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चीनी ज्योतिषशास्त्र

परिचय

चीनी ज्योतिष शास्त्र चीनी दर्शन शास्त्र और जल, पृथ्वी और स्वर्ग के आपसी सामजंस्य के सिद्धान्त पर आधारित है| यह पौराणिक सिद्धान्त 12 वर्षों के गणितिय चक्र पर आधारित है, जिसमें प्रत्येक वर्ष को एक प्राणि के प्रतीक रुप में दर्शाया गया है | ये 12 प्राणि चिह्न चीनी ज्योतिष शास्त्र के आधार हैं | इन प्राणि चिह्नों में चूहा, बैल, शेर, खरगोश, ड्रेगन, साँप, घोड़ा, बकरी, बंदर, मुर्गा, कुत्ता और सूअर है | कई जगहो पर बकरे की जगह भेड़ और सूअर की जगह वराह लिखा जाता है | ये प्राणि हर साल को प्रर्दशित करते है अत: किसी का जन्म वर्ष उसके चीनी प्रतीक को निर्धारित करने में बहुत महत्वपूर्ण है | इन वर्षों के अलावा महीने, दिन और घण्टे भी इन 12 प्राणि चिह्नो द्वारा दर्शाए जाते है | उपर बताए गए पक्ष के अलावा यिंग-येंग का संतुलन सिद्धान्त, वु-सिन्ग तकनिक और पाँच तत्व- धातु, लकड़ी, अग्नि, पृथ्वी और वायु भी इस विधा के मुख्य भाग है | चीनी ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये सभी किसी व्यक्ति के भूत, वर्तमान और भविष्य बताने के लिए उपयोगी है और इनसे किसी के व्यक्तित्व तथा भविष्य के बारे में अचूक भविष्यवाणि की जा सकती है |

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