क्या अर्जुन मुंडा, 2019 झारखण्ड विधानसभा चुनाव में चौथी बार मुख्यमंत्री बन पाएंगे! कैसे हैं उनके ग्रह गोचर?


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व्यक्तिगत जानकारी
नाम – अर्जुन मुंडा
जन्म दिन – 3 मई, 1968
जन्म समय – अनुपलब्ध
जन्म स्थान – खड़ंजाघर, झारखण्ड

मुख्यमंत्री कार्यकाल
1. पहला कार्यकाल – 14 मार्च 2003-2 मार्च 2005
(1 वर्ष, 11 महीने और 12 दिन)
2. दूसरा कार्यकाल – 12 मार्च 2005-14 सितंबर 2006
(1 वर्ष, 6 महीने और 7 दिन)
3. तीसरा कार्यकाल – 11 सितंबर 2010-18 जनवरी 2013
(2 वर्ष, 4 महीने और 7 दिन)

जन्म कुंडली
अर्जुन मुंडा की कुंडली में बुध और शुक्र के साथ- साथ जन्म के समय सूर्य असाधारण रूप से मजबूत स्थिति में है। सूर्य शक्ति और स्थिति का ग्रह है। इसलिए जन्म के समय सूर्य की यह स्थिति उन्हें एक करिश्माई, प्रभावशाली राजनेता बनाता है। वे अपने सकारात्मक दृष्टिकोण से समस्याओं के समाधान खोजने की स्पष्ट दृष्टि रखते हैं। वे बहुत अनुशासित, मेहनती और लक्ष्य के प्रति गंभीर नेता हैं।
इसके अलावा, इनकी कुंडली में बृहस्पति, सूर्य को प्रेरित कर रहा है इसलिए वे हमेशा अपनी सीमाओं को व्यापक बनाने के लिए विस्तार करते रहते हैं। जो उन्हें प्रभावी रणनीति बनाने और मतदाताओं के साथ कुशलता से जोड़ने में सक्षम बनाता है, जो समर्थन हासिल करने में मददगार होती है। मंगल शुक्र के साथ है जो उन्हें एक उत्साही नेता और प्रभावी राजनीतिज्ञ बनाता है। मंगल और शुक्र के बीच आदान-प्रदान एक राजयोग से होता है तथा सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता एवं स्थिति में भी योगदान देता है। हालांकि, शनि और राहु का संयोग संघर्ष और कुछ असफलताओं को भी दर्शाता है। उनके कुंडली में इस तरह के मजबूत ग्रह विन्यास ने ही उन्हें झारखंड का मुख्यमंत्री बनने में मदद की है।
पारगमन में उच्चीकृत बृहस्पति ने उन्हें 2003 में झारखंड का मुख्यमंत्री बनने का अवसर प्रदान किया। उनकी कुंडली में मजबूत बृहस्पति ने उस समय शनि के प्रतिकूल पारगमन पर काबू पाने में भी मदद की। उन्होंने अपनी कुंडली में शुभ “बृहस्पति वापसी” चरण के कारण साल 2003 के बाद राज्य की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। हालांकि, सूर्य के साथ बराबरी में शनि के पारगमन ने उन्हें सी एम के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल पूरा करने की अनुमति नहीं दी थी। उन्हें अपने दूसरे कार्यकाल के 18 महीने बाद ही इस्तीफ़ा देना पड़ा। जन्मकालीन शनि और राहु पर बृहस्पति के पारगमन ने उन्हें वर्ष 2010 में फिर से सी एम की कुर्सी दिलाने में मदद की। साथ ही, शनि और राहु के पारगमन ने उन्हें अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद की। जन्म का सूर्य, शुक्र और बुध पर बृहस्पति का पारगमन उनके लिए सबसे मजबूत कारकों में से एक था, इसलिए उनका तीसरा कार्यकाल मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लंबा कार्यकाल था। लेकिन, जन्म के सूर्य के विरोध में शनि के पारगमन ने एक बार फिर उन्हें अपना पूरा कार्यकाल पूरा करने की अनुमति नहीं दी और 2013 में उन्हें पद छोड़ना पड़ा। फिर भी, उनकी कुंडली में मौजूद मजबूत ग्रह विन्यास ने उन्हें झारखंड राज्य में एक प्रभावशाली नेता बने रहने में मदद की।

वर्तमान ग्रहों का गोचर और 2019 के विधानसभा चुनावों में उनकी संभावनाएं
वर्तमान में, पारगामी बृहस्पति उनके पक्ष में चल रहा है। जन्म के सूर्य पर बृहस्पति की दृष्टि बताती है कि अर्जुन मुंडा आगामी विधानसभा चुनावों में निश्चित रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनके दम पर पार्टी को राज्य में कुछ महत्वपूर्ण सीटें हासिल करने में मदद मिलेगी। वह खुद को एक वैकल्पिक शक्ति केंद्र के रूप में स्थापित करने में सक्षम हो पाएंगे जो उन्हें उसे राज्य की राजनीति में “नेतृत्व विकल्प” के रूप में खुद के लिए एक जगह बनाने में सक्षम बना देगा।
हालाँकि, शनि-केतु का संयोग कुछ शुरुआती समस्याएं फिर से लाने की क्षमता रखते हैं। लेकिन फिर भी वे कुशलता से चुनौतियों का सामना और राजनीतिक गतिरोधों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करके अपनी पार्टी को अच्छी तरह से प्रबंधित करने में सक्षम होंगे। सभी कठिनाइयों के बावजूद वह झारखण्ड की राजनीति में सबसे मजबूत नेताओं में से एक के रूप में उभर कर आ सकते हैं।

23 Nov 2019


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