कुंडली के प्रथम या लग्न भाव में मंगल की महत्ता


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जैसा की वैदिक ज्योतिषी में बताया गया है। कुंडली का पहला भाव व्यक्ति के स्वयं के बारे में होता है। इसलिए यह शुरुआत का भाव भी है, और किसी भी रचना की शुरुआत स्वयं की भावना से ही होती है। क्योंकि जब व्यक्ति स्वयं होगा तभी तो कोई कुछ और आएगा। इसलिए पहले भाव का महत्व सबसे अधिक होता है, जिसे लग्न भाव भी कहा जाता है। यदि वैदिक ज्योतिष में कुछ ऐसे मूल कारक होते हैं, जो मानव भाग्य को प्रभावित करते हैं, तो प्रथम भाव उस ज्योतिष का मूल है। जैसा कि मंगल ग्रह जिसे खगोल विज्ञान में लाल ग्रह भी कहा जाता है, एक उग्र और आक्रामक ग्रह माना जाता है। मंगल लग्न वाले जातक तर्क पसंद और और गुस्सैल स्वभाव के होते हैं। जब प्रथम भाव या लग्न भाव में मंगल की बात आती है, तो ऐसे जातकों के शारीरिक रूप से मजबूत और साहसी होने की संभावना होती है। उनके व्यक्तित्व में बहुत अधिक ऊर्जा और उत्साह होता है।

प्रथम या लग्न भाव में मंगल के कारण प्रभावित क्षेत्र

संबंध
पेशेवर ज़िंदगी
सामाजिक छवि
मनोवृत्ति और व्यक्तित्व

सकारात्मक लक्षण/प्रभाव

जिन जातकों की कुंडली में मंगल प्रथम भाव में स्थित होता है, वे गतिशील और ऊर्जा से भरपूर होते हैं। एक बार जब ये किसी काम के अपना दिमाग चलाते हैं तो फिर इन्हें कोई रोक नहीं सकता। इनका जीवन सक्रियता से परिपूर्ण होता है और ये कोई भी चुनौती को स्वीकार कर सकते हैं। लेकिन इन्हें इस बात का भी अत्यधिक ध्यान रखना चाहिए कि अपनी महत्वकाक्षाओं को पूरा सकते समय ये किसी दूसरे व्यक्ति को चोट न पहुँचाए।

पहले भाव में मंगल वाले जातक हाथ में कई परियोजनाओं के साथ अपने पेशे में सक्रिय रहते हैं। ये लगातार कुछ नया और अनोखा काम करते हैं। जिससे इनके जीवन में बहुत समृद्धि और उत्साह आ सकता है। आप अपने पेशेवर काम और समायोजन में कुशल और प्रभावी होते हैं। अगर आप भी जानना चाहते हैं, कि आपका करियर कैसा रहेगा वर्ष 2020 में तो प्राप्त करें अपना विस्तृत व्यक्तिगत राशिफल 2020 अभी!

इसके अलावा, ये अच्छी तरह से जानते हैं कि दिमाग में एक विचार आने के बाद उसे मूर्तरूप कैसे दिया जाए? हालाँकि, यदि ये दूसरों द्वारा अपने विचारों के कार्यान्वयन में बाधाएँ पैदा करने पर क्रोधित हो उठते हैं। ये अपने लक्ष्यों के बारे में स्पष्ट होते हैं, और बिना किसी आरक्षण के उन्हें आगे बढ़ाते हैं। कुंडली के प्रथम भाव में मंगल के अनुसार इनके कार्यों के अप्रत्याशित परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं।

पहले भाव में मंगल वाले जातक दूसरों द्वारा की गई नकारात्मक टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया नहीं देते। जो इनको पूरी तरह से सकारात्मक बनाता है। सिर्फ इतना ही नहीं, इनकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ती है। ये अपने आस-पास के लोगों में लोकप्रिय होते हैं। इसके अलावा, जीवन की स्थितियों पर इनकी एक बहुत अच्छी पकड़ होती है। जैसे, जब कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाना हो, तो भले ही ये तय ना करें, लेकिन फिर भी इनका निर्णय उस मौजूदा स्थिति में सबसे अच्छा होता है।

नकारात्मक लक्षण/प्रभाव

ये बहुत गतिशील और ऊर्जावान होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ये सब कुछ एक बहादुर रवैये और बहुत उत्साह के साथ करते हैं। फिर ये अपने कार्यों को अपने कार्य के इरादे से तय करते हैं। इनके प्रयासों की प्रक्रिया काफी यांत्रिक हो जाती है। इन्हें अपना दिमाग ज्यादा नहीं लगाना चाहिए। इसलिए, यह बेहतर होगा कि कार्यों को अधिक संगठित और योजनाबद्ध तरीके से करें। आज ही अपनी जन्मपत्री प्राप्त करें और भविष्य के अनुसार जीवन की बेहतर योजना बनायें।

इनका जल्दबाजी में लिया हुआ निर्णय हानिकारक हो सकता है। हालांकि सक्रिय और साहसी होना अच्छा है, लेकिन यदि ये सतर्क और सावधान नहीं होंगे, तो मुसीबतों में पड़ सकते हैं, और इस बात की संभावना और भी बढ़ जाती है क्योंकि मेष राशि पहले भाव की स्वामी राशि होती है।

इसके अलावा इनके बिना चर्चा किए निर्णय लेने और दूसरों से सलाह न लेने की आदत होती है। अकेले काम करना समस्या नहीं है। लेकिन जब ये किसी समूह में रहते हुए अकेले ही सब कुछ करने की कोशिश करते हैं, तो ये बात परेशानी का कारण बन सकती है। समूहों में काम करते समय, इन्हें एक बार तो सबकी सलाह भी लेनी चाहिए।

निष्कर्ष

ये उग्र और आक्रामक तो होते ही हैं, साथ ही ये सक्रिय और गतिशील भी होते हैं। मूल बात ये है, की इन्हें अपनी ऊर्जा पर शासन करने, सकारात्मक, रचनात्मक और उत्पादक रूप से उसका उपयोग करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, इन्हें अपनी गतिविधियों के लिए अधिक संगठित और योजनाबद्ध होना चाहिए। यदि ये असंगठित तरीके से काम करते हैं, तो वांछित सफलता प्राप्त करने की संभावना खो देते हैं। लेकिन अगर उचित योजना के साथ काम करते हैं, तो उच्च स्थान प्राप्त कर सकते हैं।

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गणेशजी की कृपा से,
गणेशस्पीक्स.कॉम टीम

07 Feb 2020


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