स्फटिक एवं रत्न

GaneshaSpeaks.com

शब्दकोश में क्रिस्टल स्टोन (स्फटिक) को परिभाषित करते हुए बताया गया है कि यह एक ठोस सदृश पदार्थ है, जिसमें संतुलित व्यवस्था सतह अग्रभाग के साथ प्राकृतिक रेखागणित के अनुसार नियमित आकृति है। स्फटिक तकनीकी रूप से प्राकृतिक चट्टानों से होने वाली मजबूत संरचना है, जो उच्च ताप एवं जलवायु परिवर्तन के कारण निर्मित होती है, इसके निर्माण की प्रक्रिया सालों तक चलती है, कभी कभी तो इस प्रक्रिया में सदियों एवं हजारों बरसों तक समय लगता है। स्फटिक दो प्राकृतिक तत्वों आॅक्सीजन व सिलिकाॅन के मिश्रण से बना है जब यह दोनों तत्व गर्मी और असहाय दबाव के साथ भूगर्भ में एक साथ जुड़ते हैं तो कुदरती स्फटिक का निर्माण होता है ।

प्राचीन समय से क्रिस्टल का इस्तेमाल चिकित्सा प्रयोजनों के लिए किया जाता आ रहा है। इसको ताबीज के रूप में भी धारण किया जाता है एवं आम तौर पर यह पत्थर विविध रंगों में उपलब्ध है। हालांकि, वर्तमान समय में इसका इस्तेमाल चिकित्सा प्रयोजनों के अलावा आभूषण बनाने में बड़े स्तर पर किया जाने लगा है। क्रिस्टल असंख्य रूपों में उपलब्ध है।

कई रत्न या यों कहें कि उनमें से ज्यादातर, तकनीकी रूप से क्रिस्टल हैं, क्योंकि उनके प्राकृतिक गठन की प्रक्रिया क्रिस्टलीकरण द्वारा होता है। लेकिन, रत्न अक्सर सघन, दुर्लभ और कठिन होते हैं एवं विविध रंगों तथा चमकीले होते हैं, जो उनको वर्गीकरण योग्य बनाता है।

चिकित्सा पत्थर, स्टफिक एवं बेश्कीमती पत्थर सभी जमीं से आते हैं। स्टफिक का निर्माण शैलभूत (पृथ्यी की ठोस तह के नीचे की कल्पित तरल तह) से होता है। इन स्टफिकों को ताप, ठंडा और विस्थापन की भूगर्भिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। स्टफिक को संजीव पत्थर माना जाता है, क्योंकि यह स्वयं को विकसित करता है, जब इसको उपयुक्त परिस्थितियों में छोड़ दिया जाता है। रेखागणित परिरूप, रंग एवं सूक्ष्म कंपन, जोकि स्टफिक या पत्थर की उम्र, खनिज संरचना, ताप एवं अन्य प्राकृतिक गुणों से आता है, जिससे संरचना के दौरान यह आत्मातस करते हैं, के कारण स्टफिक एवं पत्थर का ऊर्जा क्षेत्र का प्रभाव अलग अलग रहता है।

बड़े रत्न एवं स्टफिक छोटे छोटे लाखों स्टफिकों से बनते हैं, जो निरंतर गति में रहते हैं, इस कारण लगातार विभिन्न आवृत्तियों पर ऊर्जा उत्सर्जन होता रहता है। इसी कारण स्टफिक को बड़े स्तर पर चिकित्सा के रूप में इस्तेमाल का जाता किया है। स्टफिक का रंग उनकी उपचारात्मक शक्ति में एक अहम भूमिका अदा करता है। स्टफिक का रंग एवं प्रकाश नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करता है एवं जीवन में शांति, सद्भाव, शुद्घता लाने में सहायता करता है।

प्राचीन सभ्यताओं जैसे कि चीनी, मिस्र, सुमेरियन, ग्रीक, रोमन और यहां तक कि चिकित्सक स्टफिक का उपचार के लिए अलग अलग तरीकों जैसे पाउडर बनाकर, सुधा के रूप में, धारण करवा, शरीर के किसी हिस्से पर रखकर, अनुष्ठानों में सम्मिलित कर इस्तेमाल करते थे। पत्थरों के संदर्भ में महत्वपूर्ण जानकारियां पीढ़ी दर पीढ़ी हम तक पहुंची तथा समग्र स्वास्थ्य और चिकित्सा की लोकप्रियता के साथ उभरकर सामने आयीं।

भारतीय चिकित्सा विज्ञान आयुर्वेद एवं अन्य लोकप्रिय यूनानी चिकित्सा रत्न एवं स्टफिन का इस्तेमाल बड़े स्तर पर दवा निर्माण में करता है। आयुर्वेद में बेश्कीमती धातु भस्म के साथ ही दवा निर्माण में मोती एवं रेड कोरल की भस्म बड़े स्तर पर इस्तेमाल में आती है।

स्टफिन पृथ्वी का अंग है। यह क्वार्ट्ज और सिलिका के बने होते हैं, जो कि मानव शरीर के सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं एवं वे रत्न बनते हैं तथा नहीं भी बनते। क्रिस्टल भी एक कंपन आवृत्ति फेंकता है, जो पृथ्वी एवं मानव दोनों के विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र से मेल खाती है। आजकल सर्वाधिक इस्तेमाल में स्टफिक स्पष्ट क्वार्ट्ज का इस्तेमाल होता है, जो घड़ियों, कम्प्यूटरों एवं रेडियो आदि में पाया जाता था।

असभ्य स्टफिक अपनी प्राकृतिक अवस्था में पाए जाते हैं। स्टफिक खनन के दौरान पहाड़ों से टूट जाते हैं। स्टफिक अपनी प्राकृतिक स्थिति में काफी असभ्य होते हैं, इसलिए अधिकतर स्टफिक का इस्तेमाल उपचार के लिए पाउडर बनाने हेतु किया जाता है। उनको मानव शरीर पर बहुत अच्छे तरीके से रखा जाता है, ताकि ऊर्जा को आकर्षित कर इलाज किया जा सके।

पोलिश किए स्टफिक वो होते हैं, जो पानी एवं रेत के साथ पहाड़ों से गिरकर समुद्री तटों के किनारे आ जाते हैं, इसके कारण उनकी सतह काफी कोमल एवं गोल हो जाती है। इसको टच स्टोन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है एवं इनको ताबीज के रूप में पर्स या जेब में रखा जा सकता है। कोमल सतह वाले स्टफिक अच्छे तरीके से उपचार में मदद करते हैं क्योंकि इसको शरीर के किसी हिस्से पर बड़ी आसानी से रगड़ा जा सकता है।

इसके अलावा फैशनेबल ज्वैलरी के साथ इसको धारण किया जा सकता है, जो महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रदान करता है। इस स्टोन की शक्ति को प्रोत्साहन देने के लिए बेश्कीमती धातु एवं रंग डिजाइन में शामिल किए जा सकते हैं। इसके अलावा जीवन में सद्भाव, शांति, अच्छा स्वास्थ्य, समृद्घि, उत्साह, उमंग, सकारात्मक ऊर्जा या विशेष स्वास्थ्य जरूरतों की पूर्ति के लिए इसको ज्वैलरी में जड़ा जा सकता है। विभिन्न क्रिस्टल उपचार के अन्य रूपों में भी इस्तेमाल किए जाते हैं जैसे कि रेकी एवं प्राणिक उपचार विधि। हालांकि, यह विषय विश्वास संबंधित हैं एवं कभी कभी इसके सकारात्मक नतीजे देखने को मिले हैं। पिरामिड स्वरूप के स्टफिक एवं अन्य स्टफिक का इस्तेमाल किसी की आभा एवं आस पास के वातावरण को शुद्घ करने के लिए किया जाता है। पिरामिड आकार के स्टफिक को घर या कार्यालय में रखना चाहिए, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा अवशोषित करते हैं।

आप अन्य अति महत्वपूर्ण और उपयोगी तावीज़ के बारे में जानना चाहते हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा को पकड़ने में आपकी मदद कर सकते हैं एवं आपको सकारात्मक नतीजे दे सकते हैं। तो जानने के लिए पढ़ें – यंत्र