कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य-मंगल संयोजन की महत्ता


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वैदिक ज्योतिष में सूर्य और मंगल दोनों को ही उग्र ग्रह माना जाता है। क्योंकि गतिशीलता, आत्मविश्वास और कार्रवाई का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रथम भाव में सूर्य और मंगल का संयोजन बहुत मजबूत संयोग माना जाता है। पहले भाव में इस संयोजन के लक्षण होते हैं, विशाल ऊर्जा और तीव्रता की विशेषता। हालांकि यह ऊर्जा आक्रामकता और महत्वाकांक्षा में भी परिवर्तित हो सकती है, जो सभी अच्छाइयों को नष्ट कर सकती है।


प्रथम भाव में सूर्य-मंगल संयोजन के कारण प्रभावित क्षेत्र

रिश्ते
पेशेवर ज़िंदगी
लोगों के प्रति रवैया
जीवन के प्रति दृष्टिकोण

सकारात्मक लक्षण/प्रभाव

सूर्य और मंगल का संयोजन एक राजा और उसके कंधे के संयोजन की तरह होता है। यह आत्मा और मजबूत इच्छाशक्ति की तरह है। सूर्य प्रधान हैं। केंद्र बिंदु, अस्तित्व का केंद्र (या कोई भी सामाजिक और व्यावसायिक व्यवस्था)। और मंगल व्यक्ति को सर्वोच्चता स्थापित करने की क्षमता प्रदान करता है। मंगल में जीवन शक्ति है, जबकि सूर्य में प्रधानता (सबसे महत्वपूर्ण होने का गुण)। इसलिए यह संयोजन क्रियाशलता के लिए ऊर्जा को दर्शाता है।

जब सूर्य-मंगल संयोजन सकारात्मक रूप से काम करता है, तो यह जातक को बहादुर, तीव्र, मजबूत, दृढ़ और आक्रामक बनाता है। यह ग्रह संयोजन सेना, या खेल जैसे व्यवसायों के लिए अच्छा है। ऐसे जातक राजनीति में भी अच्छा कर सकते हैं। वे अपने मजबूत आत्मविश्वास की मदद से सबसे कठिन चुनौतियों का सामना कर उन्हें दूर कर सकते हैं।

प्रथम भाव में सूर्य और मंगल के संयोजन के कारण जातकों की उपस्थिति मजबूत होती है। उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। लोग उनके प्रति उदासीन भी नहीं हो सकते। वे अत्यधिक सक्रिय और ऊर्जावान होते हैं। यदि वे ऐसे नहीं होते, तो फिर इस बात की काफी संभावना होती है कि वे संघर्षशील हो सकते हैं।

पहले भाव में सूर्य-मंगल के संयोग से जातक अपने दृष्टिकोण में काफी केंद्रित होते हैं। अधिकांशतः वे वह सब पाने में सक्षम होते हैं, जो वे प्राप्त करना चाहते हैं। वे बिल्कुल अधीर नहीं होते हैं, कम से कम तब, जब यदि आप उन्हें व्यापक रूप से नहीं देखते हैं। अगर वे कुछ पाना चाहते हैं, तो वे अपनी सारी आत्मा और दिल लगा देते हैं। जिसे हासिल करने के लिए वे कुछ भी कर सकते हैं।


इसके अलावा, 1 भाव में सूर्य-मंगल के संयोजन से जातक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी होते हैं। उन्हें प्रदर्शन करना पसंद होता है, और जीतना भी। जब वे खेल में होते हैं, तो वे दुर्जेय प्रतिद्वंद्वी हो सकते हैं। भले ही वे खेलों में अच्छे रणनीति कार नहीं हो सकते, लेकिन वे अपने लक्ष्यों तक पहुंचने और खेल जीतने के लिए यथासंभव ऊर्जा और बल लगाते हैं।

खैर, सूर्य-मंगल संयोजन दो बलवान ग्रहों का एक संयोजन है। इसलिए जिन जातकों की कुंडली के पहले भाव में ये संयोजन होता है, वे अपनी अभिव्यक्ति में काफी बलवान होने की संभावना रखते हैं, फिर भले ही वे महिला ही क्यों न हों। प्यार और रोमांस के मामलों में, ये स्वयं पहल करते हैं। इसके अलावा, वे प्यार में पीछा करने का आनंद भी लेते हैं। अगर कोई उनके जैसा नहीं होता है, तो वे परेशान नहीं होते। इसके विपरीत, वे इसे एक चुनौती के रूप में ले सकते हैं।

नकारात्मक लक्षण/प्रभाव

अगर ऐसे जातकों की ऊर्जा को ठीक से प्रवाहित नहीं किया जाए, तो यह उन्हें खतरनाक परिणाम दे सकती है। तब ये एक बड़ा बैल या सांड की भांति व्यवहार कर सकते हैं। फिर वे छोटे-छोटे मुद्दों पर उत्तेजित हो सकते हैं और झगड़े कर सकते हैं, जो उनकी छवि और उनके आसपास के सद्भाव के लिए भी हानिकारक हो सकता है।

यदि हम इनके मनोविज्ञान में गहराई से उतरते हैं, तो एक बहुत ही असुरक्षित व्यक्ति को पाते हैं, जो खुद को साबित करने की क्षमता में सब कुछ करेंगे। उनकी रुकावट उनके खो जाने या छोड़े दिए जाने के मजबूत अंतर्निहित डर में दिखाई देती है। अपने जीवन और रिश्तों में चल रही समस्या को दूर करने के लिए पाएं प्रभावी उपाय अभी!

निष्कर्ष

जिन जातकों की कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य-मंगल का संयोजन होता है, उनमें ऊर्जा और गतिशीलता होती है। वे उत्साह से संपन्न होते हैं। यदि इस ऊर्जा, गतिशीलता और उत्साह का उचित उपयोग किया जाए, तो जातक अपने पेशेवर जीवन में चमत्कार कर सकते हैं। लेकिन, यदि इस ऊर्जा का सही उपयोग नहीं किया जाये, तो जातक अपने दैनिक जीवन और व्यवहार में विघटनकारी भी हो सकते हैं। इसलिए, इन जातकों को अपने जीवन के उद्देश्य को तलाशने और तदनुसार कार्य करने की आवश्यकता है।

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गणेशजी की कृपा से,
गणेशस्पीक्स.कॉम टीम

14 Feb 2020


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