दलाई लामा के बाद तिब्बती संस्कृति की नींव कमजोर पड़ने के आसार


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दलाई लामा कौन है

इसमें कोई शक नहीं कि तिब्बत के पूर्व शासक यानी 14वें दलाई लामा दुनिया के सबसे प्रमुख बौद्ध धार्मिक नेता की सूची में सबसे ऊंचे स्थान पर हैं और गिलगू संप्रदाय के आध्यात्मिक नेता हैं। ये तल्कुओं की प्राचीन परंपरा के अवतार हैं। एक एेसा अवतार जो बुद्धत्व प्राप्त हो और जन्ममरण के चक्र से मुक्त हो। तिब्बती लोगों में ये ग्यालव रिनपोशे या येशे नोरबू के नाम से विख्यात हैं। तिब्बती बौद्ध धर्म में लामा का अर्थ होता है वह गुरु जो लोगों को सही राह पर चलने की प्रेरणा दे। साल 1989 में दलाई लामा नोबेल प्राइज से सम्मानित किये गए। दशकों से, ये तिब्बत में चीन के अवैध कब्जे के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं जो पूरी तरह से अहिंसा की नीति पर आधारित है।


हाल के घटनाक्रमों ने इस बारे में संदेह उठाया है कि वर्तमान दलाई लामा के शासन के बाद दलाई लामा का शासन अस्तित्व में रहेगा भी या नहीं। एेसी संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में शायद कोई भी दलाई लामा नहीं होगा। तिब्बती समुदाय का नेतृत्व निर्वाचित प्रधान मंत्री कर सकता है। गणेश जी ने धर्मगुरु दलाई लामा की कुंडली का ज्योतिषीय आकलन और तिब्बती स्वतंत्रता आंदोलन के भविष्य के संदर्भ में इस प्रालेख में गहराई से चर्चा की है। पत्रिका के अध्ययन करने के बाद प्राप्त निष्कर्ष इस प्रकार है:

 

दलाई लामा का जन्म विवरण
जन्म तिथि: 6 जुलाई 1935
जन्म समय: अनुपलब्ध
जन्म स्थान: ताकस्तेर, तिब्बत (अब, चीन)

 

सितारों की रहमतों से मानवीय आदर्शों से संपन्न

महान संत दलाई लामा की कुंडली में, ज्ञान और आध्यात्मिकता का ग्रह, गुरु बृहस्पति लग्न स्वामी और सूर्य पर दृष्टि कर रहा है। इसके अलावा, बृहस्पति 9 वें भाव के स्वामी शनि को देख रहा है। इस ग्रह स्थिति ने उन्हें असाधारण ज्ञान, अनुशासन, इंसानियत, और मानवीय आदर्शों से संपन्न किया है।

 

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आध्यात्मिक उपलब्धि की एक ऊंचा स्तर का प्रतिनिधित्व

इसके अलावा, केतु इनके लग्न में है। इसका यहां होना आध्यात्मिकता की एक महान स्थिति का द्योतक है। साथ ही, सूर्यबुधकेतु की युति नें ने दलाई लामा के अंदर एक गहरी संवेदनशीलता पैदा की है। ग्रहों की यह सात्विक स्थिति मानवता को लेकर दलाई लामा के विचार को उच्च कोटि का बनाती है।

 

प्रतिद्वंद्वियों द्वारा इन्हें नुकसान पहुंचने की संभावना

तिब्बती बौद्ध आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा वर्तमान में शनि महादशा के प्रभाव में हैं। शनि 9वें भाव में अपनी स्वराशि में मौजूद है। इसके अलावा, शनि वक्री है और राक्षस राहु के साथ है। इस प्रकार, इस चरण के दौरान, ये अत्यधिक ताकत हासिल करेंगे और मजबूती से दीवार बनकर खड़े रहेंगे। साथ ही, इनके प्रतिद्वंद्वी और जो इनके शत्रु हैं, इन्हें क्षति पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। एेसे में भारत में निर्वासन की ज़िंदगी जी रहे दलाई लामा को अधिकार प्राप्त लोगों की ओर से जोरदार विरोधों का सामना करना पड़ सकता है।

 

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स्वास्थ्य मुद्दों की पूर्वसूचना

गणेश जी तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के बारे में आगे बताते हुए कहते हैं कि चूंकि गोचर का शनि सूर्य पर अपनी नजर डाल है इससे इनको विभिन्न प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है। इनको मानसिक तनाव को बढ़ाने वाली समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। वर्ष 2019 में इनकी सेहत में गिरावट आने के संकेत मिलते हैं। इसे देखते हुए आने वाले महीनों में दलाई लामा को अपने स्वास्थ्य पर हर समय पहरा रखने की आवश्यकता होगी।

 

तिब्बत राष्ट्रीय विद्रोह को भड़काने में शनि की भूमिका अहम

तिब्बत का एक लंबा इतिहास रहा है। इसलिए, फाउंडेशन तारीख की स्पष्ट रूप से जानकारी प्राप्तक करना एक दुरूह कार्य है। हालांकि, राष्ट्रीय विद्रोह दिवस यानी 10 मार्च 1959 स्वतंत्र तिब्बत के इतिहास में एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना थी। इसके इतने बड़े महत्व को देखते हुए इसे फाउंडेशन तारीख माने तो कोई गलत नहीं होगा। इस दिन शनि धनु राशि में था। न्यायप्रिय शनि की सरपरस्ती में ही पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना द्वारा अवैध आक्रामकता के खिलाफ तिब्बत में विद्रोह की घटना अंजाम दी गई। चीन एक बार फिर तिब्बत की स्वतंत्रता आंदोलन को पूरा जोर लगाकर कुचल सकता है।

 

शनि वर्तमान में धनु राशि से गुजर रहा है। इससे दलाई लामा चीन के बीच रिश्ते बिगड़े हुए रहेंगे। चीनी कब्जे के खिलाफ तिब्बतियों का विरोध प्रदर्शन बढ़ सकता है।तिब्बत में विशेष रूप से 201 9 के दौरान गृहयुद्ध छिड़ने की संभावना है।

 

लेकिन, अगर हम चीन की कुंडली पर गौर करें तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि चीन तिब्बतियों पर सख्ती से नियंत्रण करने का प्रयास करें। चीन स्वतंत्रता आंदोलन को कुचले की चेष्टा करेगा।

 

तिब्बत की समस्याओं को बढ़ाएंगी सामाजिक विषमताएं

ज्योतिष के नजरिये से तिब्बत पर तुला राशि का स्वामित्व है। इसलिए, गोचर का गुरु अपने भ्रमणकाल में चीन के कम्युनिस्ट शासन के तहत तिब्बत की प्रगति में मददगार रहेगा। तिब्बत में विभिन्न वर्गों के बीच की गड़बड़ी भी शत्रुता की एक वजह बनकर संघर्ष और अराजकता का माहौल पैदा करेगी।

 

तिब्बती संस्कृति का अंत नहीं, पर घुलमिल जाएगी

हालाँकि, वर्तमान में स्थिति शांतिपूर्ण है, पर साल 2019-2020 में हिंसा फिर से शुरू हो सकती है। यद्यपि तिब्बत की संस्कृति इतनी कमजोर नहीं है कि आने वाले तूफानों के सामने हार मानकर उखड़ जाए। लेकिन, वर्तमान दलाई लामा के शासन के बाद उत्साह ठंडा जरूर हो सकता है। बहरहाल, दलाई लामा के बाद तिब्बती संस्कृति की नींव कमजोर पड़ने के आसार लगते हैं।

 

गणेशजी के आशीर्वाद सहित,

तन्मय के. ठाकर

गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम टीम


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18 May 2018


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