क्या है दरिद्र योग? जानिए प्रभाव और उपचार


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कुंडली में विभिन्न ग्रहों की स्थिति और उनके एक दूसरे से परस्पर संबंध को ही वैदिक ज्योतिष में योग कहा गया है। ग्रहों की स्थिति या ग्रहों के संयोजन के आधार पर योग शुभ अथवा अशुभ हो सकते है। दरिद्र योग एक अशुभ योग है, यदि किसी जन्म कुंडली में यह योग बन रहा हो तब यह जातक के जीवन में आर्थिक चुनौतियों सहित कई अन्य मुश्किल समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। वैदिक ज्योतिष में कई ग्रहों के कई योग जैसे चांडाल योग, अल्पायु योग, ग्रहण योग, केमद्रुम योग, शकट योग, कुयोग जैसे अनेक  योग के प्रभावों का विस्तृत विवरण देखने को मिलता है। लेकिन फिलहाल हम दरिद्र योग क्या है ? कुंडली में दरिद्र योग की स्थिति, दरिद्र योग के प्रभाव और दरिद्र योग के उपचार जानने का प्रयास करेंगे।  


क्या है दरिद्र योग!

दरिद्र योग तब बनता है जब कुंडली के दूसरे व ग्यारहवें भाव के स्वामी नीच के होकर छठे, आठवें और बारहवें स्थान पर बैठे हो। कुंडली के दूसरे भाव से व्यक्तिगत आय, धन संपत्ति और मौद्रिक संभावनाओं, वाणी और संवाद कौशल जैसे क्षेत्रों का आंकलन किया जाता है। वहीं कुंडली के ग्यारहवे भाव से समृद्धि, लाभ, दोस्त, बडे़ भाई अथवा बहन, आशाओं, आकांक्षाओं और उनकी पूर्ति से संबंधित आंकलन किये जाते है। जबकि कुंडली के छठे, आठवें और बारहवें भाव क्रमशः  शत्रु, आयु और व्यय से संबंधित है। वैदिक ज्योतिष में इन तीन भावों के योग को त्रिक कहा जाता है। कुंडली के इन तीन भावों को पीड़, विनाश और दुख देने वाला माना गया है। इस स्थिति में जन्म कुंडली के दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी का कुंडली के छठे आठवें और बारहवें घर में नीच का या प्रतिकूल होना ही दरिद्र योग कहलाता है। कुंडली में इस योग के कारण जातक को कई प्रकार की मुश्किलों और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। दरिद्र योग के प्रभाव में जातक को कई प्रकार की आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। दरिद्र योग जातक के जीवन में गरीबी, कंगाली, अपयश , अपमान जैसी परिस्थितियों का पोषण करता है। इसलिए वैदिक ज्योतिष में दरिद्र योग को दुर्भाग्यपूर्ण और अशुभ मान गया है। 

कुंडली में दरिद्र योग का प्रभाव

कुंडली में दरिद्र योग के प्रभाव से जातक को जीवन में आर्थिक संकट, धन की हानि, नौकरी परेशानी, पद, प्रतिष्ठा, मान सम्मान आदि में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जब आय, धन और संपत्ति जैसे भाव के स्वामी दुर्बलता के साथ दुख, पीड़ा और व्यय स्थान पर बैठे हो तब जातक के जीवन में सुख के बहुत सीमित कारण बच जाते है। दरिद्र योग के प्रभाव में नौकरीपेशा लोगों को अपना स्थान बनाये रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, वहीं पेशेवर और व्यापारी वर्ग के लिए हानि लेकर आता है। संबंधों पर इस दरिद्र योग के विपरीत प्रभावों को महसूस किया जा सकता है। दरिद्र योग के प्रभाव में जातक अपने भाई-बहनों, परिवार, पड़ोसी और अन्य रिश्तेदारों के साथ एक अच्छा संवाद स्थापित नहीं कर पाता है। 
दरिद्र योग के प्रभाव में जातक को धन संचय में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उसे वित्त से संबधित कई क्षेत्रों में असफलताओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि कुंडली में इस योग के कारण ऐसा नहीं कहा जा सकता कि इसके प्रभाव में आदमी पैसे-पैसे को मोहताज हो जाता है। लेकिन दरिद्र योग के प्रभाव में उसे सदैव आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इसमें सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इस योग के कारण आय व्यय से कम होती जाती है। यदि दरिद्र योग के प्रभावों के बाद भी जातक आय बढ़ाने में सफल भी हो जाता है तो उसे धन संचय में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। 


यदि आपकी कुंडली में है दरिद्र योग तो इन बातों का रखें ध्यान

– ऐसे जातकों को व्यापार अथवा सामान्य जीवन में भी भारी वित्तीय नुकसानों का सामना करना पड़ सकता है।
– उन्हे पैसे के संबंध में कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है।
– कोई व्यक्ति धन के लिए धोखा दे सकता है। मूल्यवान वस्तुओं के चोरी या गुम हो जाने  की अधिक आशंका होती है। 
– दरिद्र योग के प्रभाव में जातक को अपने अथवा किसी परिजन के स्वास्थ्य पर भी खर्च करना पड़ सकता है। 
– यदि कुंडली के दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी छठे, आठवें और बारहवें भाव में दरिद्र योग का निर्माण कर रहे है। तो उस ग्रह की अंर्तदशा  के दौरान जातक को बड़े आर्थिक नुकसान झेलने पड़ सकते है। 
निष्कर्ष 
हालांकि कुंडली में द्ररिद योग के प्रभावों की गणना के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखना होता है कि दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी उच्च के या किसी लाभकारी ग्रह के प्रभाव में कोई लाभकारी युति का निर्माण तो नहीं कर रहे है। यदि दूसरे और ग्यारहवें भाव का स्वामी उच्च का होकर त्रिक के किसी भाव में बैठा हो तो दरिद्र योग की तीव्रता में कमी देखी जा सकती है। इसी के साथ यदि दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी किसी लाभकारी ग्रह के साथ संयोजन या युति में हो तब भी दरिद्र योग की तीव्रता में कमी देखी जा सकती है। 


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गणेशजी की कृपा से,
गणेशस्पीक्स.कॉम टीम

21 May 2020


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