ज्योतिषीय भविष्यवाणी: क्या साल 2020 में देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था पकड़ेगी गति?


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साल 2019 के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजारों ने आर्थिक गिरावट को दर्शाने वाले आंकड़े पेश किए। इस दौरान बाॅम्बे स्टाॅक एक्सचेंज के संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में 304.26 प्वाइंट की गिरावट देखने को मिली। हालांकि सेंसेक्स के सालाना प्रदर्शन की बात करें तो इस दौरान सेंसेक्स में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस लिहाज से बंबई शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 11,05,363.35 करोड़ रूपये तक बढ़ गया। कई उतार-चढ़ाव और आर्थिक परिवर्तनों से भरे इस साल में शेयर बाजार ने तो अप्रत्याशित वृद्धि हासिल की लेकिन देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था के ख़स्ता हालात साल 2020 में आगे खिसकते नजर आएंगे। इस हिसाब से बुधवार को शुरू हुआ साल 2020 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण नजर आता है।

साल 2020 की शुरूआत राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के अगले पड़ाव को निर्धारित करने के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस साल की शुरूआत के साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने या किसी बड़ी दुर्घटना के शिकार होने की अटकलें भी शुरू हो गई है। अर्थव्यवस्था में बढ़ती आम जन मानस की उत्सुकता को देखते हुए गणेशस्पीक्स के अनुभवी ज्योतिषियों ने साल 2020 के कुछ बड़े आर्थिक घटनाक्रम को अपने पाठकों तक पहुंचाने का प्रयत्न किया है। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर अपने पाठकों को सटीक भविष्यवाणी प्रदान करने के लिए हमने भारतीय अर्थव्यवस्था के कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों की क्रम वार भविष्यवाणी करने की कोशिश की है। आइये जानते हैं, कि साल 2020 आर्थिक मोर्चे पर देश के लिए कितना लाभकारी होने वाला है।


प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों का ज्योतिषीय विश्लेषण

नए साल की शुरुआत में ही भारत की कुंडली के 7वें भाव में पांच प्रमुख ग्रहों शनि, सूर्य, केतु, गुरु और बुध की महायुति देखने को मिल रही है। ज्योतिष के अनुसार ग्रहों की यह स्थिति देश और दुनिया के आर्थिक विकास के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। ग्रहों की यह स्थिति अचानक आर्थिक गिरावट, युद्ध जैसी स्थिति, दुर्घटना या किसी बड़ी अप्रिय घटना की ओर इशारा करती है। ग्रहों की इस महायुति के कारण आर्थिक मंदी के हालत उत्पन्न हो सकते हैं। अगर शेयर बाजार की बात करें तो 05 जनवरी से 18 जनवरी के बीच का समय काफी महत्वपूर्ण और नकारात्मक रहने वाला है। यह स्थिति हिंदी की प्रसिद्ध कहावत “कुछ भी हो सकता है!” को इंगित करती है। इसलिए इस दौरान आर्थिक रूप से भी बड़े बदलाव आ सकते हैं। यही वह समय है, जब अर्थव्यवस्था को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक कुछ कड़े कदम उठा सकती है, या सरकार कोई ऐसी नीति की घोषणा कर सकती है, जो जनता की समझ से परे हो।


बैंकिंग क्षेत्र

बैंकिंग क्षेत्र की कुंडली के अनुसार पहले भाव में कर्क राशि स्थित है, जबकि लग्न का स्वामी भाग्य के घर में स्थित है। चंद्रमा, रेवती नक्षत्र में मीन राशि में स्थित है, और बुध साल भर बार-बार अपनी क्षमताओं को कम-ज्यादा करता रहेगा। इसलिए ग्रहों की यह स्थिति बैंकिंग क्षेत्र में नई चुनौतियों की संभावनाओं को जन्म देने का कार्य करेगी। इस दौरान बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े बड़े कारोबारों में भी गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

उपभोग क्षेत्र

एफएमसीजी, उपभोग, पूंजीगत, उपभोग और स्वास्थ्य क्षेत्र की कुंडली का अध्ययन करने पर पता चलता है, कि मीन राशि पहले भाव में जबकि बृहस्पति अपने स्वयं के घर में बैठे हुए हैं। वर्ष की शुरुआत में बृहस्पति धनु राशि में होंगे, और बहुत तीव्र गति से मकर राशि में प्रवेश करेंगे, 30 मार्च से 29 अप्रैल तक मकर में ही भ्रमण करेंगे। अपने मकर गोचर के दौरान अप्रैल में गुरु वक्री होकर पुनः धनु राशि में प्रवेश करेंगे। ग्रहों की यह स्थिति साल 2020 के दौरान इस क्षेत्र में अत्यधिक उतार-चढ़ाव और अप्रत्याशित बदलावों की ओर इशारा करती है।


रियल एस्टेट क्षेत्र

रियल एस्टेट क्षेत्र की कुंडली के पहले भाव के स्वामी सिंह हैं, और अमुख व्यवसाय के स्वामी शुक्र भी पहले भाव में ही भ्रमण कर रहे हैं। मंगल तीसरे भाव में स्थित है, जो रियल एस्टेट की प्रगति को प्रभावित करते हैं। इसलिए भारत में निवेश करने वाले सभी निवेशकों के लिए यह निवेश का पसंदीदा क्षेत्र रहा है। लेकिन 2020 में इस क्षेत्र में कोई नए बदलाव देखने को नहीं मिलेंगे। इस समयावधि के दौरान रियल एस्टेट सेक्टर में औसत कारोबार देखने को मिलेगा। सामान्य शब्दों में कहें तो इस दौरान इस क्षेत्र में कुछ नया और खास देखने को नहीं मिलेगा।


निष्कर्ष

भारत की कुंडली का अध्ययन करने पर पता चलता है, कि इस साल की शुरुआत में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिर साल की मध्यावधि में मिलेजुले परिवर्तन देखने को मिलेंगे। हालांकि साल की अंतिम तिमाही में कुछ खास और बड़े आर्थिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह साल औसत सुधारों की ओर इशारा तो करता है, लेकिन आम जन मानस पर पड़ने वाले प्रभावों को इंगिकृत नहीं कर पाता। कुल मिलाकर साल 2020 के दौरान आपको अपने और अपने व्यापार-व्यवसाय से जुड़े आर्थिक फैसले बेहद सोच-समझकर और सलाह-मश्वरे के बाद ही करने चाहिए।

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गणेशजी की कृपा से,
निष्कर्ष

02 Jan 2020


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