स्थित है। कुंडली का चौथा भाव सुख स्थान होकर माता, सुख, मकान, वाहन, मिल्कियत, ज़मीन, तृष्णा, लालसा, महत्वाकांक्षा और अचल संपत्ति से संबंध रखता है।

मंगल, गुरू और केतु की महायुति कन्या राशि जातकों के करियर पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली है। इस दौरान आपको अपने कौशल और बुद्धिमत्ता का धैर्य के साथ उपयोग करते हुए, करियर में आगे बढ़ने के प्रयास करने चाहिए। मंगल, गुरू और केतु की यह महायुति व्यापार-व्यवसाय के मोर्चे पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती नजर आती है। इस दौरान आपको व्यापार-व्यवसाय में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है, आपके लाभ कम होने की संभावना नजर आती है। इस दौरान निवेश के लिए लोन या उधार लेने से भी परहेज करें। प्रेम संबंधों में अपने रिश्ते को निरंतरता प्रदान करने के लिए आपको अपने साथी पर अपने विचार थोपने से बचना चाहिए। वैवाहिक और निजी जीवन में भी आपको अपने साथी या अन्य लोगों के दृष्टिकोण का सम्मान करने की सलाह है।

तुला राशि पर महायुति का प्रभाव

चंद्र राशि तुला की कुंडली के तीसरे भाव में तैयार हो रहे मंगल, गुरू और केतु के महासंयोजन का तुला पर मिला-जुला प्रभाव देखने को मिलेगा। कुंडली का तीसरा भाव पराक्रम स्थान के नाम से जाना जाता है और मंगल, गुरू और केतु का संयोजन इसी भाव में होने जा रहा है। कुंडली के तीसरे भाव का संबंध साहस, धैर्य, पराक्रम, दोस्त, छोटे भाई, लघु प्रवास, ट्रांसपोर्ट, दलाली और महत्वपूर्ण फेरबदल से होता है।

गुरू, मंगल और केतु का महासंयोग तुला राशि पर औसत प्रभाव डालने वाला है। इस दौरान करियर से जुड़े क्षेत्रों में आप अपने कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर पाएंगे। हालांकि इस दौरान अधिकतम परिणाम प्राप्त करने के लिए आपको अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता होगी। व्यापार, व्यवसाय के क्षेत्र में आपको नीतिगत फ़ैसलों से बचना चाहिए और दूसरों के विचारों का सम्मान करना चाहिए। अपने साझेदार या सहकर्मियों के विचारों को गंभीरता से सुने और समझने की कोशिश करें। प्रेम के मोर्चे पर आपका व्यवहारिक दृष्टिकोण आपके लिए मददगार साबित होने वाला है। हालांकि इस दौरान कुछ मामलों में साथी से विवाद होने की भी संभावना है। ग्रहों के इस महासंयोजन के प्रभावों में आप अधिक भावनात्मक महसूस करने वाले है, और आपकी भावनाएं आपको कई तरह की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष स्थित के बारे में विचार करने को मजबूर करने वाली हैं। इस दौरान आपको मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ्य को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।

वृश्चिक राशि पर महायुति का प्रभाव

अग्नि तत्व की राशि धनु में गुरू, मंगल और केतु का महासंयोग चंद्र राशि वृश्चिक की कुंडली के दूसरे भाव में घटित होने वाला है। कुंडली का दूसरा भाव धन अथवा कुटुंब स्थान के नाम से जाना जाता है, इसका संबंध जातक के जीवन में धन, चल-अचल संपत्ति, कुटुंब, वाणी, वंश, धन का संग्रह, लत, व्यापार, विरासत संपत्ति, लाभ-हानि और महत्वाकांक्षा से होता है।

वृश्चिक कुंडली के दूसरे भाव में बन रहा मंगल, गुरू और केतु का महासंयोग वृशिचक राशि जातकों के जीवन में कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आने वाला है, इस दौरान आपके पास अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए ऊर्जा के साथ ही नए विचार और योजनाएं हो सकती हैं। आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। व्यापार, व्यवसाय के दृष्टिकोण से औसत परिणाम मिलने की संभावना है, शेयर बाजार में सीमित निवेश फालकारी हो सकता है, लेकिन सावधानी बरतने की सलाह भी है। तीन ग्रहों के महासंयोग का प्रभाव आपके प्रेम संबंधों पर भी दिखाई देगा, इस दौरान आपकी आपसी समझ में इज़ाफा होगा और आप दोनों के बीच एक भावनात्मक बंधन तैयार होगा, हालांकि रिश्ते में धीमी वृद्धि आपको हताश भी कर सकती है। मंगल, गुरू और केतु की महायुति के दौरान वैवाहिक और निजी जीवन में आपको सकारात्मक परिणाम मिलेंगे इस दौरान आपका अपने परिवार के प्रति झुकाव बढ़ेगा और आप पारिवारिक कार्यक्रमों में अधिक तत्पर्ता के साथ शामिल होंगे।

धनु राशि पर महायुति का प्रभाव

अग्नि तत्व की राशि धनु में ही मंगल, गुरू और केतु की महायुति का निर्माण हो रहा है। चंद्र राशि धनु की कुंडली के पहले भाव में बन रहा तीन बलवान ग्रहों का महासंयोग धनु राशि जातकों के जीवन के प्रमुख क्षेत्रों को प्रभावित करने वाला है।

धनु राशि में तैयार हो रहे मंगल, गुरू और केतु के महासंयोग के कारण धनु राशि जातकों को आत्मविश्वास में वृद्धि होती दिखाई देती है। हालांकि इस दौरान आपका अपने सहकर्मी या उच्च अधिकारियों से वाद-विवाद या बहस हो सकती है। व्यापार-व्यवसाय पर इस गोचर के स्पष्ट प्रभाव नजर नहीं आते अतः यह स्थिति अधिक खतरनाक है, सावधानी बरतने की सलाह है। इस दौरान प्रेम, विवाह और निजी जीवन में आपको अपने साथी या परिजनों पर रौब जमाने से बचना चाहिए, और इन खास लोगों से अधिक आपको स्वयं से उम्मीद करनी चाहिए। इस महायुति के प्रभाव से आप ऊर्जावान रहेंगे, लेकिन इस अतिरिक्त बल के कारण आप कभी-कभी अपना धैर्य भी खोने वाले हैं। इसलिए सावधान रहें और धैर्य बनाए रखें।

मकर राशि पर महायुति का प्रभाव

चंद्र राशि मकर की कुंडली के बारहवें भाव में तैयार हो रहे मंगल, गुरू और केतु के महा संयोग से मकर राशि जातकों को करियर से जुड़ी कुछ नकारात्मक परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। इस दौरान आपका अपने उच्च अधिकारियों से वाद विवाद भी हो सकता है। हालांकि व्यापार, व्यवसाय के संबंध में मंगल, गुरू और केतु का संयोजन मकर राशि जातकों के लिए लाभकारी और फलदायी होने वाला है। इस दौरान अपने व्यवसाय पर पकड़ मजबूत करने की जरूरत भी है। इस अवधि के दौरान प्रेम संबंधों को पुनः बल मिलने की संभावना है, आपको अपने रिश्ते को जीवंत करने के लिए एक नए सिरे से शुरूआत करने के लिए यह समय एक दम उचित है। मंगल, केतु और गुरू की महायुति आपको भावनाओं में अभिभूत करने का काम करेगी लेकिन आपको इसका प्रतिरोध करते हुए, उस लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए जिसे आप प्राप्त करना चाहते है।

कुंभ राशि पर महायुति का प्रभाव

अग्नि तत्व राशि धनु में मंगल, गुरू और केतु की महायुति चंद्र राशि कुंभ की कुंडली के ग्यारहवें भाव में तैयार हो रही है। इस दौरान आपको अपनी आक्रामकता पर नियंत्रण रखना चाहिए और अपने करियर से संबंधित सभी पहलुओं को धैर्य और समझदारी से संभालना चाहिए। व्यापार में लाभ प्राप्त करने के लिए आपको बाजार के रूझानों का ध्यान रखना होगा। प्रेम और निजी जीवन में निरंतरता बनाए रखने के लिए आपको अपने अहंकार और वाणी का संयम अपनाना होगा। घर या प्रेम संबंधों में किसी भी प्रकार के बदलावों के पहले अपने साथी या परिजनों के साथ विचार विमर्श करें, अन्यथा इससे आपको परिवार या साथी के प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है।

मीन राशि पर महायुति का प्रभाव

राशिचक्र की अंतिम राशि मीन में मंगल, गुरू और केतु का संयोजन आप से दैनिक कार्यों में धैर्य और समर्पण की मांग करता है। इस दौरान आपको कड़ी मेहनत करनी होगी और अधिक ज़िम्मेदारी लेनी होगी। व्यापार, व्यवसाय से सुचारु रूप से लाभ प्राप्त करने के लिए आपको कुछ चुनौतियों से निपटना होगा और कुछ अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। प्रेम, वैवाहिक और निजी जीवन में भी कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान प्रेम संबंध के भविष्य को लेकर आपके मन में कुछ संदेह और असुरक्षाएं रहने वाली हैं। इस दौरान आपको प्रतिबद्ध रहते हुए धैर्य रखने की आवश्यकता है। निजी या वैवाहिक जीवन में सार्थक वार्तालाप और सहयोग का अनुसरण करना लाभकारी होगा, नए सामाजिक संपर्क बनाना फायदेमंद हो सकता है।

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गणेश की कृपा से,
गणेशस्पीक्स.कॉम टीम

31 Jan 2020


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