कुंडली के पहले भाव में बुध की महत्ता


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भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वैदिक ज्योतिष की शुरुआत पहले भाव से होती है। यह जातक के व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करता है जो की जातक का लग्न भाव भी कहलाता है। कुंडली के पहले भाव का महत्व इस तथ्य में निहित होता है कि प्रत्येक वस्तु की आत्मा उसके केंद्र में होती है। यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए अंतिम संदर्भ बिंदु है। सूर्य का निकट ग्रह होने कारण यह व्यक्ति की मानसिक प्रकृति का द्योतक होता है। जैसी व्यक्ति की मानसिकता होती है, अन्य चीजों को भी वह उसी दृष्टि से देखता है। इसलिए बुध ग्रह बुद्धि और संचार के लिए भी उत्तरदायी होता है। अतः पहले भाव में बुध की उपस्थिति एक बहुत ही मिलनसार चरित्र को जन्म देती है, जिसके पास एक त्वरित-सोच वाला बुद्धिमान मस्तिष्क होता है।

पहले भाव में बुध के कारण प्रभावित क्षेत्र

कैरियर और पेशेवर जीवन
व्यक्तिगत जीवन और संबंध
अभिव्यक्ति और संचार क्षमता
ज्ञान और सीखने के प्रति दृष्टिकोण

सकारात्मक लक्षण/प्रभाव

कुंडली के पहले भाव में बुध की उपस्थिति वाले जातक अज्ञात के रोमांच से प्रेरित होते हैं। ये हमेशा कुछ नया और रोमांचक तलाशते रहते हैं। ये बहुत ही दिलचस्प व्यक्ति होते हैं। जिनके पास कई प्रकार की रुचियाँ होती हैं। इनका दिमाग बहुत प्रतिभाशाली होता है, जिसमें बहुत सारे अलग-अलग विचार और जानकारी भरी होती है। ये बहुमुखी प्रतिभा के धनि होते हैं। ये हमेशा कुछ नया और ऐसा सीखने की कोशिश करते रहते हैं, जो इन्हें अपने सुविधा क्षेत्र से बाहर जाकर काम करने के लिए प्रेरित करे। इनका जीवंत व्यक्तित्व दूसरों इनका अनुसरण करने के लिए प्रेरित करता है।

इनके व्यक्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होता है कि ये हमेशा बदलाव में विश्वास रखते हैं। ये हमेशा गतिशील, स्वीकार्य और लचीले होते हैं। चूँकि बुध संचार का प्रतिक होता है, और हम देखते हैं कि बातचीत हमेशा चलती रहती है, और कभी रूकती नहीं। इसलिए जिन जातकों की कुंडली के पहले भाव में बुध स्थित होता है, वे भी बदलावों के साथ हमेशा चलते रहते हैं।

जिन जातकों की कुंडली के पहले भाव में बुध होता है उनमें सबसे महत्वपूर्ण बात ये होती है कि वे हमेशा अभिव्यक्ति के अधिकार में विश्वास करते हैं। उनकी स्वाभाविक जिज्ञासा उनके मस्तिष्क में बहुत सारी जानकारी एकत्र करने में मदद करती है। वे सीखने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं, और किसी दिन विशेष की प्रतीक्षा नहीं करते। लेकिन क्या आपका मस्तिष्क वर्ष 2020 में आपको सफलता दिलाएगा। जानने के लिए प्राप्त करें अपना वर्ष 2020 का विस्तृत व्यक्तिगत राशिफल अभी!

नकारात्मक लक्षण/प्रभाव

कुंडली के प्रथम भाव में बुध की उपस्थिति वाले जातकों का साहसिक स्वभाव दोनों तरह से कटौती करता है। इनकी हमेशा कुछ नया सीखने की आदत जीवन के कुछ पहलुओं पर महँगी भी पड़ सकती है। जैसे ये किसी नयी योजना की शुरुआत तो कर सकते हैं, लेकिन उसे पूरा करने के लिए किंचित मात्र ही ये अंत तक अनुसरण कर पाएं। इसकी यही कमी इन्हें हानि पहुंचा सकती है। इसलिए यदि यदि ये जीवन में ऊपर उठना चाहते हैं, तो इन्हें इस कमी में सुधार करने की आवश्यकता है।


पहले भाव में बुध वाले जातकों में लोगों के साथ चर्चा करते समय हावी रहने और चर्चा को उस विषय पर मोड़ने की क्षमता होती है, जिसमे वे रूचि रखते हैं। ये यह सोचने में बहुत व्यस्त रहते हैं कि ऐसा क्या सुने की इन्हें दूसरों पर ध्यान न देना पड़े। ये सच है कि इनका उत्साह शीघ्र प्रभावी होता, लेकिन तब इनका स्वर अशिष्ट हो सकता है। इसलिए, इन्हें सलाह है कि दूसरों की बातों को भी अधिक महत्व देना चाहिए। साथ ही इन्हें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि ये दूसरों की भावनाओं और इच्छाओं के प्रति असंवेदनशील न हों।

पहले भाव में बुध वाले जातक ऊँचे स्वर वाले और बेझिझक होते हैं। इनके मस्तिष्क में जो भी चल रहा होता है ये उसे कह देते हैं। साथ ही ये ऐसे लोगों को को नापसंद करते हैं, जो बातों को घुमाफिरा कर गोल-गोल करते हैं, क्योंकि इनके विचार और बातें बहुत ही स्पष्ट और सीधे होते हैं।

निष्कर्ष

ऐसे जातक बुद्धिमान और दिलचस्प होते हैं। ये हमेशा नई बातचीत और विचारों से भरे रहते हैं। लेकिन फिर भी इनका लचीला होना और हर समय नई चीजों की खोज करना भी इनकी कमज़ोरी बन सकता है। ये उन चीजों को पकड़ नहीं सकते हैं, जो जीवन में अहमियत रखती हैं। धैर्य, सफलता की आधारभूत मौलिक आवश्यकताओं में से एक है, जिसे स्वाभाविक रूप से न होने पर भी अपनाना चाहिए।

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गणेशजी की कृपा से,
गणेशस्पीक्स.कॉम टीम

10 Feb 2020


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