कुंडली के प्रथम या लग्न भाव में बृहस्पति की महत्ता


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वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब कुंडली के पहले भाव में बृहस्पति की बात आती है, तो इसका प्रभाव बहुत अधिक होता है। बृहस्पति एक प्रमुख ग्रह है, और ज्योतिष में सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय पिंडों में से एक है। यदि सूर्य को एक तारा माना जाये तो वास्तव में, खगोलीय रूप से, बृहस्पति सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। वैदिक ज्योतिष में, बृहस्पति ग्रह को अत्यधिक आध्यात्मिक माना जाता है। यह भक्ति, पूजा और प्रार्थना का प्रतीक है। इसके अलावा, प्रथम भाव जो स्वयं का प्रतिनिधित्व करता है, वैदिक ज्योतिष में सबसे महत्वपूर्ण भाव है। इसलिए, जब बृहस्पति पहले भाव में स्थित हो, तो जातक सकारात्मक दृष्टिकोण और अच्छे इरादों के साथ एक बहुत दयालु और उदार व्यक्ति होता है। पहले भाव में सूर्य की स्थिति वाले जातकों को जीवन में सौभाग्य और अनुकूल भाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

प्रथम भाव में बृहस्पति के कारण प्रभावित क्षेत्र

सामाजिक छवि
दूसरों के प्रति रवैया
स्वयं के प्रति दृष्टिकोण
व्यक्तित्व और आंतरिक विकास

सकारात्मक लक्षण/प्रभाव

बृहस्पति यानि के सबसे अच्छे गुणों में से एक गुण यह भी है कि यह उस क्षेत्र का विस्तार करते हैं, जहां ये रहते हैं। तो, पहले भाव में बृहस्पति वाले जातकों में व्यक्तित्व विकास के लिए बहुत गुंजाईश होती है। वे आध्यात्मिक, व्यक्तिगत, पेशेवर और जीवन के अन्य क्षेत्रों में विकसित व समृद्ध हो सकते हैं।

इसके अलावा, पहले भाव में बृहस्पति होने से जातकों को भाग्य और सौभाग्य प्राप्त होता है। इस प्रकार, वे कठिनाइयों और संकटों के बावजूद विजेता के रूप में बाहर उभरने की संभावना रखते हैं। वे आत्मविश्वास से भरे हुए होते हैं, और बहुत आसानी से कठिन से कठिन चुनौतियों से भी निपट सकते हैं।

इसके साथ ही, बृहस्पति की लग्न भाव में उपस्थिति जातकों को स्वभाव से बहुत भावुक भी बना देती है। इस प्रकार, वे दूसरों की ज़रूरतों और इच्छाओं के प्रति संवेदनशील और समझदार बन सकते हैं। उनके पास दूसरों के प्रति विचारशील होने की भी भावना होती है, क्योंकि वे दूसरों से भी ऐसी ही अपेक्षा रखते हैं।

ये नैतिक रूप से मजबूत होते हैं और कुछ निश्चित मूल्यों का पालन करते हैं, इसलिए प्रथम भाव में बृहस्पति वाले जातक सही काम करने के लिए दृढ़ संकल्प होते हैं। ये मानते हैं, कि सब कुछ संभव है, और हमेशा सकारात्मक रहने की कोशिश करते हैं। ये कभी-कभी अपने हितों का भी त्याग कर सकते हैं, और दूसरे व्यक्ति की मदद करने में अतिरिक्त समर्पण भी कर सकते हैं। यदि लोग इनकी अच्छाई का मज़ाक उड़ाते हैं, तो भी ये परेशान नहीं होते।


इनकी उदारता को आस-पास के लोगों अच्छी तरह से समझ पाते हैं और इन्हें पसंद भी करते हैं। यह पुण्य इनको जीवन की नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है। साथ ही इन्हें सलाह दी जाती है कि जीवन में कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय अपनी मति का उपयोग करें। इनके पास पहले से ही बुद्धि और ज्ञान होता है। शायद जिसको उन्हें विकसित करने की आवश्यकता है।

नकारात्मक लक्षण/प्रभाव

इस बात की संभावना अधिक होती है कि पहले भाव में बृहस्पति वाले जातकों की दूसरों के मामलों में अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप या बाधा डालने की प्रवृत्ति हो सकती है। हालाँकि वे जानबूझकर ऐसा नहीं करते। लेकिन फिर भी उन्हें इस संबंध में सावधान रहना होगा। सुनिश्चित करें कि आप दूसरों को चोट नहीं पहुँचायें, या आप किसी मुसीबत में पड़ने की संभावना से दूर रहें।

इसके अलावा जब किसी ख़राब स्थिति को संभालने की बारी आती है तो ये कमज़ोर पड़ जाते हैं। ये इस बात का अहसास नहीं कर पाते और जब संभलते है, तब तक इतनी देर हो चुकी होती है, कि ये उसे बदल नहीं पाते। हालांकि स्वतंत्रता अच्छी बात है लेकिन, इसका मतलब ये नहीं कि ये किसी और पर अतिचार करने लगें।


निष्कर्ष

कुंडली के पहले भाव में बृहस्पति की उपस्थिति वाले जातक बुद्धिमान और आध्यात्मिक होते हैं। साथ ही ये प्रबुद्ध होते हैं।  इनमें सकारात्मकता और उत्साह भी बहुत होता है। यदि ये इसके प्रति काम करते हैं, तो इनके पास एक बहुत समृद्ध व्यक्तित्व हो सकता है। हालाँकि, इनको दूसरों से व्यवहार करते समय सतर्क रहने की आवश्यकता है। यह ठीक नहीं होगी, यदि ये किसी को यह सोचने पर मजबूर करें, कि उसे वास्तविकता में होने पर उसकी आवश्यकता है, वे इसे दखलंदाज़ी या हस्तक्षेप के रूप में भी देख सकते हैं।

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गणेशजी की कृपा से,
गणेशस्पीक्स.कॉम टीम

10 Feb 2020


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