ज्योतिषीय विश्लेषण – तमाम विवादों के बाद बनी महाराष्ट्र सरकार कितना टिकेगी?


Share on :


महाराष्ट्र में तमाम राजनीतिक उठा-पटक के बाद बनी कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना की गठबंधन सरकार का कार्यकाल शुरू होते ही देशभर की नुक्कड़ गलियों में इस सरकार की स्थिरता को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया। भाजपा और तथाकथित चाणक्य के राजनीतिक दाव पेंचों को धता बताती इस सरकार का गठन दशकों पुरानी स्वभाविक विरोधी विचारधारा को दरकिनार कर किया गया। जहां शिवसेना ने अपने कोर हिंदूत्व का बलिदान दिया है, वहीं कांग्रेस और एनसीपी ने अपनी मूलभूत सेक्यूलर विचारधारा से समझौता किया है। कोई भी संस्था अपने वैचारिक रूख से समझौता तो कर सकती है लेकिन उसे छोड़ नहीं सकती, क्योंकि दुनिया की तमाम राजनीतिक पार्टियां एक खास विचारधारा के इर्द-गिर्द ही फलती-फूलती हैं। पार्टी किसी विचारधारा को जन्म नहीं देती अपुति विचारधारा के अनुसरण के लिए दलों का गठन होता है। विचारधारा किसी व्यक्ति का सामाजिक चोला होते है, जिससे उसका भावनात्मक संधंब होता है। व्यक्ति उसी दल या पार्टी में अपनी आस्था रखता है जो उसकी विचारधारा और सोच का समर्थन करती हो। इस आधार पर एनसीपी-कांग्रेस और शिवसेना का गठबंधन उनकी विचारधारा को समर्थन करने वाले लोगों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा करने वाला है। मौजूदा सरकार के गठन के लिए कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना ने मिलकर एक मोर्चे की रूपरेखा तैयार की जिसे महा विकास अघाड़ी का नाम दिया गया। इस मोर्चे के नाम पर सरकार गठन के लिए कुछ मुद्दों पर आपसी मेल-जोल से एक संयुक्त काॅमन मिनिमम प्रोग्राम तैयार किया गया जो इस मोर्चे महा विकास अघाड़ी के नीति-निर्देशों की तरह है। अब इस काॅमन मिनिमम प्रोग्राम या सामान्य न्यूनतम कार्यक्रम की सफलता पर ही इस सरकार का कार्यकाल टिका है। इस न्यूनतम कार्यक्रम की सफलता पर वैसे भी कई सवाल है, लेकिन ज्योतिषीय गणना के आधार पर भी इस सरकार के सामने कुछ विरोधाभास और षडयंत्रों का शिकार होने की संभावना है। जब गणेशास्पीक्स के अनुभवी ज्योतिषीयों ने मौजूदा महाराष्ट्र सरकार की कुंडली तैयार की तो कुछ चौंकाने वाले तथ्य निकल कर सामने आए।

महाराष्ट्र सरकार की कुंडली का विश्लेषण, क्या 5 साल चलेगी सरकार?


मौजूदा महाराष्ट्र सरकार की कुंडली
स्थापना दिवस – 28 नवंबर 2019
स्थान – शिवाजी मैदान, मुंबई महारष्ट्र
समय – 18ः40 मिनट


मौजूदा सरकार की कुंडली और ग्रहों की स्थिति

उपरोक्त कुंडली की गणना के अनुसार मौजूदा सरकार का कार्यकाल अनिश्चिताओं, षडयंत्रों और विरोधाभासों से भरा नजर आता है। कुंडली के प्रथम भाव का स्वामी शुक्र है जो कुंडली में विवाद स्थान यानी अष्टम भाव में बैठा है, और वहां मौजूद शुक्र, चंद्र, केतु और शनि के साथ युति बना रहा है। लग्नेश शुक्र अष्टम भाव में बैठे चंद्र, केतु, गुरू और शनि के साथ युति बना चार ग्रहों का योग बना रहे है। ग्रहों का यह योग मौजूदा सरकार के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। कुंडली के अष्टम भाव में इस योग के बनने से राजनीतिक जीवन में ढेर सारी आफतों का सामना करना पड़ता है। इस योग के दूरगामी परिणाम भी नकारात्मक रूप मे सामने आते है। 

कुंडली में बनता वृषभ लग्न राजनीतिक षड्यंत्र का सूचक

मौजूदा महाराष्ट्र सरकार की कुंडली में वृषभ लग्न उदित हो रहा है। कुंडली में इस योग के उदय से व्यक्ति राजनीतिक षडयंत्रों का शिकार होता है। यदि आप कुंडली पर फौरी निगाह डाले तो इस वृषभ लग्न की स्थिति को भी आसानी से देखा जा सकता है। कुंडली के मात्र छठे, सातवें और आठवें भाव में ही अहम ग्रहों की मौजूदगी है और अन्य लगभग सभी भाव रिक्त है। कुंडली में बनने वाली इस स्थिति को ही वृषभ लग्न कहा जाता है। यह स्थिति शत्रु, विरोधी और राजनीतिक षड्यंत्र को दर्शाती है। छठा घर शत्रु, सातवां घर विरोधी पक्ष और आठवां घर राजनीतिक षड्यंत्र की स्थिति पैदा करता है। मौजूदा  महाराष्ट्र सरकार की कुंडली के छठे घर में मंगल और बुध विरोधी पक्ष को मजबूत करने का कार्य करेंगे। वहीं सप्तम भाव में बैठा सूर्य राजनीतिक षड्यंत्र रचने के पक्ष में कार्य करेंगे। अष्टम भाव में बैठे शुभ और अशुभ ग्रह मिला जुला फल देंगे। छठे सातवें, आठवें घर और उनमें मौजूद ग्रहों के प्रभाव का संयुक्त अध्यन करने के बाद कहा जा सकता है कि, आगामी समय में विरोधी पक्ष मजबूत होगा और किसी राजनीतिक षड्यंत्र की पृष्ठभूमि तैयार करने का काम करेगा।


गुरू-शुक्र के प्रभाव से बडे़ निर्णयों के लिए करेगा प्रेरित

कुंडली के अष्टम भाव में बैठे शुभ और अशुभ ग्रहों की युति मिला-जुला परिणाम देगी। लेकिन गुरू और शुक्र की धन भाव पर दृष्टि होने के कारण सरकार किसानों और मज़दूरों के कल्याण के लिए तुरंत कुछ बड़ी सरकारी घोषणाओं पर धन खर्च कर सकती है। सरकार के कदम का सामान्य मानवीय स्वागत करेंगे, जिससे सरकार को तत्कालिक राजनीतिक लाभ भी मिलेगा। लेकिन धन भाव में बैठे राहु पर अष्टम भाव से शनि दृष्टि डाल रहा है इस कारण सरकारी खज़ाने पर कर्ज बढ़ने की भी संभावना है। मौजूदा महाराष्ट्र सरकार की कुंडली का पूर्ण विश्लेषण करने पर प्रतीत होता है कि आगामी समय कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना के इस गठबंधन के लिए और भी चुनौती-पूर्ण और विवादों वाला रह सकता है जिससे सरकार के लिए अस्थिरता की स्थिति बनने की संभावना है।

गुरू के गोचर से मिलेगा लाभ

मौजूदा स्थिति में शनि-गुरू की गोचर युति सरकार को अस्थिर करने का कार्य कर रही है लेकिन उपरोक्त स्थिति के विपरीत 29 फरवरी 2020 को हो रहे गुरू के राशि परिवर्तन से मौजूदा महाराष्ट्र सरकार की कुंडली में कुछ सकारात्मक बदलावों का संकेत मिलता है। उपरोक्त तिथि से गुरू का गोचर मकर राशि में होगा, इस गोचर से गुरू कुंडली के भाग्य भाव में भ्रमण करेगा। कुंडली के भाग्य भाव में गुरू का यह गोचर उद्धव ठाकरे सरकार को राजनीतिक संकटों से उबरने में मदद कर सकता है। जो कि मौजूदा महाराष्ट्र सरकार के लिए शुभ संकेत है।

निष्कर्ष और भविष्यवाणी

उपरोक्त कुंडली उनके ग्रहों, नक्षत्रों और दशा महादशाओं का गहन अध्यन करने के बाद  निष्कर्ष के तौर पर यह भविष्यवाणी की जा सकती है कि कांग्रेस-एनसीपी और शिवसेना की गठबंधन सरकार जिसे महा विकास अघाडी के नाम से जाना जाता है, मौजूदा और आने वाले समय में इस सरकार के सामने कई कठिनाईयां आने वाली है। सरकार को स्थिर रखने के लिए तीनों साझेदार साथियों को कई मतभेदों को दूर करना होगा। मजबूत विपक्ष के पक्ष में बनी ग्रहों की स्थिति सरकार के सामने रोज़ नई चुनौती पेश करने का काम करेगी। आगामी 5 वर्षों तक सरकार बनाए रखना और उसका संचालन करना मुश्किल भरा हो सकता है। मौजूदा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के शब्दों में कहें तो यह कांटों के ताज से कम नहीं। देखने वाली बात यह होगी की क्या उद्धव और उनके सहयोगी इस मुश्किल दौर से अपनी सरकार को निकाल पाएंगे या नहीं?

अपने व्यक्तिगत समाधान प्राप्त करने के लिए, हमारे विशेषज्ञ ज्योतिषी से बात करें अभी!
गणेशजी की कृपा से,
गणेशस्पीक्स.कॉम टीम

30 Nov 2019


View All blogs

More Articles