चंद्र राशि कर्क कुंडली के छठे भाव में बन रहा मंगल, गुरू और केतु का समूह, ऐसे करेगा प्रभावित


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धनु राशि में मंगल, गुरू और केतु के गोचर के साथ ही राशिचक्र की तमाम राशियों पर इस महासंयोग के परिवर्तित प्रभावों की शुरूआत होने वाली है। इस दौरान मंगल, गुरू और केतु के संयुक्त प्रभाव राशियों पर देखने को मिलेंगे। गणेशास्पीक्स के अनुभवी ज्योतिषीयों की टीम ने गुरू, मंगल, और केतु के धनु में समायोजन का राशिचक्र की सभी राशियों पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्यन किया है। फिलहाल हम जल तत्व राशि कर्क पर मंगल, गुरू और केतु के समायोजन का प्रभाव जानेंगे।

कर्क जल तत्व की ब्राह्मण वर्ण की स्त्री संज्ञक, बहुपाद, सम, पृष्ठोदय, रात्रि बलि व चर स्वभाव की राशि है। कर्क के छठे भाव में केतु, मंगल और गुरू का समायोजन हो रहा है। वैदिक ज्योतिष में मंगल को अग्नि तत्व का ग्रह मानकर काल पुरूष के पराक्रम का प्रतीक माना गया है। गुरू आकाश तत्व का ग्रह है, और इसे काल पुरूष की बुद्धि की संज्ञा दी गई है, वहीं केतु एक छाया ग्रह होकर वायु तत्व से संबंध रखता है। तीन अलग-अलग गुणों वाले ग्रहों का अग्नि तत्व की राशि धनु में समायोजन से जल तत्व की राशि कर्क पर इसके प्रभाव गहरे और महत्वपूर्ण हो जाते है।


करियर

चंद्र राशि कर्क कुंडली के छठे भाव में एकत्र हो रहे गुरू, केतु, और मंगल के कर्क जातकों के जीवन के सभी क्षेत्रों में गहरे प्रभाव देखने को मिलेंगे। इन तीनों ग्रहों का समायोजन कुंडली के शत्रु भाव में हो रहा है। इस भाव का संबंध जीवन की पीड़ा, रोग की अवधि, और नौकरी जैसी चीजों से होता है। करियर की बता करें तो इस दौरान आपको दूसरों के मामलों में शामिल होने से बचना चाहिए। अपने वरिष्ठ या उच्च अधिकारियों के सामने कोई बयान न दें, ऐसा करने से आपके अधिकारी या बाॅस के आत्म सम्मान या अहंकार को ठेस पहुंच सकती है। आपके इस तरह के बर्ताव से आपके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती है और आपको कुछ समय के लिए असहयोग के रूप में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

व्यापार-व्यवसाय

कर्क कुंडली के छठे भाव में घटित हो रहे इस महासंयोजन के कारण आपको व्यापार व्यवसाय के मोर्चे पर अपने शब्दों का बहुत तोलमोल के उपयोग करना चाहिए। आपको इस दौरान सफलता की उम्मीद करते हुए अपनी ओर से ठोस और गंभीर प्रयास करने चाहिए, ताकि पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। इस समयावधि के दौरान आपके लिए बेहतर होगा कि आप अपने समय का इंतजार करें और अपने लिए एक बेहतर नीति तैयार करें।

प्रेम संबंध

कर्क कुंडली के छठे भाव में तैयार हो रहे गुरू, मंगल और केतु के इस महासंयोजन का कर्क राशि जातकों के प्रेम संबंध पर अनुकूल प्रभाव देखने को मिलेगा। इस दौरान अपने प्रेम संबंधों में आप अपने साथी के प्रति अधिक प्रतिबद्धता का अहसास करेंगे। इस दौरान आपका रिश्ता रोमांटिक और ऊर्जावान बना रहेगा। इस समयावधि में आप उन चीजों से छुटकारा पाने की कोशिश करेंगे जो  आपको आपका जीवन उत्साह और उमंग से जीने से रोकने का प्रयास कर रही हैं।


निजी और वैवाहिक जीवन

निजी और वैवाहिक जीवन पर मंगल, गुरू और केतु के संयुक्त प्रभावों का आंकलन करने पर पता चलता है कि, इस दौरान आप अपने दम पर जितना हो सके करने की कोशिश करेंगे। लेकिन इस दौरान परिवार और वैवाहिक जीवन की निरंतरता के लिए आपके प्रयास कमतर महसूस होते है। इस दौरान अपने परिवार, जीवन साथी या किसी अन्य को अपने दृष्टिकोण या विचारों पर सहमत करने की कोशिश न करें। ऐसा करने से आपके निजी, वैवाहिक और सामाजिक जीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना है।

स्वास्थ्य

कुंडली का छठा भाव सीधे तौर पर रोग और उसकी अवधि से संबंध रखता है। कर्क कुंडली के छठे भाव में ही मंगल, गुरू और केतु का महासंयोजन होने वाला है, इसका सीधा और सरल अर्थ है कि इस अवधि में आपके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने वाले है। इस दौरान आपको कुछ भी ऐसा  करने से बचना चाहिए जिससे आपके पुराने दर्द या कोई बीत चुकी स्वास्थ्य समस्या आपको पुनः परेशान न करे।

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गणेश की कृपा से,
गणेशस्पीक्स.कॉम टीम

03 Feb 2020


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