कार्तिक पूर्णिमा 2020 की तारीख, व्रत कथा और महत्व


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कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा या कार्तिक पूनम कहा जाता है। हिंदी माह कैलेंडर के अनुसार हर महीना पंद्रह – पंद्रह दिनों के दो भागों में बाटां गया है, जिन्हे शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के नाम से जाना जाता है। कृष्ण पक्ष चंद्रमा के घटते क्रम के पंद्रह दिन होते हैं, जिनका आखिरी दिन अमावस्या कहलाता है, वहीं शुक्ल पक्ष के पंद्रह दिनों में चंद्रमा के आकार में लगातार वृद्धि होती है। शुक्ल पक्ष का अंतिम दिन पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। एक साल में कुल बारह पूर्णिमा आती है और सनातन धर्म में इन सभी पूर्णिमा को किसी ना किसी त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। कार्तिक के माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। इस पूर्णिमा का धार्मिक तौर पर बहुत महत्व है। माना जाता है इस दिन देव दिवाली होती है। कार्तिक पूर्णिमा देव देव दीवाली, गुरू नानक जयंती और त्रिपुरा पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गंगा स्नान, दीपदान, हवन-यज्ञ तथा पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। 

2020 में कार्तिक पूर्णिमा कब है?


साल 2020 एक अधिक मास है, इस कारण साल 2020 में नवरात्रि, दशहरा, दीपावली सहित सभी महत्वपूर्ण त्यौहार एक महीने आगे बढ़ गए है। इसी कारण इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा की तिथि भी एक महीने की देरी से आने वाली है। 

कार्तिक पूर्णिमा 2020 तिथि – 30 नवंबर, सोमवार 2020

सूर्य उदय और चंद्र गति के आधार पर साल 2020 में कार्तिक पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 29 नवंबर को दोपहर 12ः47 मिनट पर होगी और कार्तिक पूर्णिमा तिथि 2020, 30 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार कार्तिक पूनम 2020, 30 नवंबर के दिन मनाई जाएगी। 

कार्तिक पूर्णिमा की कथा

ऐसा माना जाता है कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक असुर का संहार किया था, इसी कारण वे त्रिपुरारी के रूप में पूजे जाने लगे। इसीलिए कई जगह इसे ‘त्रिपुरा पूर्णिमा’ भी कहा जाता है। इस दिन जो भक्त भोलेनाथ की पूजा करते हैं, वे मनुष्य जीवन के चारों फलों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्राप्त करते हैं। ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन सभी देवता पृथ्वी पर आते है और अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। इस खास मौके पर कई गांवों और शहरों में बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन किया गया दान सौ अश्वमेघ यज्ञ के समान फल देता है।  


कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है, कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा, नर्मदा या किसी पवित्र नदी या किसी जल कुंड में स्नान कर दीपदान, दान, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है।  कार्तिक पूर्णिमा के दिन किए गए दान पुण्य कार्यों का फल सामान्य से कई गुना अधिक प्राप्त होता है। कार्तिक पूर्णिमा या देव दिवाली पांच दिवसीय त्यौहार है जिसकी शुरुआत देवउठनी ग्यारस / देवोत्थान ग्यारस से होती है। तुलसी विवाह या प्रबोधिनी ग्यारह का अगला दिन भीष्म पंचक के नाम से जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के एक दिन पहले अर्थात चतुर्दशी के दिन वैकुंठ चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है, इस दिन भगवान विष्णु के प्रति आस्था के तौर पर उपवास का महत्व है। अंतिम दिन है, कार्तिक पूर्णिमा इस दिन को देव विजय के रूप में देव दीपावली या देव दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने देवताओं को त्रिपुर रक्षस के भय से मुक्ति दिलाई थी इसीलिए इस दिन को देवता दीपावली की तरह मनाते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा व्रत विधि

सनातन धर्म में पूर्णिमा के दिन को विशेष मान्यता प्राप्त है, इस दिन को दान धर्म और मांगलिक कार्यों के लिए विशिष्ट माना गया है। इसी क्रम में कार्तिक की पूर्णिमा को अन्य सभी पूर्णिमा से अधिक फलदायी और महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन के लिए कुछ विशेष विधि विधानों का भी उल्लेख किया गया है, जिनको धारण करने से जातक को धरती लोक पर सभी सुख और मृत्यु उपरांत वैकुंड धाम की प्राप्ति होती है।

कार्तिक पूर्णिमा पर क्या करना चाहिए


– इस दिन जातक को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी या कुंड में स्नान करना चाहिए, और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।
– इसके बाद शिव व विष्णु की आराधना करनी चाहिए, संभव हो तो रुद्राभिषेक या सत्यनारायण की कथा का आयोजन करना चाहिए। 
– इस दिन चंद्रोदय पर शिवा, संभूति, संतति, अनुसुइया और क्षमा इन सभी कृतिकाओं का पूजन अवश्य करें। 
– कार्तिक पूर्णिमा का व्रत धारण कर रात्रि के समय बैल दान करने से शिव की समीपता प्राप्त होती है।
– इस दिन व्रत धारक को जरूरतमंद को भोजन अवश्य करना चाहिए।
– गाय, हाथी, घोड़ा, रथ और घी के दान से संपत्ति में इजाफा होता है।
– इस दिन भेड़ का दान करने से नकारात्मक ग्रह संयोग के कष्टों से मुक्ति मिलती है। 
– कार्तिक पूर्णिमा के दिन व्रती को शाम के समय किसी बहती हुई नदी में दीपदान करना चाहिए।
 

कार्तिक पूर्णिमा की परम्पराएं

* पास के किसी पवित्र नदी में डुबकी लगाएं। 
* नकद दान दें या फिर विभिन्न धर्मार्थ संगठनों में दान करें। 
* घर में और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं। 
* सत्यनारायण कथा का आयोजन करें और इसमें शामिल होने के लिए सभी पड़ोसियों और दोस्तों को भी निमंत्रण दें। 
* इस दिन भगवान विष्णु व लक्ष्मी जी का आर्शीवाद प्राप्त करने के लिए आप शक्तिशाली विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र और लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। 


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24 Nov 2020


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